ज़ूनोटिक बीमारियों के ख़िलाफ़ भारत का महा युद्ध-अभ्यास

भारतीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) ने मध्य प्रदेश के विदिशा में पांच दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का तीसरा 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' (Pandemic/Zoonotic War Exercise) सफलतापूर्वक संपन्न किया। 'नेशनल वन हेल्थ मिशन' के तहत आयोजित इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य इंसानों, पशुओं और वन्यजीवों के बीच फैलने वाली 'ज़ूनोटिक' (पशुजन्य) बीमारियों के प्रकोप से निपटने के लिए देश की तैयारियों और आपसी तालमेल को परखना था।

Share This Article:

 विदिशा (मध्य प्रदेश): भारत ने भविष्य में आने वाली किसी भी संभावित महामारी या जैविक संकट से निपटने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के एक छोटे से गाँव ‘खारी’ से देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य तंत्र को मज़बूत करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अधीन पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) ने ‘नेशनल वन हेल्थ मिशन‘ के तहत राष्ट्रीय स्तर के तीसरे पशुजन्य युद्ध अभ्यास (PYA) का सफलतापूर्वक आयोजन किया है।

यह पांच दिवसीय मॉक ड्रिल 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य पशु स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी आपातकालीन स्थिति, विशेषकर ज़ूनोटिक रोगों (ऐसी बीमारियां जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं) के अचानक भड़कने पर देश की तैयारियों, विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता (Emergency Response Capacity) का बारीकी से परीक्षण करना और उसे मज़बूत बनाना था।

‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण: जब सब मिलकर लड़ेंगे, तभी देश बचेगा

अक्सर देखा गया है कि जब कोई बीमारी फैलती है, तो इंसानों के डॉक्टर अलग काम करते हैं, पशुओं के डॉक्टर अलग और जंगलों की देखरेख करने वाले वैज्ञानिक अलग। लेकिन यह नया अभ्यास ‘वन हेल्थ’ (One Health) यानी ‘एक स्वास्थ्य’ के दृष्टिकोण पर आधारित था। इस दृष्टिकोण का सीधा सा मतलब है कि इंसानों का स्वास्थ्य, पशुओं का स्वास्थ्य और हमारे पर्यावरण/वन्यजीवों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। यदि एक भी कली कमज़ोर होगी, तो पूरा चक्र टूट जाएगा।

इस अभ्यास में सिर्फ पशु चिकित्सक ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित क्षेत्रों से जुड़े सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:

  • पशु स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र
  • मानव स्वास्थ्य (इंसानों के डॉक्टर और विशेषज्ञ)
  • वन्यजीव एवं पर्यावरण विशेषज्ञ
  • खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety)
  • हाई-टेक लैबोरेट्रीज (प्रयोगशालाएं)
  • स्थानीय जिला प्रशासन

इस व्यापक भागीदारी का उद्देश्य यह देखना था कि यदि कल को कोई नई बीमारी देश में दस्तक देती है, तो शुरुआती अलर्ट मिलने से लेकर बीमारी को पूरी तरह काबू करने तक, हमारे अलग-अलग विभाग आपस में कितनी जल्दी और कितने बेहतर तरीके से संवाद (Communication) और समन्वय (Coordination) कर पाते हैं।

काल्पनिक संकट: जानवरों से इंसानों में फैला H1N1 वायरस

इस पांच दिवसीय मॉक ड्रिल को बिल्कुल असली जैसा बनाने के लिए वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने एक काल्पनिक स्थिति (Hypothetical Scenario) तैयार की। मान लिया गया कि क्षेत्र के जानवरों में अचानक इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) वायरस फैल गया है, और वह बहुत तेज़ी से इंसानों तथा आस-पास के जंगली जानवरों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।

इस काल्पनिक संकट के आधार पर पूरी प्रतिक्रिया श्रृंखला (Response Chain) का कड़ा इम्तिहान लिया गया, जिसमें नीचे दिए गए सभी चरणों को परखा गया:

  1. बीमारी की निगरानी और शुरुआती चेतावनी (Surveillance & Early Warning): बीमारी का पहला लक्षण दिखते ही सिस्टम ने कितनी जल्दी रिएक्ट किया।
  2. प्रकोप की जांच और फील्ड महामारी विज्ञान (Outbreak Investigation): ज़मीनी स्तर पर डॉक्टरों की टीम ने पहुँचकर बीमारी के फैलने के कारणों का कैसे पता लगाया।
  3. नमूना संग्रह और परिवहन (Sample Collection & Transport): संक्रमित जानवरों के ब्लड या अन्य सैंपल को पूरी सुरक्षा के साथ बिना वायरस लीक किए लैब तक कैसे पहुँचाया गया।
  4. प्रयोगशाला जांच और जोखिम आकलन (Lab Testing & Risk Assessment): लैब में कितनी जल्दी वायरस की पहचान हुई और वह इंसानों के लिए कितना ख़तरनाक है, इसका अंदाज़ा लगाना।
  5. घटना प्रबंधन और जैव सुरक्षा (Incident Management & Biosafety): प्रभावित इलाके को सील करना और वहां काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट व अन्य सुरक्षा गियर देना।
  6. रोकथाम के उपाय और आवाजाही नियंत्रण (Movement Control): बीमारी को दूसरे गांवों या शहरों में फैलने से रोकने के लिए पशुओं और लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना।
  7. जनसंचार प्रणाली (Mass Communication): आम जनता के बीच अफवाहों को रोकना और उन तक सही एवं सटीक जानकारी पहुँचाना ताकि डर का माहौल न बने।

