नई दिल्ली: भारतीय छात्रों के लिए विदेश पढ़ाई का सपना अब घर की दहलीज पर साकार होने वाला है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के पहले आधिकारिक भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक क्रांतिकारी घोषणा की, जिसमें नौ प्रमुख ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज भारत में अपने कैंपस स्थापित करेंगी। यह कदम न केवल शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगा, बल्कि लाखों युवाओं को महंगे विदेशी टूर पर निर्भरता से मुक्ति दिलाएगा। स्टार्मर के साथ मुंबई पहुंचे 125 से ज्यादा ब्रिटिश बिजनेस और एजुकेशन लीडर्स का यह सबसे बड़ा डेलिगेशन साबित हो रहा है कि दोनों देश व्यापार और शिक्षा के नए युग में कदम रख रहे हैं।
स्टार्मर के दौरे से शिक्षा में नया अध्याय
मुंबई के राज भवन में आयोजित जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने कहा कि यह पहल हाल ही में साइन हुए इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की भावना को मजबूत करती है। स्टार्मर ने भी जोर देकर कहा कि ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज का भारत में विस्तार अर्थव्यवस्था को 50 मिलियन पाउंड का बूस्ट देगा, साथ ही घरेलू जॉब्स को सपोर्ट करेगा। उनका मानना है कि इससे भारतीय छात्रों को बिना वीजा या माइग्रेशन प्रेशर के वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन मिलेगी। दौरे का फोकस ट्रेड, टेक और एजुकेशन पर रहा, जहां स्टार्मर ने साफ किया कि नया वीजा डील नहीं मांगा जा रहा, बल्कि मौजूदा अवसरों का फायदा उठाया जाएगा। यह घोषणा जुलाई 2025 में पीएम मोदी के यूके विजिट के दौरान अपनाई गई ‘विजन 2030’ रोडमैप का हिस्सा है।
कौन-कौन सी यूनिवर्सिटीज, कहां खुलेंगे कैंपस?
नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत ये कैंपस जल्द शुरू होंगे। पहला कदम गुरुग्राम में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन का है, जहां पहला बैच पहले ही क्लासेस अटेंड कर रहा है। बैंगलोर में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल का कैंपस प्लान्ड है, जो टेक हब के रूप में परफेक्ट फिट होगा। मुंबई को मिलेगा यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ अबरडीन और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल का तोहफा। हाल ही में अप्रूव्ड यूनिवर्सिटी ऑफ लैंकेस्टर और यूनिवर्सिटी ऑफ सरे भी लिस्ट में शामिल हैं, जबकि क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट अगले साल से शुरू हो सकती है। बाकी तीन यूनिवर्सिटीज की डिटेल्स जल्द जारी होंगी। ये कैंपस ब्रिटिश डिग्री देंगे, लेकिन लोकल कॉस्ट पर यानी फीस में 50% तक कीमत कम।
छात्रों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
इससे भारतीय स्टूडेंट्स को इंटरनेशनल एक्सपोजर मिलेगा, बिना हाई कोस्ट ऑफ लिविंग या कल्चरल शॉक के। स्किल डेवलपमेंट और जॉब प्रॉस्पेक्ट्स में इजाफा होगा, खासकर टेक, मेडटेक और साइंस फील्ड्स में। इंपीरियल कॉलेज लंदन का साइंस गैलरी बैंगलोर से टाई-अप और यूसीएल-आईआईटी दिल्ली का मेडिकल कोलैबोरेशन जैसे प्रोजेक्ट्स पहले ही शुरू हो चुके हैं। स्टार्मर ने कहा कि यह टाई-अप्स दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक ब्रिज बनाएंगे। भारत के लिए यह NEP 2020 का बड़ा स्टेप है, जो फॉरेन यूनिवर्सिटीज को आमंत्रित करता है।
सहयोग की नई सुबह
यह घोषणा भारत-यूके रिश्तों को ‘लॉन्चपैड’ बनाने जैसी है, जैसा स्टार्मर ने कहा है। शिक्षा अब सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि ग्लोबल कनेक्टिविटी का माध्यम बनेगी। युवाओं के सपनों को पंख लगाने के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होगा।



