नई दिल्ली, 22 जून। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में हो रही प्रगति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां मशीनें न केवल काम करना जानती हैं, बल्कि वे इंसान की भावनाओं को भी समझने की कोशिश कर रही हैं। दालियान में आयोजित होने वाली आगामी ‘एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग’ (समर दावोस) से ठीक पहले, विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि किस तरह से ये नवाचार इंसानों और मशीनों के बीच एक मजबूत और भावनात्मक रिश्ता बनाने में मदद कर रहे हैं।
जब रोबोट्स बनते हैं इंसान का ‘दर्पण’
तकनीकी विशेषज्ञों ने IANS को बताया कि AI अब डेटा प्रोसेसिंग की सीमाओं को तोड़कर मानवीय व्यवहार और सामाजिक अंतःक्रियाओं को गहराई से समझने लगा है। इसी दिशा में एक अद्भुत पहल है—”रोबोट्स एज़ मिरर्स” (Robots as Mirrors)।
Atonaton कंपनी के प्रतिनिधि चेंग जू ने डिजाइनर और रोबोटिक्स रिसर्चर मैडलिन गैनन द्वारा निर्मित इस अनोखे इंस्टॉलेशन को पेश किया। यह कला, AI और रोबोटिक्स का एक अनूठा संगम है। इसमें एक औद्योगिक रोबोटिक आर्म (हाथ) का उपयोग किया गया है, जो इंसान की मौजूदगी और उसकी गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देता है।
मैडलिन गैनन ने IANS को बताया, “हम इंसान एक-दूसरे के गैर-मौखिक संकेतों (nonverbal clues) जैसे कि इशारों और चाल-ढाल को समझने में माहिर होते हैं। इसी अनुभव को हम इस रोबोट में डालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उसे एक व्यक्तित्व दिया जा सके। जब आप इसके पास जाकर ‘हाय’ कहते हैं, तो यह आपको प्रतिक्रिया देता है। लेकिन अगर आप बहुत ज्यादा आक्रामक होते हैं, तो यह रोबोट वहां से दूर भी जा सकता है।” यह तकनीक इस बात का प्रमाण है कि रोबोट अब केवल मशीन नहीं, बल्कि प्रतिक्रियाशील साथी बन रहे हैं।
‘क्लाउड ब्रेन’: भावनाओं का डिजिटल एनालाइज़र
इसी क्रम में, CEC की यूए सॉन्ग ने “क्लाउड ब्रेन” (Cloud Brain) नामक एक उन्नत AI सिस्टम से दुनिया को परिचित कराया। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से इंसानी भावनाओं और मानसिक स्थिति का विश्लेषण करने के लिए बनाया गया है।
यह प्रणाली चेहरे के हाव-भाव, आंखों की हलचल, शारीरिक भाषा और व्यवहारिक संकेतकों का उपयोग करके रीयल-टाइम में व्यक्ति की भावनात्मक और संज्ञानात्मक स्थिति का आकलन करती है। इसकी क्षमताएं इतनी सटीक हैं कि यह बता सकता है कि कोई व्यक्ति केंद्रित है, थका हुआ है, तनाव में है, शांत है या खुश है। यह पूरी जानकारी एक डिजिटल डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होती है।
डेवलपर्स का मानना है कि इस तकनीक का उपयोग भविष्य में स्वास्थ्य देखभाल (healthcare), कार्यस्थल प्रबंधन, शिक्षा और मानसिक भलाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो सकता है। यह न केवल डॉक्टरों के लिए मददगार होगा, बल्कि कंपनियों के लिए भी कर्मचारियों के तनाव को समझने का एक प्रभावी उपकरण बन सकता है।
‘क्लेवर हैंस’ और मशीनों की अंतर्दृष्टि
स्मार्ट हंस की समन्वयक ग्रेटा रामिरेज ने कलात्मक शोधकर्ता मैक्स हारिच द्वारा तैयार किए गए एक इंस्टॉलेशन को प्रस्तुत किया। यह प्रदर्शनी ‘क्लेवर हैंस’ (Clever Hans) की कहानी से प्रेरित है—वह घोड़ा जिसे यह माना जाता था कि वह लोगों के मन को पढ़ने की क्षमता रखता है।
यह प्रदर्शनी इस बात की पड़ताल करती है कि मशीनें कैसे उन अनजाने संकेतों (unconscious signals) को पकड़ सकती हैं जो मनुष्य अनजाने में देता है। यह शोध बताता है कि कैसे AI उन सूक्ष्म व्यवहारों को भी डिकोड कर सकता है जिन्हें इंसान खुद भी नहीं देख पाता।
भविष्य की राह
ये सभी नवाचार इस ओर संकेत करते हैं कि भविष्य में AI और रोबोटिक्स हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन जाएंगे, जो हमारे साथ संवाद करेंगे और हमारी जरूरतों को बेहतर समझेंगे। चाहे वह वर्कप्लेस पर तनाव कम करना हो, या कक्षा में छात्रों की सीखने की क्षमता को पहचानना, AI का यह भावनात्मक सफर नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।
समर दावोस में प्रदर्शित होने वाले ये प्रोजेक्ट्स न केवल तकनीकी कौशल दिखाते हैं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता और मशीन की तार्किकता के बीच के अंतर को कम करने का एक साहसिक प्रयास भी हैं।