देश के दिग्गज संस्थानों ने झोंकी ताकत

इस अभ्यास की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी और प्रशासनिक संस्थानों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) के सीधे मार्गदर्शन में चिकित्सा और पशु जगत के विशेषज्ञों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

अभ्यास में शामिल होने वाले मुख्य विभाग और संस्थान:

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
  • राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC)
  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
  • प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) कार्यालय
  • राष्ट्रीय BSL-3 (बायो-सेफ्टी लेवल 3) नेटवर्क की प्रयोगशालाएं
  • ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज़ (NIHSAD), भोपाल
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भोपाल
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
  • मध्य प्रदेश राज्य का पशुपालन, स्वास्थ्य, वन विभाग और जिला प्रशासन

इतिहास की सीख और वर्तमान ट्रेंड्स: क्यों ज़रूरी हैं ऐसे अभ्यास?

अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, तो दुनिया की 60% से ज़्यादा संक्रामक बीमारियां ज़ूनोटिक हैं, यानी वे जानवरों से ही इंसानों में आई हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ (Historical Context)

  • प्लेग (Plague): चूहों और उनके पिस्सू से फैली इस बीमारी ने मध्यकाल में करोड़ों लोगों की जान ले ली थी।
  • स्पैनिश फ्लू (1918): इसने पूरी दुनिया की एक बड़ी आबादी को खत्म कर दिया था, जिसका संबंध भी इन्फ्लूएंजा वायरस से था।
  • हालिया दौर के संकट: इबोला, सार्स (SARS), निपाह (Nipah) और हाल ही में पूरी दुनिया को थाम देने वाला कोविड-19 (COVID-19)—ये सभी इस बात के गवाह हैं कि जब भी कोई वायरस जानवरों से इंसानों में छलांग लगाता है, तो तबाही मच जाती है।

वर्तमान ट्रेंड्स और तुलनात्मक विश्लेषण (Current Trends & Comparative Analysis)

पुराने समय में बीमारियां धीरे-धीरे फैलती थीं क्योंकि लोगों का आना-जाना सीमित था। लेकिन आज के वैश्वीकरण (Globalization) के दौर में स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है:

विशेषतापुराना समय / पारंपरिक तरीकाआधुनिक दौर (Current Trend)
फैलने की गतिवायरस को एक देश से दूसरे देश जाने में महीनों लगते थे।हवाई यात्रा के कारण वायरस कुछ ही घंटों में दुनिया के कोने-कोने में पहुँच जाता है।
शहरीकरण का प्रभावजंगल और इंसानी बस्तियां दूर थीं।तेज़ी से कटते जंगलों और शहरीकरण के कारण इंसान और जंगली जानवर बहुत करीब आ गए हैं, जिससे वायरस ट्रांसमिशन का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
जलवायु परिवर्तनमौसम चक्र स्थिर था।ग्लोबल वार्मिंग के कारण कीड़े, मच्छर और चमगादड़ जैसे वायरस वाहक नए-नए इलाकों में फैल रहे हैं।
सरकारी तंत्र की एप्रोचबीमारी फैलने के बाद इलाज ढूँढा जाता था (Reactive Approach)।अब बीमारी फैलने से पहले ही मॉक ड्रिल करके तैयारी रखी जाती है (Proactive Approach)।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि जूनोटिक खतरों को समय रहते पहचानने, उनकी रोकथाम करने और बिना समय गंवाए तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए ऐसे नियमित अभ्यास बेहद आवश्यक हैं। यह मॉक ड्रिल ‘वन हेल्थ’ को कागज़ से निकालकर ज़मीन पर उतारने का सबसे बेहतरीन जरिया है।

समीक्षा बैठक: कमियों को सुधारकर भविष्य की रणनीति होगी मज़बूत

अभ्यास के आखिरी दिन, यानी 3 जुलाई को डीएएचडी के पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक (Review Meeting) हुई। इसमें एनसीडीसी के निदेशक, मध्य प्रदेश के पशुपालन निदेशक के साथ-साथ बैक-एंड, फ्रंट-एंड और ऑब्जर्वर (निरीक्षक) टीमों ने हिस्सा लिया।

इस बैठक में किसी भी औपचारिकता के बिना, अभ्यास के दौरान सामने आईं छोटी-मोटी कमियों और व्यावहारिक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की गई। आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल (Emergency Response Protocols) को और अधिक सख्त बनाने, अलग-अलग विभागों के बीच व्हाट्सएप, वायरलेस या आधिकारिक चैनलों के जरिए संचार व्यवस्था को और तेज़ करने तथा फील्ड स्टाफ की ट्रेनिंग (क्षमता निर्माण) को बढ़ाने पर एक ठोस रोडमैप तैयार किया गया।

मंत्रालय ने इस अभ्यास को पूरी तरह सफल घोषित करते हुए कहा कि विदिशा से मिले अनुभव भविष्य में नई और दोबारा उभरने वाली संक्रामक बीमारियों के खिलाफ भारत के कवच को और मज़बूत करेंगे। भारत सरकार अब एक ऐसा मज़बूत और आधुनिक पशु चिकित्सा तंत्र (Veterinary System) विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो किसी भी जैविक खतरे को इंसानों तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में रोक सके।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.