फलक पर स्पेस मिशनः अंतरिक्ष में तेजी से कदम बढ़ा रहा भारत

गगनयान और भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन पर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष में बढ़ने वाले कदमों पर विस्तार से बात की है।

Share This Article:

नई दिल्ली: अमेरिका, रूस और चीन के बाद अब भारत अंतरिक्ष में छलांग लगाने जा रहा है। मिशन गगनयान से भारत अपने अंतरक्षियात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगा। चार सदस्यीय दल के साथ 5-7 दिन तक अंतरिक्ष में रहेगा। इसके लिए जो तैयारियां चल रही हैं, वह एडवांस स्टेज में हैं। आइए, सिलसिलेवार ढंग से बात की शुरुआत इसी से करते हैं;

चूंकि हमें अंतरिक्ष में जाना है, तो पहली जरूरत वाहन की होगी। ठीक वैसे ही, जैसे हम घर से ऑफिस जाने के लिए कार या किसी दूसरे वाहन का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने इस वाहन का विकास और जमीनी परीक्षण पूरा कर लिया है। यही इसरो का मानव रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) है। यह इसरो के GSLV Mk III का संशोधित संस्करण है।

अगली जो जरूरत है, वह अंतरिक्ष में रहने और काम करने की सुविधा यानि ऑर्बिटल माड्यूल की है। यह अंतरिक्ष यान का ही हिस्सा है। इसमें क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के लिए प्रणोदन प्रणालियां विकसित कर ली गईं हैं। और इनका परीक्षण भी हुआ है। क्रू मॉड्यूल मतलब दबावयुक्त कैप्सूल, जिसमें अंतरिक्ष यात्री होंगे और सर्विस मॉड्यूल, मतलब वह चीजें, जो अंतरिक्ष यात्रियों की मददगार होंगी।
क्रू एस्केप सिस्टम (CES) मतलब जरूरत पड़ने पर अंतरिक्षयात्रियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए पांच तरह की मोटर विकसित हो गई हैं। और इनका परीक्षण भी किया गया है।

CES के सत्यापन के लिए एक परीक्षण वाहन, टीवी-डी1 विकसित किया है। इसका उड़ान परीक्षण हो गया है। इसके अगले संस्करण टीवी-डी2 के लिए गतिविधियां प्रगति पर हैं। संचालन एवं संचार नेटवर्क भू-नेटवर्क विन्यास को अंतिम रूप दिया गया। IDRSS-1 फीडर स्टेशन और स्थलीय संपर्क स्थापित किए गए।

अब बात आती है अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी, Crew recovery operation, चालक दल पुनर्प्राप्ति अभियान की। यह चरणबद्ध प्रक्रिया है। इसमें अंतरिक्ष यात्री को जमीन या पानी पर उतारना, अंतरिक्ष यात्रियों को उससे निकालना, उनका चिकित्सीय परीक्षण, अंतरिक्ष यात्रियों के सामान की वापसी आदि शामिल हैं। गगनयान के अंतरिक्ष यात्री समुद्र में उतरेंगे। इसको अंतिम रूप दे दिया गया है। पुनर्प्राप्ति योजना तैयार है।

एक बात और, आसमान में पहली बार जाना है तो ऐसा संभव नहीं है कि बगैर पूर्व परीक्षण के चला जाया जाए। पहले मानव रहित मिशन भेजे जाते हैं। इससे पूरी तैयारी परखी जाती है। गगनयान से पहले भारत के पहले मानवरहित मिशन जी 1 के लिए सी32-G चरण और सीईएस मोटर्स का निर्माण पूरा है। इसका क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल बन गई है। क्रू मॉड्यूल के पहले चरण की जांच भी पूरी हो गई है।

इसरो के मुताबिक, डिजाइन, विश्लेषण और डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े काम इसरो की तरफ से किए जाते हैं, जबकि गगनयान के लिए दूसरे उपकरण देश में स्थित सैकड़ों उद्योग बनाए जा रहे हैं और वही सप्लाई भी कर रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष यान से मानव को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और फिर उन्हें धरती पर सुरक्षित वापस लाने की क्षमता का प्रदर्शन करने का है।

