नई दिल्ली: दिल्ली की सांसें अब और भी जहरीली हो चुकी हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ताजा रिपोर्ट ने एक बड़ा राज खोला है। हवा में घुली भारी धातुएं जैसे तांबा, जिंक, क्रोमियम और मोलिब्डेनम न केवल मौजूद हैं, बल्कि इनकी मात्रा कुल PM10 कणों का 0.1 से 2 फीसदी तक है। रिपोर्ट में PM10 का औसत स्तर 130 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सीमा (60 माइक्रोग्राम) से दोगुना से ज्यादा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंपी गई इस रिपोर्ट ने वायु प्रदूषण की गंभीरता को नंगा कर दिया है, जहां ये धातुएं फेफड़ों, किडनी और बच्चों के विकास के लिए घातक साबित हो रही हैं।
10 बड़े शहरों में ‘हेवी मेटल्स’ का अलार्म, दिल्ली सबसे प्रभावित
CPCB ने देश के 10 प्रमुख महानगरों जयपुर, भोपाल, लखनऊ, अहमदाबाद, दिल्ली, नागपुर, कोलकाता, बेंगलुरु, विशाखापत्तनम और चेन्नई में जून-जुलाई 2025 के दौरान 40 स्थानों पर निगरानी की। प्रत्येक शहर में औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और परिवहन क्षेत्रों से औसतन 16 दैनिक सैंपल (24 घंटे के) लिए गए। शपथ-पत्र में CPCB के वैज्ञानिक अधिकारी आदित्य शर्मा ने बताया कि PM10 कणों से जुड़ी इन भारी धातुओं का स्तर चिंताजनक है। दिल्ली में खास तौर पर पूर्वी इलाकों की हवा में PM2.5 कणों से चिपकी जिंक, क्रोमियम, कॉपर और मोलिब्डेनम की मात्रा ने खतरे की घंटी बजा दी। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक:
- जिंक: औसत 243.5 नैनोग्राम/घन मीटर (पीतमपुरा में 18 जून को 342 नैनोग्राम तक पहुंचा)
- क्रोमियम: औसत 12.25 नैनोग्राम/घन मीटर (पीतमपुरा में 2 जुलाई को 45 नैनोग्राम)
- तांबा: औसत 55.13 नैनोग्राम/घन मीटर
- मोलिब्डेनम: औसत 0.91 नैनोग्राम/घन मीटर
NGT ने पूर्वी दिल्ली के PM2.5 से जुड़े भारी धातुओं पर एक अध्ययन के आधार पर खुद संज्ञान लिया था। दिल्ली के चार निगरानी स्थलों पीतमपुरा, सरिफोर्ट, जनकपुरी और शाहदरा में 16 दिनों की मॉनिटरिंग से साफ हुआ कि शाहदरा सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां PM10 का औसत 150 माइक्रोग्राम से ऊपर रहा, जबकि 18 जून को यह 222 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया। जिंक की मात्रा भी 265 नैनोग्राम तक दर्ज की गई। सरिफोर्ट में PM10 औसतन 100 माइक्रोग्राम के आसपास रहा, लेकिन क्रोमियम जैसी कैंसरकारी धातु का स्तर चिंता बढ़ा रहा है। कॉपर और मोलिब्डेनम ज्यादातर जांच सीमा से नीचे (BDL) पाए गए, लेकिन जहां मौजूद थे, वहां 4 नैनोग्राम तक। ये धातुएं PM10 कणों से बंधी होती हैं, जो सांस के जरिए शरीर में घुसकर लंबे समय तक नुकसान पहुंचाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिंक किडनी और त्वचा रोगों का कारण बन सकता है, जबकि क्रोमियम कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
95 शहरों में कमी, लेकिन दिल्ली में चुनौती बरकरार
रिपोर्ट में सकारात्मक पक्ष भी है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 2017-18 के आधार पर 2024-25 तक 95 शहरों में PM10 में कमी दर्ज की गई:
- 59 शहरों में 20% से ज्यादा कमी
- 20 शहरों में 40% से ज्यादा कमी
- 17 शहरों ने NAQS (राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक) हासिल कर लिया
हालांकि, दिल्ली जैसे महानगरों में औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों और धूल के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। CPCB ने NCAP के लक्ष्य 2025-26 तक PM10 में 40% कमीपर जोर देते हुए गैर-अनुपालन वाले और 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों पर फोकस का वादा किया। बोर्ड ने NGT से भविष्य में अतिरिक्त रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति भी मांगी।
पीएम10: अदृश्य दुश्मन जो सांस रोक दे
पीएम10 हवा में तैरते छोटे कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर से कम होता है। ये इतने बारीक हैं कि आंखों से नजर नहीं आते, लेकिन फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर सूजन, सांस की बीमारियां और हृदय रोग पैदा कर सकते हैं। जब इनमें भारी धातुएं मिल जाती हैं, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। CPCB की यह रिपोर्ट दिल्लीवासियों के लिए चेतावनी है—सर्दियों से पहले ही हवा ‘जहर’ बन चुकी है। विशेषज्ञों का आह्वान है कि तत्काल कदम उठाए जाएं, जैसे वाहन उत्सर्जन पर सख्ती और हरी ऊर्जा को बढ़ावा। क्या सरकार इस ‘हवा के जहर’ पर लगाम लगाएगी, या दिल्ली की सांसें और सिकुड़ती जाएंगी?



