नई दिल्ली: वैज्ञानिकों की एक ताजा खोज ने जेक्सैंथिन नामक इस साधारण पोषक तत्व को सुर्खियों में ला दिया है। पहले यह मुख्य रूप से आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य सुधारने के लिए जाना जाता था, लेकिन अब शोध बताते हैं कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को भी बढ़ाकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से मुकाबला करने में कारगर साबित हो सकता है। अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने इस पर गहन अध्ययन किया, जिसके नतीजे ‘सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन’ जर्नल में छपे हैं। अध्ययन से सामने आया कि जेक्सैंथिन CD8+ टी कोशिकाओं की ताकत को कई गुना बढ़ा देता है। ये कोशिकाएं शरीर में अस्वस्थ या कैंसर वाली कोशिकाओं को ढूंढकर उन्हें खत्म करने का काम करती हैं। एक रिसर्चर ने बताया कि यह काफी हैरान करने वाला है कि एक ऐसा तत्व जो आंखों के लिए इस्तेमाल होता रहा है, अब इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाने में भूमिका निभा सकता है। यह कैंसर के आधुनिक इलाज जैसे इम्यूनोथेरेपी को और प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।
जेक्सैंथिन क्या है और कहां से मिलता है?
यह तत्व बेहद किफायती और आसानी से मिलने वाला है। आप इसे सप्लीमेंट के तौर पर फार्मेसी से खरीद सकते हैं या फिर रोजमर्रा की सब्जियों से प्राप्त कर सकते हैं। पालक, केले और नारंगी रंग की शिमला मिर्च में यह प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है और शरीर इसे आसानी से सहन कर लेता है। कैंसर के इलाज के दौरान भी इसे आजमाया जा सकता है, बिना किसी बड़े साइड इफेक्ट के।
कैसे काम करता है यह टी कोशिकाओं पर?
टी कोशिकाएं हमारे शरीर की सुरक्षा दीवार की तरह हैं, जो असामान्य कोशिकाओं को पहचानने के लिए टी-सेल रिसेप्टर (TCR) का इस्तेमाल करती हैं। शोध में पाया गया कि जेक्सैंथिन इस रिसेप्टर को ज्यादा संवेदनशील और मजबूत बनाता है। नतीजतन, टी कोशिकाएं ज्यादा तेजी से सक्रिय हो जाती हैं, साइटोकाइन्स जैसे रसायनों का उत्पादन बढ़ जाता है और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की उनकी क्षमता कई गुना हो जाती है। आसान भाषा में कहें तो यह तत्व टी कोशिकाओं को ‘अलर्ट मोड’ में लाकर उन्हें कैंसर के खिलाफ योद्धा की तरह तैयार कर देता है।
इम्यूनोथेरेपी को मिलेगी नई ताकत
वैज्ञानिकों ने चूहों पर टेस्ट किए और देखा कि जेक्सैंथिन से भरपूर डाइट लेने से ट्यूमर की ग्रोथ काफी धीमी पड़ गई। जब इसे इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर्स नामक आम कैंसर दवा के साथ जोड़ा गया, तो नतीजे और भी शानदार रहे। टी कोशिकाओं ने कैंसर कोशिकाओं को पहले से ज्यादा तेजी से खत्म किया। इसी तरह, इंसानी कोशिकाओं पर किए गए प्रयोगों में भी जेक्सैंथिन ने मेलेनोमा, मल्टिपल मायेलोमा और ग्लियोब्लास्टोमा जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाया।
पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कनेक्शन
इससे पहले के शोधों में ट्रांस-वैक्सेनिक एसिड (TVA) जैसे तत्वों का जिक्र आया था, जो दूध और मांस से मिलते हैं और टी कोशिकाओं को बूस्ट करते हैं। इससे साफ होता है कि पौधों और जानवरों से आने वाले पोषक तत्व अलग-अलग तरीकों से हमारी इम्यूनिटी को सपोर्ट कर सकते हैं। यह खोज ‘न्यूट्रिशन एंड इम्यूनोलॉजी’ के फील्ड में नई संभावनाएं खोल रही है, जहां हम समझ सकते हैं कि रोज का खाना कैसे हमारी बीमारियों से लड़ने की ताकत पर असर डालता है।
आगे क्या?
ये नतीजे काफी प्रोत्साहक हैं, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि यह अभी शुरुआती दौर है। ज्यादातर रिजल्ट लैब टेस्ट और जानवरों पर आधारित हैं। अब असली मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल्स की जरूरत है ताकि पता चले कि जेक्सैंथिन सप्लीमेंट्स वाकई सुरक्षित और फायदेमंद हैं। रिसर्च टीम को उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे और तत्व मिलेंगे जो कैंसर के इलाज को ज्यादा आसान, सस्ता और पहुंच योग्य बनाएंगे। कुल मिलाकर, जेक्सैंथिन न सिर्फ आंखों बल्कि कैंसर से जूझ रही इम्यून सिस्टम के लिए भी एक बड़ा सहारा बन सकता है। इससे साबित होता है कि संतुलित डाइट न केवल रोज की सेहत बल्कि बड़ी बीमारियों से निपटने में भी कितनी अहम है।



