Alzheimer की पहचान अब खून की जांच से, वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर करीब 5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं, जिनमें से 60-70% मामले अल्जाइमर (Alzheimer) के हैं।

Share This Article:

नई दिल्ली: अल्जाइमर (Alzheimer) एक ऐसी दिमागी बीमारी जो धीरे-धीरे इंसान की याददाश्त, सोचने की शक्ति और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को छीन लेती है, अब तक लाखों लोगों के लिए चुनौती बनी हुई थी। यह रोग शुरुआत में सामान्य भूलने की आदत जैसा लगता है, लेकिन समय के साथ मरीज अपने परिजनों को पहचानने, बात करने और यहां तक कि खाना खाने जैसे बुनियादी कामों में भी असमर्थ हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर करीब 5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं, जिनमें से 60-70% मामले अल्जाइमर के हैं। इस बीमारी की शुरुआती और सटीक पहचान हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस दिशा में क्रांति ला दी है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खून की जांच विकसित की है, जो कुछ ही मिनटों में अल्जाइमर का पता लगा सकती है, वह भी बिना जटिल और महंगी प्रक्रियाओं के।

अल्जाइमर के पीछे का विज्ञान

अल्जाइमर के सटीक कारणों का अभी तक पूरी तरह पता नहीं चल पाया है, लेकिन शोध बताते हैं कि मस्तिष्क में दो असामान्य प्रोटीन – एमिलॉयड प्लाक्स और टाऊ टैंगल्स – जमा होने लगते हैं। ये प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे याददाश्त, तर्कशक्ति और व्यवहार पर बुरा असर पड़ता है। समय के साथ ये बदलाव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बिगाड़ देते हैं।

नई खोज: खून की जांच से आसान डायग्नोसिस

पहले अल्जाइमर का पता लगाने के लिए मरीजों को पैट स्कैन या स्पाइनल फ्लूइड टेस्ट जैसी महंगी और जटिल जांचों से गुजरना पड़ता था। ये टेस्ट न केवल समय लेने वाले और महंगे थे, बल्कि छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में आसानी से उपलब्ध भी नहीं थे। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खून की जांच विकसित की है, जो सस्ती, तेज और आसानी से उपलब्ध है। यह टेस्ट मस्तिष्क में मौजूद अल्जाइमर से जुड़े प्रोटीन को खून में ही डिटेक्ट कर सकता है।

टेस्ट का नाम और उसका काम

एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, इस नई जांच को प्लाज्मा पी-टाऊ217/बीटा-एमिलॉयड रेशियो टेस्ट कहा जाता है। यह टेस्ट खून में दो खास बायोमार्कर – फॉस्फोरिलेटेड टाऊ 217 (पी-टाऊ217) और बीटा-एमिलॉयड 1-42 – के स्तर को मापता है। इन दोनों प्रोटीन का अनुपात यह बताता है कि मस्तिष्क में अल्जाइमर से संबंधित एमिलॉयड प्लाक्स मौजूद हैं या नहीं। यह टेस्ट इतना सटीक है कि यह पारंपरिक पैट स्कैन या स्पाइनल टैप के बराबर परिणाम देता है।

शोध के नतीजे

स्वीडन के एक प्रमुख विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 1,200 से अधिक मरीजों पर इस टेस्ट का अध्ययन किया। परिणामों ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया। इस जांच ने 88-92% मामलों में अल्जाइमर की सटीक पहचान की। पॉजिटिव परिणाम 92% तक पैट स्कैन जैसे टेस्ट से मेल खाते थे, और 97% नेगेटिव परिणाम भी सही पाए गए। इसका मतलब है कि यह टेस्ट न केवल सटीक है, बल्कि भरोसेमंद भी है।

यह टेस्ट किसके लिए?

यह टेस्ट उन लोगों के लिए बनाया गया है, जिनकी उम्र 55 साल से ज्यादा है और जिनमें भूलने, सोचने में परेशानी या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, यह सामान्य स्क्रीनिंग के लिए नहीं है और सिर्फ उन लोगों के लिए है, जिनमें अल्जाइमर के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। यह टेस्ट अमेरिका की दवा नियामक संस्था (एफडीए) से मंजूरी प्राप्त कर चुका है, जो इसकी विश्वसनीयता को और पुख्ता करता है।

क्यों है यह एक गेम-चेंजर?

यह खून की जांच कई मायनों में क्रांतिकारी है।

सस्ती और सुलभ: यह छोटे अस्पतालों और ग्रामीण क्लिनिकों में भी उपलब्ध हो सकती है।

शुरुआती पहचान: यह बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ने में मदद करती है, जो इलाज के लिए जरूरी है।

सुविधाजनक: यह मरीजों को महंगे और असुविधाजनक टेस्ट से बचाती है।

शुरुआती डायग्नोसिस से मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकता है, जिससे उनकी जिंदगी की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

इलाज में कैसे मदद करेगा?

हाल ही में एफडीए ने अल्जाइमर के लिए नई दवाओं जैसे लेकेम्बी और किसुनला को मंजूरी दी है, जो मस्तिष्क से एमिलॉयड प्लाक्स को हटाने में मदद करती हैं। लेकिन ये दवाएं तभी सबसे ज्यादा असरदार होती हैं, जब बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जाए। यह नया खून टेस्ट डॉक्टरों को सही समय पर सही मरीजों की पहचान करने में मदद करेगा, जिससे इलाज की संभावनाएं बढ़ेंगी।

कुछ सीमाएं भी हैं

यह टेस्ट अपने आप में पूरी तरह से अंतिम डायग्नोसिस नहीं देता। डॉक्टरों को मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्कैन की जरूरत होगी। साथ ही, सभी जगह बीमा कंपनियां इस टेस्ट का खर्च कवर नहीं करतीं, हालांकि एफडीए की मंजूरी के बाद यह स्थिति बदल सकती है।

भविष्य की संभावनाएं

यह खून की जांच अल्जाइमर की डायग्नोसिस में सिर्फ पहला कदम है। वैज्ञानिक अब और भी उन्नत टेस्ट पर काम कर रहे हैं, जो अलग-अलग बायोमार्कर को ट्रैक कर सकें। ये टेस्ट न केवल बीमारी की शुरुआती पहचान करेंगे, बल्कि इसके बढ़ने की गति को भी मॉनिटर करने में मदद करेंगे। अल्जाइमर जैसे गंभीर रोग में समय पर पहचान जिंदगी बदल सकती है। यह नया टेस्ट न सिर्फ सस्ता और सरल है, बल्कि दुनिया भर के उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं। जल्द ही यह सुविधा छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचेगी, जिससे अल्जाइमर के खिलाफ जंग में एक नया अध्याय शुरू होगा।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

https://newgindia.com/author/usha/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.