नई दिल्ली: कोरोना वायरस ने न केवल फेफड़ों को प्रभावित किया, बल्कि दिल और रक्त वाहिकाओं पर भी इसके गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव देखे जा रहे हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया और यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ईएससी) के एक नए शोध में चेतावनी दी गई है कि कोविड और लॉन्ग कोविड से जुड़ी हृदय समस्याएं भविष्य में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इस शोध में कोविड टीकाकरण को निरंतर जारी रखने और हृदय पुनर्वास (कार्डियक रिहैबिलिटेशन) कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
कोविड का दिल पर असर
शुरुआत में कोविड-19 को मुख्य रूप से फेफड़ों की बीमारी माना गया था, लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि यह वायरस हृदय और रक्त वाहिकाओं को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। शोध के अनुसार, कोविड संक्रमण के दौरान और उसके बाद कई महीनों तक मरीजों में हृदय संबंधी समस्याएं जैसे अनियमित धड़कन (अरिदमिया), सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, हार्ट फेल्योर, और यहां तक कि स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। जिन मरीजों को कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, उनमें हृदय रोग और मृत्यु का जोखिम सामान्य से कहीं अधिक पाया गया। खासकर, पहले से हृदय रोगों से पीड़ित लोगों में कोविड ने जटिलताओं को और बढ़ा दिया।
लॉन्ग कोविड और हृदय जटिलताएं
लॉन्ग कोविड उन लोगों को प्रभावित करता है जो संक्रमण के बाद भी महीनों तक विभिन्न लक्षणों से जूझते रहते हैं। शोध के अनुसार, विश्व भर में लगभग 10 करोड़ लोग लॉन्ग कोविड से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 5% लोग हृदय से संबंधित लॉन्ग कोविड समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें सीने में दर्द (एंजाइना), सांस फूलना, अनियमित या तेज धड़कन, थकान और चक्कर आना प्रमुख लक्षण हैं। कुछ मामलों में ऑटोनॉमिक डिसफंक्शन भी देखा गया है, जिसमें शरीर की स्वचालित प्रक्रियाएं जैसे दिल की धड़कन, सांस लेना या तापमान नियंत्रण प्रभावित होता है।
टीकाकरण की अहम भूमिका
शोध का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि कोविड टीकाकरण हृदय संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम करता है। पूर्ण टीकाकरण करवाने वाले लोगों में गंभीर हृदय जटिलताओं और लॉन्ग कोविड का खतरा कम देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही कोविड महामारी का चरम दौर बीत चुका हो, लेकिन वायरस का खतरा और इसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी भी बने हुए हैं। इसलिए, वैश्विक स्तर पर टीकाकरण कार्यक्रमों को लगातार जारी रखना जरूरी है।
हृदय पुनर्वास का महत्व
शोध में जोर दिया गया है कि कोविड और लॉन्ग कोविड से प्रभावित मरीजों के लिए संरचित हृदय पुनर्वास कार्यक्रम बेहद प्रभावी हैं। इन कार्यक्रमों में मरीजों को विशेष व्यायाम, फिजियोथेरेपी, पोषण सलाह और मानसिक स्वास्थ्य सहायता दी जाती है। ये उपाय न केवल हृदय की सेहत को सुधारते हैं, बल्कि लंबे समय तक जटिलताओं को रोकने में भी मदद करते हैं। यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि लॉन्ग कोविड के हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पुनर्वास कार्यक्रम मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता और स्वास्थ्य प्रदान कर सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में कमी
रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि कई देशों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, हृदय पुनर्वास सेवाओं की कमी है। पारंपरिक हृदय रोगियों और कोविड से प्रभावित मरीजों दोनों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों से इन सेवाओं में निवेश बढ़ाने और इन्हें अधिक सुलभ बनाने की मांग की है।
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भविष्य के लिए रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड और लॉन्ग कोविड से जुड़े हृदय रोग भविष्य में भी स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए चुनौती बने रहेंगे। इसके लिए तीन प्रमुख कदम उठाने होंगे:
- रोकथाम: टीकाकरण को प्राथमिकता देना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना।
- पुनर्वास: हृदय पुनर्वास कार्यक्रमों को व्यापक और सुलभ बनाना।
- शोध: लॉन्ग कोविड और इसके हृदय पर प्रभावों पर गहन अध्ययन करना।



