हवाई हमलों से नहीं टूटा Hamas, अब सुरंगों से दे रहा जवाब

गाजा युद्ध को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। अब तक 65 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन इजरायली सेना गाजा पट्टी पर पूर्ण कब्जा नहीं कर पाई है। हमास गुरिल्ला रणनीति से डटा हुआ है।

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नई दिल्ली: गाजा युद्ध (Gaza War) को शुरू हुए लगभग दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अब तक इस संघर्ष में 65 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद तकनीकी रूप से सक्षम और संसाधनों से लैस इजरायली सेना (Israel Army) व वायुसेना गाजा पट्टी के लगभग 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा नहीं कर पाई है। गाजा सिटी पर कब्जे की लड़ाई में हमास (Hamas) ने नई रणनीति अपनाई है।

हमास की बदलती रणनीति

गाजा सिटी पर कब्जे की लड़ाई में हमास (Hamas) ने नई रणनीति अपनाई है। इजरायली सेना की पारंपरिक ताकत के सामने अब वह गुरिल्ला वार (Guerrilla Strategy) का सहारा ले रहा है। हमास के लड़ाके छोटे-छोटे समूहों में बंटकर अचानक हमले कर रहे हैं। इस तरह की रणनीति से संगठित सेना को सीधी टक्कर देना कठिन हो गया है।

इजरायली सेना की जमीनी कार्रवाई

इजरायली सेना ने हाल ही में गाजा सिटी में जमीनी कार्रवाई की शुरुआत की है। हालांकि, अक्टूबर 2023 से लगातार हवाई हमले जारी हैं। मारे गए फलस्तीनियों (Palestinian Fighters) में बड़ी संख्या में हमास और अन्य संगठनों के लड़ाके शामिल हैं, फिर भी संगठन अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। माना जाता है कि इस समय गाजा सिटी में लगभग छह लाख लोग रह रहे हैं, जिनमें 50 हजार तक सशस्त्र लड़ाके मौजूद हो सकते हैं।

सुरंगों का जाल बना चुनौती

गाजा सिटी के नीचे फैला हुआ सुरंगों का नेटवर्क इजरायली सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इन्हीं कारणों से इजरायल अब तक सीधी जमीनी लड़ाई से बचता रहा। सुरंगों की वजह से हमास के लड़ाके आसानी से छिपकर अचानक हमले करने में सक्षम हैं।

हमास की लचीलापन नीति

हमास के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी वासेम अफीफा का कहना है कि संगठन की सशस्त्र शाखा समय और परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालने में माहिर है। दो साल की लड़ाई के बाद अब वह गुरिल्ला रणनीति को प्राथमिकता दे रही है। लड़ाके खुद को बचाते हुए इजरायली सैनिकों को निशाना बना रहे हैं।

संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका

गाजा सिटी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व निदेशक विलियम बर्न्स ने भी कहा है कि हमास अब पहले जैसी ताकतवर स्थिति में नहीं है। अक्टूबर 2023 जैसे हमले दोहराने की उसकी क्षमता नहीं बची है क्योंकि उसके कई कमांडर और लड़ाके मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद गुरिल्ला रणनीति अपनाकर वह लड़ाई जारी रख सकता है।

करीब दो साल से जारी इस युद्ध ने गाजा और उसके लोगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। हजारों निर्दोषों की जान गई है और हालात अब भी स्थिर नहीं हैं। इजरायल की सैन्य क्षमता और हमास की गुरिल्ला नीति के बीच यह संघर्ष कब तक जारी रहेगा, कहना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल इसके जल्द खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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