नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की तमाम कोशिशों के बावजूद इस बार का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2025) उन्हें नहीं मिला। यह सम्मान वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता मारिया कोरिना माचाडो (Maria Corina Machado) को मिला है, जिन्होंने अपने देश में स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वर्षों से संघर्ष किया है।
ट्रंप की कोशिशें रहीं नाकाम
ट्रंप ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को “विश्व शांति का वाहक” बताने की कोशिश की। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने और रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की दिशा में पहल का दावा किया था। लेकिन इन प्रयासों को नोबेल समिति ने वास्तविक शांति की भावना से मेल नहीं खाता माना।
घोषणा के बाद समिति के अध्यक्ष जॉर्गेन वाटने फ्राइडनेस ने स्पष्ट किया कि डोनल्ड ट्रंप को पुरस्कार की दौड़ में कभी गंभीरता से नहीं लिया गया था।
समिति ने क्या कहा?
फ्राइडनेस ने कहा, “हम हर वर्ष हजारों सुझाव और नामांकन प्राप्त करते हैं। बहुत से लोग अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के समर्थन में अभियान चलाते हैं। लेकिन हम अपना निर्णय केवल अल्फ्रेड नोबेल की भावना और सच्ची शांति की अवधारणा के आधार पर लेते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि समिति किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या मीडिया प्रचार के प्रभाव में नहीं आती। यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप के उन बयानों पर प्रतिक्रिया माना जा रहा है, जिनमें उन्होंने खुद को पुरस्कार के लिए योग्य बताया था।
माचाडो को क्यों मिला सम्मान
- मारिया कोरिना माचाडो वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की प्रमुख आवाज रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ वर्षों तक शांतिपूर्ण विरोध और राजनीतिक सुधारों के लिए संघर्ष किया।
- नोबेल समिति ने उन्हें “लोकतंत्र की निडर रक्षक” बताते हुए कहा कि माचाडो “ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने अपने देश में अन्याय और दमन के खिलाफ बिना डरे आवाज उठाई।”
- घोषणा के बाद माचाडो ने कहा, “यह पुरस्कार केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी नागरिकों का है जो आज भी अपने अधिकारों और आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
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पिछले साल किसे मिला था पुरस्कार?
पिछले वर्ष यह सम्मान जापान के संगठन निहोन हिडांक्यो को दिया गया था। यह संस्था 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों से बचे लोगों द्वारा बनाई गई थी। इस संगठन ने दशकों तक परमाणु हथियारों के उन्मूलन और विश्व शांति के लिए काम किया है। इस साल का निर्णय यह दिखाता है कि नोबेल समिति अपने सिद्धांतों पर अडिग है। राजनीतिक प्रभावों से दूर रहकर उसने एक ऐसी महिला को सम्मानित किया है जो सच्चे अर्थों में लोकतंत्र और मानवता की प्रतीक हैं। मारिया माचाडो की यह जीत दुनिया को याद दिलाती है कि शांति, साहस और निष्ठा हमेशा सत्ता और प्रचार से ऊपर होते हैं।



