नई दिल्ली: अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, चागास रोग (chagas disease) अब 32 राज्यों में फैल चुका है। इनमें कैलिफोर्निया, टेक्सास और फ्लोरिडा जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं। ‘इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज’ जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, यह बीमारी अब अमेरिका में स्थानीय स्तर पर (एंडेमिक) फैल रही है। टेक्सास में 2013 से 2023 के बीच 50 से ज्यादा लोग स्थानीय स्तर पर इस रोग से संक्रमित हुए। खास बात यह है कि कुत्तों में इसकी संक्रमण दर 30% तक पाई गई है। कैलिफोर्निया के लॉस एंजेलिस और सैन डिएगो में किसिंग बग्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि अमेरिका में करीब 3 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, लेकिन 2% से भी कम लोगों को इसकी जानकारी है। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि बिना डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के यह रोग हृदय और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है।
चागास रोग क्या है?
चागास रोग एक परजीवी जनित बीमारी है, जिसे ट्रिपैनोसोमा क्रूजी नामक परजीवी फैलाता है। यह परजीवी किसिंग बग (ट्रायटोमाइन बग) के मल में मौजूद होता है। यह कीट रात के समय इंसानों के चेहरे, खासकर होंठ या आंखों के आसपास काटता है, इसलिए इसे ‘किसिंग बग’ कहा जाता है। काटने के बाद यह कीट अपने मल को त्वचा पर छोड़ देता है। अगर व्यक्ति उस जगह को खुजलाता है, तो परजीवी त्वचा के जरिए या आंखों की झिल्ली से शरीर में दाखिल हो जाता है। इसके अलावा, यह रोग संक्रमित रक्त चढ़ाने, अंग प्रत्यारोपण, या गर्भवती मां से बच्चे में भी फैल सकता है।
लक्षण: दो चरणों में सामने आता है रोग
चागास रोग दो चरणों में विकसित होता है:
- तीव्र चरण (Acute Phase): यह चरण कुछ हफ्तों से लेकर दो महीने तक रह सकता है। इस दौरान लक्षण हल्के होते हैं या कई बार दिखाई ही नहीं देते। आम लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, सिरदर्द, और आंखों की पलक में सूजन (रोमाना साइन) शामिल हैं। कुछ लोगों को पेट दर्द या उल्टी भी हो सकती है।
- क्रॉनिक चरण (Chronic Phase): यह चरण सालों तक चुपके से बढ़ता रहता है। कई बार मरीज को कोई लक्षण नहीं दिखता, लेकिन अंदर ही अंदर परजीवी हृदय और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। इससे अनियमित हृदय गति, हार्ट फेलियर, स्ट्रोक, या आंतों में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यह ‘साइलेंट किलर’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि लक्षण देर से सामने आते हैं।
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
कुछ खास समूहों को चागास रोग का जोखिम ज्यादा है:
- ग्रामीण और दक्षिणी इलाकों (जैसे टेक्सास, कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, एरिजोना) में रहने वाले लोग।
- पुराने या खराब बने घरों में रहने वाले, जहां किसिंग बग आसानी से छिप सकते हैं।
- बाहर खुले में सोने वाले लोग।
- रक्त आधान या अंग प्रत्यारोपण करवाने वाले मरीज।
- गर्भवती मां से बच्चे में संक्रमण का खतरा।
- पालतू या जंगली जानवरों (जैसे रैकून, ओपॉसम) के संपर्क में आने वाले लोग।
डायग्नोसिस और इलाज
चागास रोग की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। तीव्र चरण में परजीवी को सीधे ब्लड में देखा जा सकता है, जबकि क्रॉनिक चरण में एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है। इलाज के लिए दो मुख्य दवाएं हैं: बेनजनिडाजोल और निफर्टिमॉक्स। अगर शुरुआती स्टेज में इलाज शुरू हो जाए, तो 80-100% मरीज ठीक हो सकते हैं। क्रॉनिक स्टेज में ये दवाएं रोग की प्रोग्रेस को धीमा कर सकती हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है। गंभीर मामलों में हार्ट से जुड़ी दवाएं, पेसमेकर, या हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स जैसे मतली, त्वचा पर रैश, या नींद की समस्या हो सकती हैं।
बचाव के उपाय
चूंकि चागास रोग का कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए प्रिवेंशन ही इसका सबसे अच्छा तरीका है। कुछ जरूरी कदम:
- घर की दीवारों, दरवाजों, और खिड़कियों की दरारों को सील करें।
- खिड़कियों पर जाली लगाएं और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- घर के आसपास गंदगी और जानवरों के घोंसलों को हटाएं।
- हाई-रिस्क एरियाज में कीटनाशकों का छिड़काव करें।
- रक्तदान और अंग प्रत्यारोपण से पहले स्क्रीनिंग जरूरी है।
- खतरे वाले इलाकों में रहने वालों को नियमित ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए।
क्यों है यह बीमारी चिंता का विषय?
चागास रोग अब सिर्फ लैटिन अमेरिका की समस्या नहीं रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में 6-7 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं, और हर साल करीब 12,000 मौतें हो रही हैं। अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी इसके केस बढ़ रहे हैं, खासकर प्रवास और यात्रा की वजह से। सबसे बड़ी चुनौती है इसके लक्षणों का देर से पता चलना। जब तक बीमारी डायग्नोज होती है, तब तक हृदय या पाचन तंत्र को भारी नुकसान हो चुका होता है।
जागरूकता और एक्शन की जरूरत
चागास रोग से बचने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। सरकारों और हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन्स को स्क्रीनिंग प्रोग्राम्स को बढ़ावा देना चाहिए। डॉक्टरों को इस बीमारी की पहचान और इलाज की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। आम लोगों को भी इसके खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में बताया जाना चाहिए। अगर समय पर कदम उठाए जाएं, तो इस ‘साइलेंट किलर’ को कंट्रोल करना मुमकिन है। विश्व चागास रोग दिवस (14 अप्रैल) जैसे मौकों पर जागरूकता अभियान इसे रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।



