भारत का पर्यटन कायाकल्प: समृद्धि की एक नई उड़ान

पिछले एक दशक (2014-2025/26) में भारत का पर्यटन क्षेत्र केवल मनोरंजन का साधन न रहकर देश के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक गौरव का एक मुख्य स्तंभ बन चुका है। अधोसंरचना (Infrastructure) के आधुनिकीकरण, नीतिगत सुधारों और 'स्वदेश दर्शन' व 'प्रसाद' जैसी योजनाओं के माध्यम से सुदूर और ऐतिहासिक क्षेत्रों को वैश्विक स्तर पर उभारा गया है। आज भारत विश्व की 8वीं सबसे बड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था है जो $231.6$ बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान देती है।

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नई दिल्ली: पर्यटन केवल यात्रा और मनोरंजन का उद्योग नहीं है। यह आर्थिक विकास, रोजगार के अवसरों के निर्माण और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक बेहद शक्तिशाली उत्प्रेरक (Catalyst) है। जब कोई यात्री किसी नए स्थान पर कदम रखता है, तो वह केवल एक टिकट नहीं खरीदता, बल्कि स्थानीय आजीविका के एक विशाल नेटवर्क को सक्रिय करता है। होटल, परिवहन ऑपरेटर, टूर गाइड, स्थानीय शिल्पकार, रेस्तरां और अनगिनत छोटे और मझोले उद्यम (MSMEs) सीधे तौर पर इस यात्रा से लाभान्वित होते हैं। यह जमीनी स्तर (Grassroots Level) पर उद्यमिता और समृद्धि को बढ़ावा देने की एक अनूठी प्रक्रिया है।

भारत जैसी सांस्कृतिक विविधताओं और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध भूमि में पर्यटन क्षेत्रीय विकास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। यह सुदूर और उभरते हुए गंतव्यों में निवेश को आकर्षित करता है, स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी रोजगार पैदा करता है और भारत की अनूठी विरासत, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। आर्थिक लाभ से परे, पर्यटन सांस्कृतिक समझ को गहरा करता है, वैश्विक स्तर पर लोगों से लोगों के जुड़ाव को मजबूत करता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को एक नई पहचान देता है।

हलचल भरे महानगरों और पूजनीय तीर्थस्थलों से लेकर शांत गांवों, सुंदर समुद्र तटों, राजसी पहाड़ों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील ‘इको-हॉटस्पॉट्स’ तक, पर्यटन आज देश के समग्र विकास पथ को आकार देने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। पिछले एक दशक में इस क्षेत्र ने दूरदर्शी नीतिगत पहलों, बेहतर कनेक्टिविटी, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और केंद्रित गंतव्य विकास (Focused Destination Development) के माध्यम से एक अभूतपूर्व गति हासिल की है। आज, भारत का पर्यटन क्षेत्र आर्थिक प्रगति और समावेशी विकास (Inclusive Growth) के एक बेहद महत्वपूर्ण चौराहे पर खड़ा है।

संख्याओं के नजरिए से देखें तो, साल 2014 से 2025 के बीच भारत ने 181.25 मिलियन अंतरराष्ट्रीय आगमन (International Arrivals) और 93.35 million विदेशी पर्यटक आगमन (Foreign Tourist Arrivals – FTAs) दर्ज किए हैं। यहाँ यह समझना जरूरी है कि ‘अंतरराष्ट्रीय आगमन’ में भारत आने वाले कुल आगंतुक शामिल हैं, जिनमें विदेशी नागरिकों के साथ-साथ अनिवासी भारतीय (NRIs) भी शामिल हैं। वहीं, ‘विदेशी पर्यटक आगमन’ में विशेष रूप से केवल वे विदेशी नागरिक शामिल होते हैं जो इस अवधि के दौरान भारत की यात्रा पर आए।

जैसे-जैसे देश के राजमार्गों का विस्तार हो रहा है, रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण हो रहा है और हवाई संपर्क बेहतर हो रहा है, भारत के कोने-कोने के पर्यटन स्थल पहले से कहीं अधिक सुलभ होते जा रहे हैं। यह विकास विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में पर्यटन के योगदान को और अधिक सुदृढ़ कर रहा है।

