फेफड़ों का कैंसर भारत में कुल कैंसर मामलों का लगभग 9.3% है और यह खासतौर पर बुजुर्गों में अधिक पाया जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, जिस कारण अक्सर देर से पहचान हो पाती है और इलाज में देरी हो जाती है।
फेफड़ों का कैंसर एक या दोनों फेफड़ों में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि से होता है। शुरुआती पहचान से इलाज अधिक प्रभावी होता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है, ऐसा कहना है एचसीजी कैंसर सेंटर, बोरीवली (मुंबई) की सीनियर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. इंदू अंबुलकर का।
फेफड़ों के कैंसर के 5 शुरुआती लक्षण, जिन्हें कभी न करें नजरअंदाज
1. लगातार खांसी या खांसी के स्वरूप में बदलाव
खांसी आम है, लेकिन अगर यह दो–तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे या पहले से अलग महसूस हो, तो सावधान हो जाएं।
डॉ. अंबुलकर के अनुसार, “लगातार रहने वाली या बदलती खांसी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है।”
यह लक्षण स्मोकर्स ही नहीं, नॉन-स्मोकर्स में भी दिख सकता है।
2. सांस फूलना या घरघराहट
अगर सीढ़ियां चढ़ने या हल्की गतिविधि में भी सांस फूलने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें।
डॉ. रश्मि ताराचंदानी, जनरल फिजिशियन के अनुसार, यह फेफड़ों में सूजन या वायुमार्ग में रुकावट का संकेत हो सकता है।
3. शरीर में लगातार दर्द
छाती, पीठ या कंधों में लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं हो सकता।
डॉक्टरों के अनुसार, ट्यूमर के बढ़ने या आसपास के ऊतकों में फैलने से ऐसा दर्द हो सकता है, खासकर अगर यह रात में बढ़ जाए।
4. आवाज में भारीपन या बदलाव
अगर बिना सर्दी-जुकाम के आपकी आवाज बैठी हुई लग रही है या लंबे समय तक भारी बनी रहती है, तो सतर्क हो जाएं।
यह फेफड़ों या वोकल कॉर्ड्स पर दबाव डाल रहे ट्यूमर का संकेत हो सकता है।
5. बिना वजह वजन कम होना
अगर कम समय में शरीर का 5% या उससे अधिक वजन बिना किसी कारण के घट रहा है, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।
डॉ. अंबुलकर के अनुसार, कैंसर शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है, जिससे अचानक वजन गिरने लगता है।
किसे सबसे ज्यादा खतरा?
हालांकि कोई भी फेफड़ों के कैंसर की चपेट में आ सकता है, लेकिन 55–74 वर्ष की उम्र, लंबे समय तक स्मोकिंग करने वाले या हाल में स्मोकिंग छोड़ने वालों को ज्यादा जोखिम होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि यह जानकारी नॉन-स्मोकर्स को डराने के लिए नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए है।



