Nuclear Crisis: रूस की अमेरिकी पनडुब्बियों को निशाना बनाने की चेतावनी

रूसी सांसद विक्टर वोडोलात्सकी ने चेतावनी दी कि अमेरिका से भेजी गईं पनडुब्बियां रूस के निशाने पर हैं और रूस ने समुद्र में पहले से पर्याप्त पनडुब्बियां तैनात हैं।

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नई दिल्ली: यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के (US Russia Nuclear Crisis) बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो परमाणु पनडुब्बियों को रवाना करने के फैसले ने रूस को सख्त जवाब देने के लिए प्रेरित किया है। रूसी सांसद विक्टर वोडोलात्सकी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा भेजी गईं ये पनडुब्बियां रूस के निशाने पर हैं और रूस के पास समुद्र में पहले से ही पर्याप्त पनडुब्बियां तैनात हैं। यह बयान रूस की सुरक्षा परिषद के सदस्य दिमित्री मेदवेदेव के उस कथन के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने ट्रंप के रूसी अर्थव्यवस्था को ‘मृत’ बताने वाले बयान पर पलटवार करते हुए अमेरिका को ‘डेड हैंड’ (स्वचालित परमाणु प्रतिक्रिया) की याद दिलाई थी।

रूस-अमेरिका तनाव का नया अध्याय
वोडोलात्सकी ने कहा, अमेरिका द्वारा भेजी गईं परमाणु पनडुब्बियां रूसी रडार पर हैं। हमारी नौसेना पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए एक ठोस समझौता आवश्यक है, ताकि तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को खत्म किया जा सके। रूस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अमेरिका के आक्रामक रुख का जवाब देने के लिए तैयार है।

परमाणु पनडुब्बियों की ताकत
परमाणु पनडुब्बियां आधुनिक युद्ध में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। ये पानी के नीचे लंबे समय तक गुप्त रूप से संचालित हो सकती हैं और इन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव है। ये न केवल परमाणु हथियारों से लैस होती हैं, बल्कि प्रतिशोधी हमले की गारंटी भी देती हैं, जिससे परमाणु युद्ध की संभावना को रोकने में मदद मिलती है। वैश्विक स्तर पर परमाणु पनडुब्बियों की स्थिति इस प्रकार है:

  • अमेरिका: 14 से अधिक परमाणु पनडुब्बियां, जिनमें ट्राइडेंट-II मिसाइलें शामिल हैं।
  • रूस: 15-20 परमाणु पनडुब्बियां, बुलावा मिसाइलों से लैस।
  • चीन: 7 परमाणु पनडुब्बियां।
  • ब्रिटेन: 4 परमाणु पनडुब्बियां।
  • फ्रांस: 4 परमाणु पनडुब्बियां।
  • भारत: 1 अरिहंत-श्रेणी की पनडुब्बी।

इन पनडुब्बियों की वैश्विक पहुंच और गुप्त संचालन क्षमता उन्हें किसी भी देश के लिए रणनीतिक रूप से अजेय बनाती है।

संयुक्त राष्ट्र का अल्टीमेटम
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने रूस को 8 अगस्त तक युद्धविराम और शांति वार्ता शुरू करने का अल्टीमेटम दिया है। अमेरिकी राजनयिक जॉन केली ने 31 जुलाई को 15 सदस्यीय परिषद को बताया कि रूस और यूक्रेन को तत्काल शांति वार्ता शुरू करनी चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि यह समयसीमा पूरी नहीं होती, तो अमेरिका वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए और सख्त कदम उठाएगा।

ट्रंप के सामने क्या विकल्प?
ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। रूस की चेतावनी के बाद ट्रंप के सामने अब सीमित विकल्प हैं: या तो वह कूटनीतिक रास्ता अपनाकर तनाव को कम करें, या फिर सैन्य तैनाती को और बढ़ाकर स्थिति को और जटिल करें। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को हवा दे रहा है, और इसे रोकने के लिए तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

वैश्विक शांति की जरूरत
यह घटनाक्रम वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती है। रूस और अमेरिका के बीच बढ़ती तल्खी को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर काम करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों पक्षों को संयम बरतने और बातचीत के रास्ते को अपनाने की जरूरत है, ताकि दुनिया एक और बड़े युद्ध की विभीषिका से बच सके।

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