वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी के बाद अब अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि Iran की Strait of Hormuz पर की गई किलेबंदी को खत्म करने के लिए अमेरिकी सैन्य अभियान जारी है और यह तब तक चलता रहेगा, जब तक ईरानी ठिकाने पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाते।
ट्रम्प की चेतावनी के बाद बढ़ा दबाव
इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे के भीतर Strait of Hormuz खोलने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा।
अमेरिका के इन बयानों से क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका और बढ़ गई है।
ईरान की पलटवार की चेतावनी
अमेरिका की धमकियों के बाद Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने भी कड़ा बयान जारी किया है।
- अगर ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला हुआ तो Strait of Hormuz पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा
- अमेरिकी हितों से जुड़ी कंपनियों और ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाया जाएगा
- जिन देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, वहां भी हमले हो सकते हैं
IRGC ने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया है, लेकिन अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
अमेरिका का दावा—“ईरानी क्षमताएं कमजोर”
स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने उन रिपोर्ट्स को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ने स्थिति पर नियंत्रण खो दिया है।
वैश्विक असर की आशंका
Strait of Hormuz पर बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
- तेल और गैस सप्लाई बाधित होने का खतरा
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल
- ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर दबाव
हालात बेहद संवेदनशील
मौजूदा स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी खुली धमकियों तक पहुंच चुकी है। अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो यह टकराव बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा।




