नई दिल्ली: रूस के हमलों के बाद यूक्रेन की कूटनीतिक नीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) अब सीजफायर (Ceasefire) को लेकर गंभीर दिख रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि अगले हफ्ते युद्धविराम पर आधिकारिक बातचीत हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध ने एक बार फिर बेहद हिंसक रूप ले लिया है।
यूक्रेन ने दिखाई नरमी, रूस बना हुआ सख्त
राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, रूस अब भी ठोस फैसले लेने से कतरा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “लंबे समय की शांति के लिए सीजफायर जरूरी है, और इसके लिए आधिकारिक बातचीत जल्द शुरू की जाएगी।”
हालांकि, रूस की ओर से रखी गई शर्तें फिलहाल टकराव का कारण बनी हुई हैं। रूस चाहता है कि यूक्रेन उसके कब्जे वाले 4 क्षेत्रों को सौंप दे, लेकिन यूक्रेन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
पूर्व रक्षा मंत्री उमेरोव को सौंपी गई जिम्मेदारी
सीजफायर वार्ता की अगुवाई यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री उमेरोव को सौंपी गई है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद का नेतृत्व भी सौंपा गया है। उनकी निगरानी में वार्ता का पहला दौर शुरू हुआ था, लेकिन बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया।
ट्रंप ने रूस को दी चेतावनी
अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अब इस मुद्दे में सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने रूस को 50 दिन के भीतर सीजफायर पर सहमति जताने का अल्टीमेटम दिया है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो ट्रंप का कहना है, “रूस पर 100% टैरिफ लगेगा और जो देश रूस से व्यापार करेंगे, उन्हें भी 500% टैक्स देना होगा।”
जेलेंस्की सरकार की रणनीति में बदलाव
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जेलेंस्की को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें युद्धविराम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भविष्य की सुरक्षा रणनीति के बिंदु शामिल हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर ही यूक्रेनी सरकार ने रुख में नरमी दिखाई है।
क्या सीजफायर हो पाएगा सफल?
हालात अभी अनिश्चित हैं। रूस के रुख में बदलाव नहीं हुआ है और यूक्रेन की ओर से भी कोई क्षेत्रीय समझौता स्वीकार करने का संकेत नहीं मिला है। हालांकि, बातचीत की शुरुआत एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
निष्कर्ष
सीजफायर की पहल युद्ध से जूझ रहे नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद है, लेकिन रूस की कठोर शर्तें और यूक्रेन की सीमाएं इसे जमीनी हकीकत बनने से रोक रही हैं। अगले कुछ हफ्ते इस युद्ध की दिशा तय कर सकते हैं।



