WHO गाइडलाइन अपनाने पर सहमति, मजबूत होगा क्लिनिकल ट्रायल्स

दुनिया के बड़े चिकित्सा अनुसंधान वित्तपोषकों ने WHO मानकों को अपनाने का फैसला किया है, ताकि क्लिनिकल ट्रायल्स अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकें।

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नई दिल्ली: दुनिया के प्रमुख चिकित्सा अनुसंधान वित्तपोषकों (Global Health Research) ने हाल ही में एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की है। अब वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय किए गए मानकों को अपनाकर नैदानिक परीक्षण (Clinical Trials) को और पारदर्शी व प्रभावी बनाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों और समाज के लिए लाभकारी हो।

डब्ल्यूएचओ की नई गाइडेंस के अनुरूप पहल

यह घोषणा डब्ल्यूएचओ की “गाइडेंस फॉर बेस्ट प्रैक्टिसेज फॉर क्लिनिकल ट्रायल्स” और “ग्लोबल एक्शन प्लान फॉर क्लिनिकल ट्रायल इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (GAP-CTS)” जारी होने के तुरंत बाद हुई है। यह पहला विश्व स्वास्थ्य सभा के प्रस्ताव 75.8 के अनुरूप है। इससे पहले भी 2017 में ट्रायल परिणामों को सार्वजनिक करने और 2023 में संक्रामक रोगों के लिए वैश्विक फंडिंग सहयोग की दिशा में कदम उठाए गए थे।

स्थायी और समुदाय-आधारित प्रणाली

  • नए ढांचे के तहत क्लिनिकल ट्रायल्स को केवल अस्थायी प्रोजेक्ट न मानकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र का हिस्सा बनाया जाएगा।
  • स्थानीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर परीक्षण डिजाइन किए जाएंगे।
  • संसाधन-सीमित देशों में क्षमता निर्माण पर जोर होगा।
  • मरीजों और समुदायों को शुरुआती चरण से शामिल किया जाएगा ताकि शोध उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो।

शोधकर्ताओं के लिए समर्थन

फंडिंग प्राप्त करने वाले शोधकर्ताओं को अब बेहतर प्रथाओं को अपनाने में मदद मिलेगी। इसमें शामिल हैं:

  • आंकड़ों का पारदर्शी प्रबंधन
  • समुदाय की सक्रिय भागीदारी
  • विविध जनसंख्या से प्रतिभागियों का चयन
  • इससे परिणाम अधिक विश्वसनीय और सार्वभौमिक होंगे।

उच्चतम मानकों का पालन अनिवार्य

  • वित्तपोषकों ने यह भी वादा किया है कि सभी ट्रायल्स अंतरराष्ट्रीय सर्वोच्च मानकों के अनुरूप पूरे होंगे।
  • हर परीक्षण को सार्वजनिक रजिस्ट्रियों में दर्ज करना होगा।
  • परिणामों को 12 महीने के भीतर साझा करना अनिवार्य होगा।
  • शोध प्रोटोकॉल और सांख्यिकीय योजनाओं को खुले मंचों पर प्रकाशित किया जाएगा।
  • स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान डेटा को तुरंत साझा करने पर जोर होगा।

अपेक्षित बदलाव

इस पहल से वैश्विक स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल सिस्टम अधिक समन्वित होगा।

  • अनावश्यक दोहराव पर रोक लगेगी।
  • फंड का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
  • विविधता और समानता को प्राथमिकता मिलेगी।
  • पारदर्शिता और जनता का भरोसा बढ़ेगा।

जवाबदेही और निगरानी

अगले छह महीनों में सभी हस्ताक्षरकर्ता वित्तपोषक मिलकर प्रगति मापने के सूचकांक तय करेंगे। इससे यह ट्रैक किया जा सकेगा कि प्रतिबद्धताओं को कितनी गंभीरता से लागू किया जा रहा है।

यह पहल केवल एक नीतिगत बयान नहीं, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान की दिशा बदलने वाला कदम है। डब्ल्यूएचओ और वैश्विक वित्तपोषकों की यह साझेदारी आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और समुदाय-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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