नई दिल्ली: मेंढक, सलामेंडर और केसिलियन जैसे उभयचर (Amphibians) जीव विश्व भर में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उभयचरों की लगभग 41 फीसदी प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। इन जीवों पर पहले से ही प्रदूषण, प्राकृतिक आवासों का विनाश और बीमारियों का दबाव है, और अब जलवायु परिवर्तन ने इस संकट को और गहरा दिया है। जर्मनी के गेटे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया एक नया अध्ययन बताता है कि मौसम में हो रहे असामान्य बदलाव, जैसे अनियमित बारिश, सूखा और भीषण गर्मी, इन प्रजातियों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।
मौसम में बदलाव और उभयचरों पर प्रभाव
जर्नल कंजर्वेशन बायोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पिछले 40 वर्षों के मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश की कि जलवायु परिवर्तन ने 7,000 से अधिक उभयचर प्रजातियों को कैसे प्रभावित किया है। निष्कर्षों से पता चलता है कि मेंढक जैसी प्रजातियां, जो प्रजनन के लिए छोटे तालाबों और अस्थायी जलस्रोतों पर निर्भर हैं, सूखे और असमय गर्मी के कारण अपने अंडों और लार्वा के विकास में असफल हो रही हैं।
इससे उनकी आबादी में तेजी से कमी आ रही है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां 2004 के बाद से सूखा और लू की घटनाएं बढ़ी हैं, वहां उभयचरों की स्थिति और बिगड़ गई है। शोधकर्ता डॉ. इवान ट्वोमी ने बताया, “उभयचरों के लिए अस्थायी जलस्रोत प्रजनन का आधार हैं। सूखा और तापमान में बदलाव इन जलस्रोतों को समय से पहले सुखा दे रहे हैं, जिससे इन जीवों का जीवन चक्र बाधित हो रहा है।”
बीमारियों का बढ़ता खतरा
जलवायु परिवर्तन न केवल इन जीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह उन्हें बीमारियों के प्रति भी अधिक संवेदनशील बना रहा है। अत्यधिक गर्मी मेंढकों की त्वचा और श्वसन प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रही है, जबकि ठंडी जलवायु कुछ प्रजातियों को ‘चिट्रिड फंगस’ जैसी बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील बना रही है। अध्ययन में पाया गया कि दक्षिण अमेरिका, यूरोप और मेडागास्कर जैसे क्षेत्रों में उभयचर विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
दक्षिण अमेरिका, जहां मेंढकों की सबसे अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, वहां गर्मी और लू का प्रभाव बढ़ रहा है। वहीं, यूरोप में सूखे की बढ़ती घटनाएं, खासकर सलामेंडर प्रजातियों के लिए, बड़ा खतरा बन रही हैं। मध्य यूरोप में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां जलवायु मॉडल भविष्यवाणी करते हैं कि सूखे की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ सकती हैं। शोधकर्ता प्रो. लीसा शुल्टे ने चेतावनी दी, “मध्य यूरोप के आधे से अधिक सलामेंडर प्रजातियां पहले ही सूखे की मार झेल रही हैं, और यह स्थिति भविष्य में और गंभीर हो सकती है।”
संरक्षण की तत्काल आवश्यकता
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि उभयचरों को बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी संरक्षण उपायों की जरूरत है। इनमें छोटे संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण, प्राकृतिक दलदली क्षेत्रों का पुनरुद्धार और सूखे के दौरान नम स्थानों का निर्माण शामिल है। ये उपाय उभयचरों को प्रजनन और जीवित रहने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकते हैं। उभयचर जीव पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। इनका संरक्षण न केवल जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन को भी कायम रखता है।
निष्कर्ष
उभयचरों की घटती आबादी और जलवायु परिवर्तन के बीच गहरा संबंध है। यदि इन प्रजातियों को बचाने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो कई प्रजातियां हमेशा के लिए विलुप्त हो सकती हैं। यह न केवल जैव विविधता के लिए नुकसानदायक होगा, बल्कि यह हमारे पर्यावरण के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालेगा।



