नई दिल्ली: अमेरिका में काम करने के इच्छुक विदेशी डॉक्टरों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए राहत की खबर है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि नए एच-1बी वीजा (H-1B Visa) आवेदन पर लगाए गए 1 लाख डॉलर शुल्क से कुछ मामलों में छूट दी जा सकती है।
अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ा कदम
एच-1बी वीजा कार्यक्रम उन अस्पतालों के लिए बेहद अहम है, जो दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले प्रशिक्षित विदेशी डॉक्टरों (US Doctors) पर निर्भर रहते हैं। अक्सर इन क्षेत्रों में अमेरिकी पेशेवर काम करने से कतराते हैं, ऐसे में विदेशी डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनते हैं।
नैसकॉम की प्रतिक्रिया
आईटी सेक्टर की शीर्ष संस्था नासकॉम ने कहा कि भारतीय कंपनियों (Indian IT Companies) ने हाल के वर्षों में अमेरिका में स्थानीय भर्ती पर अधिक जोर दिया है और एच-1बी वीजा पर उनकी निर्भरता कम हुई है। 2015 में जहां 14,792 वीजा मिले थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर 10,162 रह गई। नैसकॉम का मानना है कि इसीलिए नए नियमों का असर सीमित होगा।
मौजूदा वीजा धारकों पर असर नहीं
नैसकॉम (NASSCOM) ने स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई फीस केवल नए आवेदनों पर लागू होगी। मौजूदा वीजा धारकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस घोषणा से अमेरिका में पहले से काम कर रहे हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और डॉक्टरों की चिंता कम हो गई है।
2026 से लागू होंगे नए नियम
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि नए नियम 2026 से लागू होंगे। इससे कंपनियों को पर्याप्त समय मिलेगा कि वे स्किलिंग प्रोग्राम और स्थानीय भर्ती को और मजबूत करें। इस समय आईटी कंपनियां अमेरिका में ही स्किलिंग पर 100 करोड़ डॉलर से अधिक खर्च कर रही हैं।
एच-1बी वीजा और वेतन ढांचा
नासकॉम के अनुसार, भारतीय कंपनियों में एच-1बी वीजा धारकों का हिस्सा कुल कर्मचारियों का 1% से भी कम है। साथ ही, उन्हें स्थानीय कर्मचारियों के समान वेतन दिया जाता है। यानी यह वीजा किसी भी तरह से कम वेतन वाले श्रमिकों को लाने का साधन नहीं है।
नवाचार और प्रतिस्पर्धा पर असर
नासकॉम ने दोहराया कि कुशल पेशेवरों की आवाजाही अमेरिका और भारत दोनों के लिए फायदेमंद रही है। इससे नवाचार, रिसर्च और आर्थिक विकास को गति मिली है। यदि वीजा प्रक्रिया स्थिर और स्पष्ट बनी रहती है, तो भारत वैश्विक नवाचार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
भारतीय कंपनियों पर सीमित असर
वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, नए नियमों का भारतीय आईटी कंपनियों पर अल्पकालिक असर नगण्य रहेगा। हालांकि, मध्यम अवधि में लागत बढ़ सकती है। मौजूदा प्रोजेक्ट्स और कर्मचारियों की उपलब्धता पर कोई बड़ी चुनौती फिलहाल नहीं दिख रही है।
नए एच-1बी नियम स्वास्थ्य सेवाओं और आईटी सेक्टर दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। डॉक्टरों को राहत मिलने की संभावना है, वहीं भारतीय आईटी कंपनियां भी इसे सीमित चुनौती मान रही हैं।



