नई दिल्ली वर्तमान युग इंटरनेट का है, जहां पढ़ाई, नौकरी, मनोरंजन और बैंकिंग तक सब कुछ ऑनलाइन हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जहां इंटरनेट लगभग गैर-मौजूद है? यह देश है Eritrea, जहां 99% आबादी ने कभी इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं किया। यहां न तो सोशल मीडिया जैसे फेसबुक या इंस्टाग्राम हैं और न ही ATM जैसी बुनियादी सुविधाएं आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं। आइए जानते हैं कि इरिट्रिया डिजिटल दुनिया से इतना दूर क्यों है।
इरिट्रिया का परिचय
इरिट्रिया, अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में बसा एक छोटा सा देश है, जिसके पड़ोसी इथियोपिया, सूडान और जिबूती हैं। इसकी राजधानी अस्मारा, लाल सागर के किनारे स्थित है। जहां दुनिया के अधिकांश देश डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं इरिट्रिया में मोबाइल डेटा या ब्रॉडबैंड की सुविधा तक नहीं है।
इंटरनेट की स्थिति
रिपोर्ट्स बताती हैं कि इरिट्रिया की केवल 1% जनसंख्या को ही इंटरनेट का सीमित अनुभव है। कुछ इंटरनेट कैफे बड़े शहरों में मौजूद हैं, लेकिन उनकी स्पीड इतनी धीमी है कि 2G भी फेल हो जाए। इन कैफे में एक घंटे के इंटरनेट का खर्च लगभग 100 इरिट्रियन नाक्फा (लगभग ₹100) है, जो आम लोगों की पहुंच से बाहर है।
इंटरनेट की अनुपस्थिति के कारण
इरिट्रिया की तानाशाही सरकार को “अफ्रीका का नॉर्थ कोरिया” कहा जाता है। यहां सख्त नियमों और अनिवार्य सैन्य सेवा के चलते नागरिकों की स्वतंत्रता सीमित है। सरकार का मानना है कि इंटरनेट राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक नियंत्रण के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए टेलीकॉम ढांचे को जानबूझकर कमजोर रखा गया है। इसके अलावा, देश की कमजोर अर्थव्यवस्था भी एक बड़ी वजह है। इंटरनेट कैफे का खर्च इतना ज्यादा है कि केवल उच्च वर्ग ही इसे वहन कर सकता है।
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लोगों पर प्रभाव
इंटरनेट की कमी का असर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास पर पड़ता है। जहां दुनिया डिजिटल प्रगति की राह पर है, वहां इरिट्रिया की जनता सूचना और अवसरों से वंचित है। यह स्थिति अन्य विकासशील देशों के लिए भी सबक है, जहां इंटरनेट की पहुंच तो है, लेकिन महंगे डेटा और कमजोर नेटवर्क की समस्याएं बनी रहती हैं।