भारत में पर्यटन का ऐतिहासिक संदर्भ और तुलनात्मक विश्लेषण

पर्यटन के आधुनिक स्वरूप को समझने के लिए हमें भारत के समृद्ध और गौरवशाली इतिहास पर दृष्टि डालनी होगी। भारत में यात्रा का इतिहास सदियों पुराना है, जो समय के साथ बदलता गया है।

1. प्राचीन और मध्यकालीन युग: आस्था और ज्ञान की खोज

प्राचीन काल में भारत में यात्रा का मुख्य उद्देश्य ‘आध्यात्मिकता’ (Spirituality) और ‘ज्ञान’ (Knowledge) की खोज था। बौद्ध धर्म के प्रसार के समय, चीनी यात्री जैसे ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) और फाह्यान (Fa-Hien) नालंदा और तक्षशिला जैसे महान विश्वविद्यालयों में ज्ञान प्राप्त करने और बौद्ध पांडुलिपियों को एकत्र करने के लिए भारत आए थे।

इसी तरह, मध्यकाल में इब्न बतूता (Ibn Battuta) और अल-बरूनी (Al-Biruni) जैसे यात्रियों ने भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि को अपनी यात्रा वृत्तांतों में दर्ज किया। प्राचीन काल से ही भारत में ‘तीर्थयात्रा’ (Pilgrimage) की एक सुदृढ़ परंपरा रही है, जहाँ लोग चार धाम, बारह ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों की यात्रा करते थे। यह यात्राएं न केवल आध्यात्मिक थीं बल्कि विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान का माध्यम भी बनती थीं।

2. आधुनिक युग (स्वतंत्रता के बाद): बिखरा हुआ दृष्टिकोण

स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशकों में, भारत में पर्यटन को मुख्य रूप से एक विलासिता (Luxury) के रूप में देखा जाता था। बुनियादी ढांचे की कमी, परिवहन के सीमित साधन और नीतियों में पर्यटन को कम प्राथमिकता दिए जाने के कारण यह क्षेत्र कुछ चुनिंदा गंतव्यों (जैसे ताजमहल, जयपुर, या गोवा) तक ही सीमित रहा। पहले के दृष्टिकोण में ‘टुकड़ों में विकास’ (Fragmented Interventions) किया जाता था, जिससे कई उच्च क्षमता वाले गंतव्य उपेक्षित रह गए।

3. वर्तमान दशक (2014-2026): एक एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण

पिछले 10-12 वर्षों में भारत सरकार ने पर्यटन को एक मुख्य आर्थिक चालक के रूप में मान्यता दी है। अब ध्यान केवल यात्रियों को आकर्षित करने पर नहीं है, बल्कि उन्हें एक ‘समग्र अनुभव’ (Immersive Experience) प्रदान करने पर है।

ऐतिहासिक बनाम वर्तमान प्रवृत्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण:

मानदंड / पैरामीटरऐतिहासिक दृष्टिकोण (2014 से पहले)वर्तमान रुझान और नीतियां (2014-2026)
विकास की रणनीतिटुकड़ों में और असंगठित हस्तक्षेप (Fragmented Approach)।थीम-आधारित सर्किट और एकीकृत गंतव्य विकास (‘स्वदेश दर्शन’)।
आध्यात्मिक पर्यटनबुनियादी सुविधाओं की कमी, स्वच्छता और सुरक्षा की चुनौतियाँ।‘प्रसाद’ (PRASHAD) योजना के तहत अत्याधुनिक सुविधाएं, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान।
कनेक्टिविटी / संपर्कसीमित हवाई मार्ग, पारंपरिक ट्रेनें और खराब सड़कें।एक्सप्रेसवे का जाल, वंदे भारत ट्रेनें, रेलवे आधुनिकीकरण और उड़ान (UDAN) योजना।
वीजा प्रक्रियाजटिल कागजी कार्रवाई और दूतावासों के चक्कर।ई-टूरिस्ट वीजा (e-Tourist Visa) प्रणाली के माध्यम से त्वरित और डिजिटल प्रक्रिया।
स्थिरता (Sustainability)अनियंत्रित पर्यटन, पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति की अनदेखी।‘Travel for LiFE’ कार्यक्रम, ग्रीन सर्टिफिकेशन और कम भीड़ वाले ‘निश’ (Niche) पर्यटन को बढ़ावा।
वैश्विक रैंकिंगवैश्विक पटल पर सीमित दृश्यता।2024 में 20वां स्थान (2016 में 25वें स्थान से सुधार) और वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्था में 8वां स्थान।

