नई दिल्ली: हाल ही में यमन में निमिषा प्रिया के मामले ने मौत की सजा को लेकर चर्चा छेड़ दी है। कई मुस्लिम देशों में हत्या जैसे अपराधों के लिए दी जाने वाली सजा इतनी भयावह होती है कि सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में मृत्युदंड के तरीके बेहद कठोर और डरावने हैं।विश्वभर में करीब 58 देश अभी भी मृत्युदंड को लागू करते हैं, जबकि 97 देशों ने इसे पूरी तरह खत्म कर दिया है। कुछ देश केवल युद्ध जैसे विशेष परिस्थितियों में ही इस सजा का उपयोग करते हैं। विभिन्न मुस्लिम देशों में मृत्युदंड के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन इनमें से कई बेहद क्रूर माने जाते हैं।
अफगानिस्तान और सूडान
इन देशों में हत्या के अपराध में मृत्युदंड के लिए फांसी, गोली मारना या पत्थरबाजी (stoning) जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। पत्थरबाजी में अपराधी को पत्थर मार-मारकर मृत्यु तक पहुंचाया जाता है, जो बेहद दर्दनाक और अमानवीय माना जाता है।
बांग्लादेश, ईरान, कुवैत, मिस्र और सीरिया
इन देशों में मृत्युदंड आमतौर पर फांसी के फंदे पर लटका कर या पीठ में गोली मारकर दिया जाता है। गोली मारने की प्रक्रिया में अपराधी को सिर के बल लिटाकर सीधे दिल पर निशाना साधा जाता है, जो तुरंत मौत का कारण बनता है।
मलेशिया
यह मुस्लिम बहुसंख्यक देश पहले फांसी के जरिए मृत्युदंड देता था। हालांकि, 2023 में यहां अनिवार्य मृत्युदंड को खत्म करने का कानून पारित हुआ। अब अदालतें फांसी की जगह कोड़े मारने या आजीवन कारावास की सजा को प्राथमिकता देती हैं।
यमन और बहरीन
यमन में मृत्युदंड का मुख्य तरीका फायरिंग स्क्वॉड है, जिसमें अपराधी को गोली मारकर सजा दी जाती है। बहरीन में 2017 तक मृत्युदंड पर रोक थी, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया। अब वहां भी फायरिंग स्क्वॉड का उपयोग होता है।
सऊदी अरब
सऊदी अरब में मृत्युदंड का भयावह लेकिन सबसे आम तरीका तलवार से सिर काटना और फांसी पर लटकाना है। वहीं, कुछ मामलों में गोली मारकर या फायरिंग स्क्वॉड के जरिए भी सजा दी जाती है। यह प्रक्रिया चारदीवारी में नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से की जाती है, जिससे इसका भयावह प्रभाव और बढ़ जाता है।
इन देशों में मृत्युदंड के तरीके न केवल कठोर है, बल्कि कई बार मानवाधिकार संगठनों द्वारा अमानवीय भी करार दिए गए हैं। ये सजाएं अपराध को रोकने के लिए हैं, लेकिन इनकी क्रूरता पर वैश्विक बहस जारी है।



