रूस की वैक्सीन ‘एंटरोमिक्स’ कैंसर में कितनी असरदार?

एंटरोमिक्स एक प्रायोगिक mRNA तकनीक पर आधारित वैक्सीन है, जो खासतौर पर कैंसर के मरीजों के लिए तैयार की गई है।

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नई दिल्ली: कैंसर आज की दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक बन चुका है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। अब तक कैंसर (Cancer) के इलाज के लिए कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी जैसे पारंपरिक उपचार ही उपलब्ध थे, जो अक्सर शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक लगातार कैंसर के लिए नए और प्रभावी उपचार विकसित करने में लगे हैं। इसी कड़ी में रूस की फेडरल मेडिकल बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) ने एक नई mRNA आधारित कैंसर वैक्सीन ‘एंटरोमिक्स’ विकसित की है, जो शुरुआती परीक्षणों में काफी सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। आइए जानते हैं कि यह वैक्सीन क्या है, कैसे काम करती है, और यह कैंसर के इलाज में कितनी मददगार साबित हो सकती है।

एंटरोमिक्स वैक्सीन क्या है?

एंटरोमिक्स एक प्रायोगिक mRNA तकनीक पर आधारित वैक्सीन है, जो खासतौर पर कैंसर के मरीजों के लिए तैयार की गई है। mRNA (मैसेंजर RNA) तकनीक वह ही है जिसका उपयोग कोविड-19 के टीकों (जैसे फाइजर और मॉडर्ना) में भी हुआ था। इस तकनीक का फायदा यह होता है कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को किसी विशेष लक्ष्य (यहां कैंसर कोशिकाएं) के खिलाफ मजबूत करने में सक्षम होती है। एंटरोमिक्स में चार तरह के हानिरहित वायरस शामिल हैं, जिन्हें जेनेटिक रूप से पुनः डिज़ाइन किया गया है ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को उन पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित करें। इस प्रक्रिया में वैक्सीन सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं होता।

शुरुआती परीक्षणों में वैक्सीन का प्रदर्शन

रूस के अधिकारियों ने बताया कि प्रीक्लिनिकल परीक्षणों (जो जानवरों पर किए जाते हैं) में एंटरोमिक्स ने ट्यूमर के आकार को 60-80% तक कम करने में सफलता दिखाई है। इसके बाद, मानव परीक्षण के पहले चरण (Phase 1 Clinical Trial) में 48 मरीजों पर वैक्सीन का परीक्षण हुआ, जिसमें यह दिखाया गया कि वैक्सीन सुरक्षित है और इसे मरीजों ने अच्छी तरह सहन किया। इस चरण में मरीजों में कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए, और वैक्सीन ने 100% सुरक्षा और प्रभावशीलता दिखाई। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि Phase 1 परीक्षण मुख्य रूप से सुरक्षा जांच के लिए होता है, न कि पूरी तरह प्रभाव की पुष्टि के लिए। इसलिए इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

यह वैक्सीन किन प्रकार के कैंसर के लिए है?

इस वैक्सीन का प्राथमिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (आंत से जुड़ा कैंसर) है, जो दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे ऊपर आता है। इसके अलावा रूस के वैज्ञानिक ग्लियोब्लास्टोमा और मेलेनोमा के इलाज के लिए भी इस वैक्सीन को विकसित कर रहे हैं।

  • ग्लियोब्लास्टोमा: यह दिमाग का एक बेहद खतरनाक ट्यूमर है, जो तेज़ी से बढ़ता है और ब्लड-ब्रेन बैरियर की वजह से इसका इलाज करना बहुत मुश्किल होता है।
  • मेलेनोमा: त्वचा का कैंसर और आंख की झिल्ली का कैंसर, जो तेजी से फैलता है और जानलेवा हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय और सावधानियां

रूसी अधिकारियों ने वैक्सीन को 100% प्रभावी बताया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस दावे को लेकर काफी सतर्क हैं। कैंसर एक जटिल बीमारी है, जिसमें अलग-अलग मरीजों और कैंसर के प्रकारों पर दवा का असर अलग-अलग हो सकता है। पहले चरण के परीक्षण में मरीजों की संख्या बहुत कम होती है, इसलिए बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल करना जरूरी होता है ताकि वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा को पूरी तरह समझा जा सके। दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल के बिना इस वैक्सीन को अंतिम उपचार नहीं माना जा सकता।

भविष्य की संभावनाएं और उम्मीदें

यदि एंटरोमिक्स वैक्सीन अगले क्लिनिकल ट्रायल में भी सफलता हासिल करती है, तो यह कैंसर के इलाज की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। वर्तमान में कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी विधियां जहां कई बार स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, वहीं यह वैक्सीन सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती है। इससे न केवल मरीजों को सुरक्षित उपचार मिलेगा, बल्कि उनकी जीवन प्रत्याशा और जीवन की गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकेंगी। रूस की यह खोज चिकित्सा जगत के लिए एक नई उम्मीद की किरण है, जो आने वाले वर्षों में लाखों कैंसर रोगियों के लिए जीवनदान साबित हो सकती है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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