नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा से जुड़े मामले में अमेरिका से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जानकारी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत मांगी गई है। आधिकारिक सूत्रों से जानकारी मिली है कि यह अनुरोध गृह मंत्रालय के माध्यम से भेजा गया और आगे इसे वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के जरिए अमेरिकी अधिकारियों को सौंपा गया। मांगी गई जानकारी चल रही जांच में मदद करेगी और राणा के खिलाफ केस को और मजबूत बनाएगी।
तहव्वुर राणा की भारत प्रत्यर्पण के बाद नई पूछताछ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबक NIA की ओर से यह जानकारी राणा से हुई पूछताछ के कुछ महीनों बाद मांगी गई है। उसे इस साल अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था ताकि 2008 के मुंबई आतंकी हमले (26/11) की साजिश की आगे जांच की जा सके। राणा इस हमले की साजिश रचने में अहम भूमिका निभाने वाला आरोपी है। इस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 238 से अधिक लोग घायल हुए थे।
एनआईए की चार्जशीट और नई जांच
एनआईए ने हाल ही में दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत में राणा के खिलाफ पहली पूरक चार्जशीट (RC-04/2009/NIA/DLI) दाखिल की थी। यह मामला डेविड कोलमैन हेडली, तहव्वुर राणा और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) तथा हूजी (HUJI) के सदस्यों द्वारा भारत में आतंकी हमले की साजिश से जुड़ा है।
जुलाई 2025 में दायर चार्जशीट में राणा के प्रत्यर्पण से संबंधित दस्तावेज और एनआईए द्वारा जुटाए गए अतिरिक्त सबूत शामिल हैं। इसके साथ ही, अदालत के 6 जून 2025 के आदेश के अनुपालन में, एनआईए ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 207 के तहत पहले दायर चार्जशीट (2011) से जुड़े दस्तावेजों की रिपोर्ट भी अदालत में सौंपी।
अमेरिका से प्रत्यर्पण की लंबी कानूनी प्रक्रिया
10 अप्रैल 2025 को एनआईए ने राणा को औपचारिक रूप से अमेरिका से प्रत्यर्पित होने के बाद गिरफ्तार किया। उसे नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और एनआईए टीमों द्वारा लॉस एंजेलिस से स्पेशल विमान के जरिये नई दिल्ली लाया गया। राणा की प्रत्यर्पण प्रक्रिया कई वर्षों तक चली, जिसमें उसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक अपील दायर की थी, लेकिन उसकी सभी अर्जियां खारिज कर दी गईं।
यह भी पढ़ेंः भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर सकारात्मक चर्चा
यह प्रत्यर्पण भारत के गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अमेरिका की संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से संभव हो सका। एनआईए ने इस प्रक्रिया के दौरान एफबीआई, अमेरिकी न्याय विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ सहयोग किया। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे यह संदेश गया है कि आतंकियों को दुनिया के किसी भी कोने से न्याय के कटघरे में लाया जा सकता है।



