नई दिल्ली: Mobile Phone से निकलने वाली रेडियो तरंगें, जिन्हें रेडिएशन कहा जाता है, नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन की श्रेणी में आती हैं। यह ऐसी ऊर्जा है जो डीएनए को नुकसान पहुंचाने या कोशिकाओं को नष्ट करने की ताकत नहीं रखती। फिर भी, सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा वायरल होता है कि मोबाइल रेडिएशन मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हाल ही में एक पोस्ट में कहा गया कि 30 दिनों में मोबाइल रेडिएशन से दिमाग की कोशिकाएं इतनी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं कि माइक्रोस्कोप से नुकसान दिखाई देता है। आइए इसकी सच्चाई जानते हैं।
क्या रेडिएशन से मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट होती हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) जैसे विश्वसनीय संगठनों के अनुसार, मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन इतना कमजोर होता है कि यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता। नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन त्वचा की सतह तक ही सीमित रहता है और केवल हल्की गर्मी पैदा कर सकता है। कुछ प्रयोगशाला अध्ययनों में उच्च स्तर के रेडिएशन से न्यूरल कोशिकाओं पर मामूली प्रभाव देखा गया, लेकिन यह इंसानों पर सामान्य उपयोग में लागू नहीं होता। कोई भी विश्वसनीय शोध यह नहीं साबित करता कि मोबाइल फोन का रोजाना उपयोग मस्तिष्क कोशिकाओं को नष्ट करता है।
वायरल दावों की हकीकत
वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि 30 दिनों में मोबाइल रेडिएशन से मस्तिष्क कोशिकाएं माइक्रोस्कोप में दिखने लायक नष्ट हो जाती हैं। लेकिन इस दावे में किसी वैज्ञानिक अध्ययन या विश्वसनीय स्रोत का उल्लेख नहीं है। अंतरराष्ट्रीय आयोग ICNIRP (Non-Ionizing Radiation Protection) भी स्पष्ट करता है कि मोबाइल रेडिएशन से मस्तिष्क को गंभीर नुकसान का कोई सबूत नहीं है। ऐसे दावे अक्सर भ्रामक और डर फैलाने के लिए बनाए जाते हैं।
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सुरक्षित उपयोग के लिए सुझाव
हालांकि मोबाइल रेडिएशन से गंभीर खतरा साबित नहीं हुआ, फिर भी सावधानी बरतने में कोई हर्ज नहीं। फोन को रात में सिर के पास रखने से बचें, हैडसेट या स्पीकर का उपयोग करें और बच्चों को सीमित समय के लिए फोन दें। मोबाइल का उपयोग संतुलित ढंग से करें और बिना सबूत वाले दावों पर भरोसा न करें।



