नई दिल्ली: रूस के सुदूरवर्ती कुरील द्वीप समूह (Kuril Islands Earthquake) में शुक्रवार देर रात एक बार फिर धरती कांपी। भारतीय समयानुसार रात 11:50 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 6.2 मापी गई, जिसका केंद्र समुद्र तल से लगभग 32 किलोमीटर गहराई में स्थित था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इस झटके (Russia-Afghanistan Earthquake Alert) की पुष्टि की है। हालांकि, प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है और आपात सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है।
इस भूकंप की वजह से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। कई लोगों ने देर रात घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में समय बिताया। कुरील द्वीप समूह (Kuril Islands Shaken), जो रूस और जापान के बीच स्थित है, भूकंपीय रूप से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
कामचाटका में आया था महाविनाशकारी झटका
गौरतलब है कि इससे दो दिन पहले ही, यानी बुधवार को रूस के कामचाटका प्रायद्वीप (Kamchatka Earthquake) में रिकॉर्ड स्तर का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप की तीव्रता 8.8 मापी गई थी, जो वैश्विक स्तर पर दर्ज अब तक के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक माना जा रहा है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण एजेंसी (USGS) के अनुसार, यह अब तक का छठा सबसे तीव्र भूकंप रहा है।
हालांकि, रूस की आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तत्परता की वजह से इस शक्तिशाली झटके से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। क्रेमलिन ने भी इस बात की पुष्टि की कि अब तक किसी नागरिक की मौत या गंभीर क्षति की खबर नहीं आई है।
आफ्टरशॉक्स से फिर डगमगाई धरती
CNN की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कामचाटका में मुख्य भूकंप के बाद अगले 16 घंटों के भीतर 4.4 तीव्रता या उससे अधिक के करीब 125 आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए हैं। इससे क्षेत्र में सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग लगातार झटकों के डर से घरों में लौटने से बच रहे हैं।
आपदा प्रबंधन एजेंसियां इन झटकों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतनी अधिक संख्या में आफ्टरशॉक्स इस बात का संकेत हो सकते हैं कि प्लेट्स के बीच अत्यधिक दबाव अभी भी बना हुआ है।
अफगानिस्तान भी नहीं रहा अछूता
रूस के अलावा अफगानिस्तान में भी शनिवार तड़के भूकंप के तेज झटके (Afghanistan Earthquake) महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 2:33 बजे आया और इसकी तीव्रता 5.5 रही। इसका केंद्र धरती की सतह से 87 किलोमीटर गहराई में था।
भूकंप का प्रभाव अफगानिस्तान के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में अधिक महसूस किया गया। हालांकि, अभी तक यहां भी किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में बढ़ती भूकंपीय गतिविधियां एक बड़े भूगर्भीय परिवर्तन का संकेत हो सकती हैं। रूस, जापान और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों में टेक्टोनिक प्लेट्स की सक्रियता बहुत अधिक है, जिससे ऐसे झटकों की आशंका हमेशा बनी रहती है।
लगातार आ रहे भूकंप और आफ्टरशॉक्स ने न केवल प्रशासन को चुनौती में डाला है, बल्कि आम जनता की चिंता भी बढ़ा दी है। वर्तमान में सभी निगाहें आपदा प्रबंधन एजेंसियों और भूकंपीय विश्लेषण पर टिकी हैं, ताकि आगे किसी बड़े खतरे से पहले चेतावनी दी जा सके। रूस और अफगानिस्तान दोनों ही अब सतर्क हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
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