नई दिल्ली : हफ्तों की भारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बाद, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को सीमित और नियंत्रित तरीके से फिर से खोलने के संकेत दिए हैं।
बुधवार को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि अगर अमेरिका के साथ बातचीत के ढांचे पर सहमति बन जाती है, तो गुरुवार या शुक्रवार तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोला जा सकता है।
ईरानी अधिकारी के अनुसार, जलमार्ग को खोलना पूरी तरह से “ईरान के नियंत्रण” में होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए ईरानी सेना के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा। अधिकारी ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा, “वर्तमान युद्धविराम अभी भी नाजुक है। हम स्थायी शांति चाहते हैं, लेकिन अगर अमेरिका युद्ध का रास्ता चुनता है, तो ईरान वापस लौटने से नहीं डरता।”
ट्रम्प की समय सीमा और युद्धविराम का खेल
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ईरान और अमेरिका, पाकिस्तान में होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देश दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हुए थे। गौरतलब है कि यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के पावर प्लांट और पुलों को नष्ट करने की दी गई समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक घंटे पहले हुआ था। इस शांति वार्ता के हिस्से के रूप में, ईरान तेल व्यापार के लिए इस महत्वपूर्ण मार्ग को सुरक्षित रास्ता देने पर सहमत हुआ है।
ईरानी सेना की मंजूरी होगी अनिवार्य
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पुष्टि की है कि अगले दो सप्ताह तक जहाजों के लिए ‘सुरक्षित मार्ग’ उपलब्ध रहेगा। हालांकि, उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जलडमरूमध्य से गुजरना तभी संभव होगा जब ईरानी सशस्त्र बल इसकी अनुमति देंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया था, क्योंकि दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार इसी मार्ग से होता है।
जहाजों की आवाजाही हुई शुरू
मैरीटाइम मॉनिटर ‘मरीन ट्रैफिक’ के अनुसार, बुधवार को कुछ जहाजों ने सफलतापूर्वक इस मार्ग को पार किया है। ग्रीक स्वामित्व वाले बल्क कैरियर ‘एनजे अर्थ’ और लाइबेरिया के ध्वज वाले जहाज डेटोना बीच’ ने सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार किया। यह संकेत देता है कि जमीन पर तनाव कम करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन पूरी दुनिया की नजरें अब शुक्रवार को पाकिस्तान में होने वाली औपचारिक बातचीत पर टिकी हैं।



