नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने का सबसे भीषण असर पाकिस्तान के वित्तीय बाजार पर पड़ा है। सोमवार को पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में हाहाकार मच गया, जहां बेंचमार्क इंडेक्स केएसई-100 (KSE 100) लगभग 6,000 अंक टूट गया। भू-राजनीतिक अस्थिरता और वार्ता विफल होने की खबर ने निवेशकों के भरोसे को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।
कूटनीतिक हार का आर्थिक असर
इस शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर काफी प्रयास किए थे। बाजार को उम्मीद थी कि इस मध्यस्थता से क्षेत्र में शांति बहाली होगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि, जैसे ही वार्ता विफल होने की खबर आई, बाजार में जबरदस्त बिकवाली शुरू हो गई और इंडेक्स 3.5% गोता लगाते हुए 1,61,638 के स्तर पर पहुंच गया।
रिकॉर्ड तेजी के बाद बड़ी गिरावट
हैरानी की बात यह है कि पिछला सप्ताह पाकिस्तान के शेयर बाजार के लिए ऐतिहासिक रहा था। बुधवार को जब अस्थायी युद्धविराम की खबरें आई थी, तब केएसई-100 ने 12,000 अंकों की रिकॉर्ड छलांग लगाई थी, जो इंडेक्स के इतिहास की सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त थी। लेकिन सोमवार की गिरावट ने उस पूरी बढ़त पर पानी फेर दिया है।
निवेशकों में डर का माहौल
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बुरा असर पड़ेगा, जिसका सीधा खामियाजा पाकिस्तान जैसी कमजोर अर्थव्यवस्था को भुगतना होगा। निवेशकों को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा, तो आने वाले दिनों में बाजार में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। फिलहाल, इस्लामाबाद और रावलपिंडी की कूटनीतिक कोशिशें नाकाम साबित होने से बाजार में निराशा का माहौल है।



