नई दिल्ली: चावल दुनिया की आधी से अधिक आबादी का मुख्य भोजन है। भारत में यह किसानों की कमाई का जरिया भी है।कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार 2025 में देश का चावल उत्पादन 149 मिलियन मीट्रिक टन होगा। एक दूसरे आंकड़े के अनुसार, मिलिंग प्रक्रिया के दौरान 50 से 60 लाख मीट्रिक टन चावल टूट जाता है, जिससे किसान और व्यापारियों को हर साल नुकसान होता है। चीन की इस तकनीक के ज़रिये अगर भारत चावल टूटने की समस्या से निजात पा लेता है, तो किसानों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
कैसे होती है चावल में टूटन और चीन ने क्या निकाला तरीका
चावल को प्रोसेस करने में कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें धान की सफाई, भूसी निकालना, और मिलिंग शामिल है।
- धान की सफाई: सबसे पहले, धान को भूसी, धूल और अन्य अशुद्धियों से साफ किया जाता है।
- भूसी निकालना: इसके बाद धान को भूसी से अलग करने के लिए एक मशीन जैसे कि शेलर मशीन का उपयोग किया जाता है।
- चावल की मिलिंग: भूसी निकालने के बाद, भूरे चावल को मिलिंग मशीन में डाला जाता है। मिलिंग मशीन में चावल को घर्षण के माध्यम से पॉलिश किया जाता है, जिससे भूसी और चोकर की परतें हट जाती हैं।
लेकिन इसी दौरान कई चावल टूट जाते हैं। यह टूट-फूट तब अधिक होती है जब चावल में “चॉकिनेस” (chalkiness) नामक गुण पाया जाता है। यदि मिलिंग प्रोसेस के बाद बड़ी संख्या में चावल के दाने अपारदर्शी (opaque) दिखते हैं, तो उन्हें चॉकी कहा जाता है। (हालांकि पकाने पर यह अंतर गायब हो जाता है।)
चावल में चॉकीनेस को मापने के लिए वैज्ञानिक “चॉकी ग्रेन रेट” देखते हैं। यानी सभी चावल दानों में कितने प्रतिशत अपारदर्शी हैं। संक्षेप में कहें तो जितनी अधिक चॉकीनेस होगी, उतना अधिक टूटने की संभावना होगी।

चॉकीनेस कम करने के लिए चीन के वैज्ञानिकों ने खोजा नया जीन
चॉकीनेस कम करने के लिए वैज्ञानिक लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। हाल ही में यांगझोउ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने Chalk9 नामक जीन खोजा है। यह जीन विभिन्न चावल की किस्मों में चॉकीनेस को नियंत्रित करता है। शोधकर्ताओं ने 175 चावल किस्मों का जीनोम अनुक्रमण किया और पाया कि क्रोमोसोम 9 पर एक छोटा DNA खंड चॉकीनेस से जुड़ा है। जिन किस्मों में चॉकीनेस कम थी उनमें Chalk9 जीन की मात्रा अधिक थी।
यह प्रक्रिया कैसे काम करती है
Chalk 9 जीन एक प्रोटीन बनाता है, जो OsEBP89 नामक दूसरे प्रोटीन से जुड़ जाता है और उसे नष्ट कर देता है। OsEBP89 चावल के दाने में दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है:
- Wx जीन – जो एमायलोज़ नामक स्टार्च बनाता है।
- SSP जीन – जो संग्रहण प्रोटीन (storage proteins) बनाता है।
यदि OsEBP89 सक्रिय नहीं होता, तो चावल के दानों में कम स्टार्च और अधिक चॉकीनेस होती है।
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वैज्ञानिकों ने निकाला निष्कर्ष
वैज्ञानिकों ने 127 चावल किस्मों का अध्ययन किया और पाया कि Chalk9-L नामक लो-चॉकीनेस जीन 1990 से पहले बहुत कम पाया जाता था। लेकिन 1990 के बाद इसकी मात्रा तेजी से बढ़ी। अब वैज्ञानिक कहते हैं कि Chalk9-L जीन को चुनकर चावल की नई किस्में विकसित की जा सकती हैं जिनमें दाने कम टूटेंगे और गुणवत्ता बेहतर होगी।
स्रोत-
- द हिन्दू,
- Sciencedirect.com
- NIH.Gov
- PIB.gov