गगनयान, टीवी-डी1

अब बात तैयारी से आगे की
गगनयान से यह होगा कि रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान करने वाला चौथा देश बनेगा। इसको ले जाने वाला जो वाहन है, वह पृथ्वी की निम्न कक्षा (lower orbit) में चालक दल के मॉड्यूल (crew module) को ले जाने में सक्षम है।

इस यान से 8 टन वजनी उपग्रह पृथ्वी की निम्न कक्षा और 4 टन वजनी उपग्रह को 36,000 किलोमीटर ऊंची वाली भू-स्थिर (geosynchronous) कक्षा में स्थापित कर सकेगा। इसकी महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें भारतीय क्रायोजेनिक इंजन के तीसरे चरण का उपयोग किया गया है।

पृथ्वी की निम्न कक्षा में 5-7 दिन तक लगाएगा चक्कर
जब आप किसी थियेटर में ड्रामा देख रहे होते हैं या मल्टीप्लेक्स में फिल्म, तो अलग-अलग सीट से आपको एक ही मंचन का अलग पहलू दिखाता है। मतलब, दृष्टा या देखने वाले की स्थिति के हिसाब से दृश्य में बदलाव नजर आता है।

इसी तरह से पृथ्वी की भी अलग-अलग कक्षाएं हैं। नियत कक्षा में मौजूद उपग्रह पृथ्वी को अलग संदर्भ से निरीक्षण का अवसर देता है। हर कक्षा का अपना महत्व है। कुछ कक्षाओं में उपग्रह पृथ्वी के किसी एक बिंदु पर टिका हुआ दिखाता है, जबकि दूसरी कक्षाओं मे उपग्रह पृथ्वी के कई स्थानो के उपर से लगातार यात्रा करता रहता है।

मूल रूप से पृथ्वी पर उपग्रहों की तीन कक्षायें है; उच्च पृथ्वी कक्षा, मध्यम पृथ्वी कक्षा तथा निम्न पृथ्वी कक्षा;

  • अधिकतर मौसम संबंधी उपग्रह और कुछ संचार उपग्रह उच्च पृथ्वी कक्षा में रहते है, अर्थात पृथ्वी की सतह से अधिक दूरी पर। 
  • मध्य पृथ्वी कक्षा मे रहने वाले उपग्रह नेविगेशन तथा जासूसी उपग्रह होते है जो किसी एक विशेष क्षेत्र पर नजर रखने के लिये बनाये गये होते है। 
  • वैज्ञानिक उपग्रह पृथ्वी की निम्न कक्षा मे होते है जिसमे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, नासा के पृथ्वी के निरीक्षण उपग्रहों के बेड़े का समावेश है। 

कक्षाओं के वर्गीकरण का एक उपाय उंचाई है। निम्न पृथ्वी कक्षा वातावरण के ठीक उपर से आरंभ होती है, जबकि उच्च पृथ्वी कक्षा पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384,403 किमी के दसवें भाग के समीप होती है।

किसी भी कक्षा की उंचाई या पृथ्वी की सतह से उपग्रह की दूरी से उपग्रह की गति निर्धारित होती है;

  • पृथ्वी की परिक्रमा करते उपग्रह की गति का नियंत्रण मुख्य रूप से पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल करता है। 
  • जब उपग्रह पृथ्वी के समीप होता है, गुरुत्वाकर्षण बल का खिंचाव अधिक होता है और जिससे उपग्रह की गति अधिक होती है। नासा का एक्वा उपग्रह पृथ्वी की सतह से 705 किमी उंचाई पर है और वह पृथ्वी की एक परिक्रमा 99 मिनट मे कर लेता है।
  • जबकि एक मौसमी उपग्रह 36,000 किमी की उंचाई से पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिये 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड लेता है। 
  • पृथ्वी के केंद्र से 384,403 किमी की दूरी पर से चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिये 28 दिन लगते है।