बुनियादी ढांचे का पुनरोद्धार – स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजना

किसी भी गंतव्य का वास्तविक अनुभव यात्री के वहां पहुँचने से बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। सुगम और अच्छी तरह से जुड़ी सड़कें, सुलभ सार्वजनिक स्थान, उच्च गुणवत्ता वाले आवास और आधुनिक आगंतुक सुविधाएं यह तय करती हैं कि किसी पर्यटन स्थल को कैसे याद रखा जाएगा। इसी सोच के साथ वर्ष 2014 में दो ऐतिहासिक योजनाएं शुरू की गईं: स्वदेश दर्शन और प्रसाद (PRASHAD)।

स्वदेश दर्शन: थीम-आधारित सर्किट से इमर्सिव हब तक

स्वदेश दर्शन योजना का मुख्य उद्देश्य देश में बड़े पैमाने पर विश्व स्तरीय पर्यटन बुनियादी ढांचे का विकास करना है।

  • स्वदेश दर्शन 1.0: इस योजना के पहले चरण के तहत, देश भर में 15 थीम-आधारित पर्यटक सर्किट (जैसे बौद्ध सर्किट, रामायण सर्किट, तटीय सर्किट, डेजर्ट सर्किट आदि) के तहत ₹5,000 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें से 75 परियोजनाएं भौतिक रूप से पूरी हो चुकी हैं, जिससे पर्यटकों के लिए सुविधाओं और कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार हुआ है।
  • स्वदेश दर्शन 2.0 (2022): बदलते समय के साथ, सरकार ने 2022 में ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ पेश किया, जिसका ध्यान अब केवल बुनियादी ढांचा बनाने पर नहीं बल्कि ‘सतत और अनुभव-आधारित’ (Sustainable & Experience-based) पर्यटन पर है। इसका उद्देश्य गंतव्यों को ऐसे आकर्षक केंद्रों में बदलना है जो अद्वितीय अनुभव प्रदान कर सकें।

सफल उदाहरण:

  1. उत्तराखंड में टिहरी झील (Tehri Lake): यहाँ तैरते हुए लॉग हट्स (Floating Log Huts) का निर्माण किया गया है, जो आगंतुकों को झील के किनारे का एक अभूतपूर्व और अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं।
  2. कुरुक्षेत्र, हरियाणा: यहाँ महाभारत पर आधारित ‘थीमैटिक आकर्षण’ विकसित किए गए हैं, जो आगंतुकों को जीवंत कहानियों और सांस्कृतिक व्याख्याओं के माध्यम से इतिहास से जोड़ते हैं।

प्रसाद (PRASHAD) योजना: आस्था और विकास का संगम

भारत में सदियों से आस्था की यात्राएं करोड़ों लोगों को जोड़ती आई हैं। ये पवित्र यात्राएं केवल आध्यात्मिक शांति नहीं देतीं, बल्कि स्थानीय आजीविका, पारंपरिक शिल्पकला और क्षेत्रीय आर्थिक विकास का मुख्य आधार भी हैं।

इस क्षमता को पहचानते हुए, PRASHAD (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Heritage Augmentation Drive) योजना के तहत देश भर में ₹1,700 करोड़ से अधिक की 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन एकीकृत विकास कार्यों ने अत्यधिक भीड़भाड़ वाले आध्यात्मिक स्थलों पर सुरक्षा और सुविधा के स्तर को पूरी तरह बदल दिया है। इसके प्रमुख उदाहरण हैं:

  • सोमनाथ (गुजरात): तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं और दर्शन प्रक्रिया को आसान बनाया गया।
  • श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश): पहाड़ी और आध्यात्मिक क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सुरक्षा में सुधार।
  • गोवर्धन (उत्तर प्रदेश): परिक्रमा पथ और पवित्र सरोवरों के आसपास व्यापक बुनियादी ढांचे का विकास।

