नई दिल्ली: नई दिल्ली से एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय कृषि निर्यात का परिदृश्य अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गया है; यह अब तकनीक, स्टार्टअप्स और नवाचार की नई ऊंचाई छू रहा है। ‘BHARATI’ (भारत का एग्रीटेक, लचीलापन, उन्नति और निर्यात नवाचार के लिए इनक्यूबेशन हब) का पहला सफल चरण इस दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कार्यक्रम उन स्टार्टअप्स को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है जो भारत की कृषि क्षमता को वैश्विक बाजारों में एक नई पहचान दिला सकते हैं।
BHARATI कार्यक्रम का लक्ष्य
BHARATI का उद्देश्य केवल स्टार्टअप्स को सहायता देना नहीं है, बल्कि एक ऐसा गतिशील इकोसिस्टम बनाना है जो भारत के कृषि-खाद्य निर्यात में नवाचार-आधारित विकास को प्रेरित करे। 2030 तक 50 बिलियन अमरीकी डालर के निर्यात लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, यह पहल निम्नलिखित स्तंभों पर टिकी है:
- उच्च-मूल्य वाले उत्पाद: जीआई (GI) टैग वाले उत्पादों, जैविक खाद्य पदार्थों और ‘सुपरफूड्स’ को बढ़ावा देना।
- तकनीकी हस्तक्षेप: ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेसबिलिटी, एआई-आधारित गुणवत्ता नियंत्रण और आईओटी (IoT) आधारित कोल्ड चेन जैसे समाधानों को अपनाना।
- नियामक तैयारी: स्वच्छता और पादप स्वच्छता (SPS) से संबंधित बाधाओं को दूर करना ताकि वैश्विक मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
पहले चरण की सफलता और स्टार्टअप्स की भूमिका
पहले चरण में 22 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों से 100 स्टार्टअप्स का चयन किया गया था। इनमें से 68 उत्पाद-आधारित, 26 तकनीकी-सेवा प्रदाता और 6 SPS मानकों के विशेषज्ञ स्टार्टअप्स शामिल थे। इन स्टार्टअप्स ने न केवल 120 घंटे का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया, बल्कि दुबई में ‘Gulfood 2026’ जैसे वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ 100 से अधिक B2B बैठकें भी कीं।
इसके शानदार परिणाम भी सामने आए हैं:
- सफलता की कहानियां: बिहार के जर्दालू आमों का दुबई निर्यात हो या न्यूजीलैंड के लिए बाजरा-आधारित उत्पादों की पहली समुद्री खेप; इन स्टार्टअप्स ने साबित कर दिया है कि भारतीय नवाचार वैश्विक मानकों पर खरे उतर रहे हैं।
- वैश्विक बाजार: यूएई, अमेरिका, यूके और यूरोपीय संघ जैसे बाजारों में भारतीय जैविक उत्पादों और मूल्य वर्धित खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
ऐतिहासिक संदर्भ और तुलनात्मक विश्लेषण
भारत का कृषि निर्यात इतिहास स्वतंत्रता के बाद के ‘भोजन की कमी’ वाले दिनों से आज की ‘खाद्य अधिशेष’ (food surplus) वाली स्थिति तक का एक प्रेरणादायक सफर है।
1. ऐतिहासिक यात्रा:
- प्री-ग्रीन रिवोल्यूशन (1950-1967): भारत खाद्यान्न के लिए विदेशी सहायता पर निर्भर था।
- हरित क्रांति (1960 के दशक के अंत): उन्नत बीजों और बेहतर तकनीक ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया।
- आर्थिक सुधार (1990 के दशक के बाद): कृषि का व्यवसायीकरण हुआ और भारत वैश्विक निर्यात में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरा।
2. वर्तमान रुझान बनाम अतीत: आज का रुझान केवल मात्रा बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ‘गुणवत्ता’ और ‘मूल्य संवर्धन’ (value addition) पर है। 2012-13 में कृषि निर्यात का कुल निर्यात में जो हिस्सा था, वह आज एक नई ऊंचाई पर है। 2024-25 में कृषि निर्यात 53.24 बिलियन अमरीकी डालर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो हमारी उत्पादकता और वैश्विक बाजार में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
भविष्य की राह
BHARATI का पहला सफल चरण इस बात का संकेत है कि भारत अब तकनीक के जरिए कृषि निर्यात को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। APEDA जल्द ही इस कार्यक्रम का अगला संस्करण लॉन्च करेगा, जो न केवल स्टार्टअप्स को बल्कि पूरे कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला (value chain) को अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाएगा।



