नई दिल्ली: अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन के दौरान लगाए गए अधिकांश टैरिफ (Trump Tariffs) को कानून के खिलाफ बताते हुए उन्हें अवैध करार दिया है। अदालत ने हालांकि इन टैरिफ को तुरंत हटाने का आदेश नहीं दिया, बल्कि 14 अक्टूबर तक इन्हें लागू रहने दिया है ताकि ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Appeal) में अपील का अवसर मिल सके। इस फैसले को ट्रंप की आर्थिक नीति (Economic Policy) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ट्रंप की आर्थिक रणनीति पर असर
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब फेडरल रिजर्व (Federal Appeals Court) की स्वतंत्रता को लेकर कानूनी लड़ाई पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रहे इन कानूनी टकरावों ने ट्रंप की पूरी आर्थिक रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत का ताजा निर्णय अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक संबंधों पर दूरगामी असर डाल सकता है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया: अदालत को बताया पक्षपातपूर्ण
अदालत के फैसले के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं! आज एक अति पक्षपातपूर्ण अपील अदालत ने फैसला सुनाया है कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन वे जानते हैं कि अंत में अमेरिका की ही जीत होगी। यदि ये टैरिफ कभी हटा दिए गए, तो यह देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर देगा।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ अमेरिका को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं और इनका हटना विनाशकारी साबित होगा।
भारत पर सबसे बड़ा असर
ट्रंप प्रशासन ने 7 अगस्त को भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ (Trump Tariffs) लागू किया था। यही नहीं, उसी दिन करीब 70 अन्य देशों पर भी समान टैरिफ लगाए गए। भारत को लेकर ट्रंप ने बाद में यह घोषणा की कि रूसी कच्चे तेल की खरीद के चलते भारतीय वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इस कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव और बढ़ गया।
निवेश कंपनियों की आलोचना
अमेरिकी दिग्गज निवेश कंपनी जेफरीज ने ट्रंप के इस कदम की तीखी आलोचना की है। कंपनी का कहना है कि भारत पर लगाया गया यह बेतहाशा टैरिफ व्यक्तिगत खुन्नस का परिणाम है, न कि अमेरिका के राष्ट्रीय हितों का। जेफरीज ने आरोप लगाया कि ट्रंप की यह नीति वैचारिक दिवालियापन को दर्शाती है और अमेरिकी कंपनियों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकती है।
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आगे का रास्ता
अब सारी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, जहां ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा। अदालत के अंतिम निर्णय तक टैरिफ लागू रहेंगे, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी इन्हें असंवैधानिक करार दिया, तो यह ट्रंप की पूरी आर्थिक नीति के लिए सबसे बड़ा झटका होगा।
अमेरिकी अपील अदालत का यह फैसला ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रणनीति को गहरा झटका देता है। भारत समेत कई देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ अब कानूनी संकट में फंसे हैं। आने वाले हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय न केवल ट्रंप प्रशासन की नीतियों, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी निर्णायक प्रभाव डालेगा।