इन प्रयासों से यह सुनिश्चित हो रहा है कि आध्यात्मिक धरोहरों का संरक्षण भी हो और पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।

राज्यों को विशेष सहायता और पूंजीगत निवेश (SASCI)

पर्यटन अवसंरचना को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर काम करने की रणनीति अपनाई है। बजट 2024-25 में की गई घोषणा के तहत “राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता” (Special Assistance to States for Capital Investment – SASCI) कार्यक्रम को क्रियान्वित किया गया है।

इसके अंतर्गत ‘प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों का वैश्विक स्तर पर विकास’ (Development of Iconic Tourist Centres to Global Scale) किया जा रहा है। इस योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • स्वीकृत परियोजनाएं: 23 राज्यों में ₹3,295.76 करोड़ के परिव्यय के साथ 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।
  • उद्देश्य: उच्च क्षमता वाले गंतव्यों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर नए आर्थिक अवसर और रोजगार पैदा करना।

स्थिरता, जागरूक यात्रा और ओवरटूरिज्म का प्रबंधन

जैसे-जैसे पर्यटन उद्योग का विस्तार हो रहा है, पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और परंपराओं को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार कई अभिनव कदम उठा रही है:

1. निश (Niche) पर्यटन के माध्यम से ओवरटूरिज्म का समाधान

लोकप्रिय और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्थलों (Overtourism) पर दबाव कम करने के लिए नए और विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों (Niche Tourism Products) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पर्यटकों का प्रवाह देश के विभिन्न हिस्सों में समान रूप से वितरित हो जाता है:

  • हिमालयन ट्रेकिंग ट्रेल्स: साहसिक पर्यटन के प्रेमियों के लिए नए रास्तों की खोज।
  • बर्डवाचिंग सर्किट: पक्षी प्रेमियों के लिए देश के आर्द्रभूमियों (Wetlands) का विकास।
  • क्यूरेटेड टर्टल टूरिज्म: तटीय क्षेत्रों में कछुओं के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को जागरूक करने के अनुभव।

2. Travel for LiFE (लाइफ के लिए यात्रा) कार्यक्रम

यह एक जन आंदोलन है जो पर्यटकों, पर्यटन व्यवसायों और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सचेत विकल्प चुनकर अपने ‘पारिस्थितिक पदचिह्न’ (Ecological Footprint) को न्यूनतम करना है।

3. वैश्विक मान्यता और उपलब्धियां

  • ममल्लापुरम (तमिलनाडु): हाल ही में दक्षिण एशिया का पहला ऐसा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना जिसे प्रतिष्ठित ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस सिल्वर’ (Green Destinations Silver) वैश्विक प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह जिम्मेदार गंतव्य प्रबंधन का एक वैश्विक उदाहरण है।
  • चैलेंज-बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (CBDD): इस अनूठी पहल के तहत आध्यात्मिक और इको-टूरिज्म श्रेणियों में ₹697.94 करोड़ की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
    • असम का पनीडीहिंग पक्षी अभयारण्य (Panidihing Bird Sanctuary) और तेलंगाना में निज़ाम सागर जलाशय इको-टूरिज्म परियोजना इसके बेहतरीन उदाहरण हैं, जो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, डिजिटल सुधार और वैश्विक जुड़ाव

एक परस्पर जुड़ी दुनिया में, पर्यटन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां पहुंचना कितना आसान है और तकनीक का स्तर क्या है। पिछले एक दशक में भारत ने इस दिशा में बड़े सुधार किए हैं।

1. रैंकिंग में ऐतिहासिक उछाल

नीतिगत और बुनियादी ढांचागत सुधारों का परिणाम अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में साफ दिखाई देता है:

  • अंतरराष्ट्रीय आगमन: साल 2024 में भारत ने 20.6 मिलियन अंतरराष्ट्रीय आगमन दर्ज किए, जिससे भारत वैश्विक रैंकिंग में 20वें स्थान पर पहुंच गया (जबकि 2016 में भारत 25वें स्थान पर था)।
  • आर्थिक योगदान: आज भारत दुनिया की शीर्ष पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में 8वें स्थान पर है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 231.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान देता है।
  • भविष्य का अनुमान: वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) का अनुमान है कि अगले दशक में भारत इस सूची में चौथे स्थान पर पहुंच जाएगा।