किसी भी उपग्रह की उंचाई मे परिवर्तन करने पर उसकी कक्षीय गति मे भी परिवर्तन होता है। इससे एक विचित्र विरोधाभाष का भी निर्माण होता हओ। मान लीजिये कि किसी उपग्रह के संचालक को उपग्रह की कक्षीय गति बढ़ानी है, वह उपग्रह के प्रणोदक को जलाकर उपग्रह की गति नहीं बढ़ा सकता है। यदि वह ऐसा करता है तो उपग्रह की उंचाई बढ़ जायेगी और उससे उपग्रह की कक्षीय गति कम हो जायेगी। उपग्रह की गति बढ़ाने के लिये उपग्रह के प्रणोदक राकेट को उपग्रह की गति की उल्टी दिशा मे चलाना होगा, इसे हम पृथ्वी के सतह पर ब्रेक लगाना कह सकते है। इससे उपग्रह अपनी कक्षा मे पृथ्वी के निकट आयेगा और उसकी गति बढ़ जायेगी।

ऊंचाई के अलावा कक्षा की उत्केंद्रता, मतलब उसका आकार और उसका झुकाव, किसी उपग्रह के ऑर्बिट में पथ का निर्धारण करते हैं;

  • कम उत्केंद्रता ऑर्बिट वाला एक उपग्रह पृथ्वी के निकट एक घेरे में परिक्रमा लगाता है। एक उत्केंद्र ऑर्बिट, अण्डाकार होता है, जहां पृथ्वी से उपग्रह की दूरी इस तथ्य पर निर्भर करती है कि वह ऑर्बिट में किस स्थान पर है। 
  • ऑर्बिट का झुकाव, भूमध्य रेखा के संबंध में ऑर्बिट के कोण बताता है। 0° का एक कक्षीय झुकाव भूमध्य रेखा के एकदम ऊपर होता है, जबकि 90° का कक्षीय झुकाव ध्रुव के ठीक ऊपर होता है और 180° कक्षीय झुकाव पृथ्वी के घुमाव के विपरीत दिशा में भूमध्य रेखा के ऊपर होता है।
तस्वीर… इसरो से

गगनयान में इस्तेमाल होगी हरित ऊर्जा
इसरो अपने महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए हरित ऊर्जा (प्रणोदक) बना रहा है। इसका इस्तेमाल रॉकेट के हर चरण में होगा। देश को हरित तकनीक अपनाकर पर्यावरणीय नुकसान को सीमित करने की जरूरत बढ़ गई है।

फायदाः
इससे देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के स्तर को बढ़ाने तथा युवाओं को प्रेरित करने में मदद करेगा। गगनयान मिशन में विभिन्न एजेंसियों, प्रयोगशालाओं, उद्योगों और विभागों को शामिल किया जाएगा।

इसके उपकरण निजी क्षेत्र में बनने से औद्योगिक विकास में सुधार करने में मदद करेगा। केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ाने के लिए IN-SPACE का गठन किया है। मिशन सामाजिक लाभों के लिये प्रौद्योगिकी के विकास में मदद करेगा।

यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। कई देशों के लिये एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर्याप्त नहीं हो सकता है। इसमें क्षेत्रीय पारिस्थितिक तंत्र को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है। ऐसे में अत: गगनयान मिशन क्षेत्रीय जरूरतों- खाद्य, जल एवं ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा।

अंतरिक्ष में प्रथमः

  • पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन थे, जिन्‍होंने साल 1961 में स्‍पेस की यात्रा की थी। 
  • देश के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 2 अप्रैल 1984 को रूस के सोयूज टी-11 में बैठकर स्‍पेस की यात्रा की थी। 
  • अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला रूस की वेलेन्टिना तरेश्कोवा ने 16 जून 1963 को स्‍पेस की यात्रा की थी। 
  • अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला को 1997 में यह मौका मिला था।

(…कहानी अभी जारी है)

जो यहां है…स्पेस मिशनः दुनिया में नाम करेगा भारत, 10 साल का टारगेट तय, उड़ान होगी तेज

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.