नई दिल्ली : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन के दौरान ली गई पृथ्वी और चंद्रमा की आश्चर्यजनक तस्वीरें साझा कर दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा, “हेलो, चांद। यहां आकर बहुत अच्छा लगा।” ये तस्वीरें न केवल वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ब्रह्मांड की सुंदरता को एक नए नजरिए से पेश करती हैं।
“You can see the surface of the Moon…we just went sci-fi.”
— NASA (@NASA) April 8, 2026
On flight day seven, images from our @NASAArtemis II crew amazed, turning science fiction to reality. From the lunar far side to a solar eclipse from the Moon, the views are EVERYTHING. No pressure to pick a favorite. pic.twitter.com/sHGfknqwW1
आर्टेमिस II मिशन के चालक दल के सदस्यों रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन ने चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए उसके उन हिस्सों को देखा, जो अब तक मानवीय आंखों से ओझल रहे थे।
अंतरिक्ष यात्रियों ने इन अनोखे नजारों को बेहतरीन तस्वीरों और शब्दों में पिरोया है। इस मिशन की एक सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अंतरिक्ष के इतिहास में पहली बार स्मार्टफोन का उपयोग करके भी उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ली गई, जिन्हें विशेष रूप से अंतरिक्ष उड़ान के लिए मंजूरी दी गई थी।
32 कैमरों का जाल
ओरियन स्पेसक्राफ्ट को कुल 32 अत्याधुनिक कैमरों और फोटो-वीडियो उपकरणों से लैस किया गया है। इनमें से 15 कैमरे यान के बाहरी हिस्सों पर लगे हैं, जो लॉन्च से लेकर सोलर एरे की तैनाती और चंद्रमा की कक्षा में यात्रा के महत्वपूर्ण पलों को रिकॉर्ड कर रहे हैं। बाकी 17 हैंडहेल्ड डिवाइस चारों अंतरिक्ष यात्रियों के पास हैं। इन उपकरणों में निकॉन जेड9 मिररलेस कैमरा, निकॉन डी5 डीएसएलआर, गोप्रो और आधुनिक स्मार्टफोन शामिल हैं। ये सभी उपकरण इंजीनियरिंग, नेविगेशन और चंद्रमा से जुड़े वैज्ञानिक डेटा जुटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ऑरोरा लाइट और नेविगेशन की सटीकता
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की ऐसी तस्वीरें भी ली हैं, जिनमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर दिखने वाली ‘ऑरोरा लाइट’ एक साथ दिखाई दे रही है। इसके अलावा, ओरियन पर लगा एक विशेष ऑप्टिकल नेविगेशन कैमरा पृथ्वी और चंद्रमा की फोटो के जरिए अंतरिक्ष यान को गहरे अंतरिक्ष में अपनी सटीक स्थिति तय करने में मदद कर रहा है। यह तकनीक भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अपोलो 8 की यादें और नई चुनौतियां
आर्टेमिस II द्वारा ली गई कुछ शुरुआती तस्वीरें 1968 के ऐतिहासिक ‘अपोलो 8’ मिशन की प्रसिद्ध ‘अर्थराइज’ (पृथ्वी उदय) तस्वीर की याद दिलाती हैं। हालांकि, उस समय बिल एंडर्स ने हैसलब्लैड फिल्म कैमरे का उपयोग किया था, जबकि आज के एस्ट्रोनॉट्स के पास 80-400 मिमी टेलीफोटो लेंस और डिजिटल सेंसर की शक्ति है।
नासा के अनुसार, यान की तीव्र गति और समय की पाबंदी के कारण वैसी ही आइकोनिक तस्वीर दोबारा हूबहू कैद करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन डिजिटल तकनीक ने इसे संभव बना दिया है।



