नई दिल्ली: Krishna Janmashtami: पाकिस्तान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हिंदू समुदाय द्वारा उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भारत की तरह पड़ोसी देश में भी यह त्योहार भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। कराची, लाहौर, क्वेटा, और अमरकोट जैसे शहरों में मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों, रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है। हिंदू समुदाय के लोग इस दिन भक्ति में डूबकर भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके बाल स्वरूप को विशेष महत्व देते हैं।
पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर इन मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। अमरकोट, जहां हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है, वहां मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है। भक्त सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुट जाते हैं। बच्चे श्रीकृष्ण और राधा के रूप में सजकर उत्सव में शामिल होते हैं, जो इस पर्व को और भी जीवंत बनाता है। कराची के स्वामीनारायण मंदिर, लाहौर और क्वेटा के इस्कॉन मंदिर, और रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन होता है।
पाकिस्तान में जन्माष्टमी की रात का विशेष महत्व है। भक्त व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा करते हैं। मंदिरों में भगवान को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसमें माखन, मिठाई और अन्य पकवान शामिल होते हैं। इस्कॉन मंदिरों में भक्ति भजनों और नृत्य के साथ उत्सव की रौनक बढ़ जाती है। हालांकि, इस्लामाबाद में श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण को लेकर विवाद रहा है, लेकिन हिंदू समुदाय को वहां पूजा स्थल के लिए अनुमति मिली है, जो उनके लिए गर्व का विषय है।
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पाकिस्तान में जन्माष्टमी का उत्सव सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व न केवल भक्ति का अवसर है, बल्कि समुदाय को एकजुट करने का माध्यम भी है। चुनौतियों के बावजूद, हिंदू समुदाय अपनी परंपरा को जीवित रखते हुए इस त्योहार को पूरे जोश के साथ मनाता है।