2. डिजिटल और नीतिगत सुधार

  • e-Tourist Visa: इस प्रणाली ने भारत आने के इच्छुक विदेशी नागरिकों के लिए वीजा की प्रक्रिया को बेहद सरल, त्वरित और पारदर्शी बना दिया है।
  • NIDHI और NIDHI Plus प्लेटफॉर्म: इन डिजिटल पोर्टलों ने देश भर के आवास प्रदाताओं (Hotels/Homestays) और ट्रैवल एजेंटों के लिए पंजीकरण और व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बना दिया है, जिससे एक कुशल पर्यटन इकोसिस्टम का निर्माण हुआ है।

3. G20 प्रेसीडेंसी और MICE पर्यटन

भारत की G20 अध्यक्षता ने दुनिया के सामने देश की सांस्कृतिक विविधता, समृद्ध विरासत और जीवंत कलाओं को प्रदर्शित करने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान किया। देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में G20 बैठकों के आयोजन से भारत MICE (Meetings, Incentives, Conferences, and Exhibitions) पर्यटन के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। इसने साबित किया कि पर्यटन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक बेहतरीन पुल हो सकता है।

 मानव पूंजी का सशक्तिकरण और भविष्य की आकांक्षाएं

कोई भी यात्रा केवल स्थानों से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले लोगों के व्यवहार और उनकी सेवाओं से यादगार बनती है। गाइड, होटल स्टाफ, शिल्पकार और स्थानीय उद्यमी इस पूरे उद्योग की रीढ़ हैं। इसीलिए भारत की रणनीति में भौतिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ ‘मानव पूंजी’ (Human Capital) के विकास को भी समान महत्व दिया गया है।

1. घरेलू पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया आह्वान ने नागरिकों को घरेलू पर्यटन (Domestic Tourism) चुनने और स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे व्यवसायों का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया है। यह ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को पर्यटन के माध्यम से मजबूत करता है।

2. कौशल विकास और प्रशिक्षण

  • क्षमता निर्माण योजना (Capacity Building for Service Providers): साल 2014 से 2025 के बीच 4.5 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि सेवा के मानकों और रोजगार क्षमता को बढ़ाया जा सके।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 के नए प्रस्ताव: इस बजट में एक राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान (National Institute of Hospitality) की स्थापना और प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूरिस्ट गाइडों के कौशल विकास (Upskilling) का एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा गया है।

3. बदलाव की जमीनी हकीकत

पिछले दस वर्षों में विभिन्न बुनियादी ढांचा योजनाओं के माध्यम से 100 से अधिक गंतव्यों को अपग्रेड किया गया है। आने वाले समय में 50 प्रमुख गंतव्यों को विकसित करने का प्रस्ताव है, जो देश की पर्यटन तत्परता को एक नए स्तर पर ले जाएगा। उड़ान (UDAN) योजना के तहत नए हवाई मार्ग, आधुनिक हवाई अड्डे, अत्याधुनिक वंदे भारत ट्रेनें और सुदृढ़ ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम छोर तक संपर्क) आज यात्रा को सुगम बना रहे हैं।

इसके साथ ही, ‘इन्क्रेडिबल इंडिया’ (Incredible India – अतुल्य भारत) अभियान को नए सिरे से तैयार कर डिजिटल प्रचार, अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल मार्ट्स और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति को और मजबूत किया जा रहा है।

निष्कर्ष: एक नए अध्याय की शुरुआत

भारत की पर्यटन विकास यात्रा आज एक ऐसे मुकाम पर है जहाँ आर्थिक प्रगति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेश एक साथ मिलकर चल रहे हैं। विरासत को सहेजने से लेकर आधुनिकतम तकनीक को अपनाने तक, भारत दुनिया के पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा, सुरक्षित और इमर्सिव गंतव्य बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ‘विकसित भारत @ 2047’ के सपने को पूरा करने में पर्यटन की यह भूमिका आने वाले समय में और भी अधिक गौरवशाली होने वाली है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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