335 एकड़ जमीन, 245 प्लॉट और मास्टर प्लान का विवाद: आखिर सीएम मोहन यादव पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

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भोपाल/उज्जैन: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इन दिनों एक बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। उज्जैन में उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन होने के दावों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इसे संभावित “भूमि घोटाला” बता रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक साजिश करार दे रही है। मामला इतना बढ़ गया है कि इसमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर की भी एंट्री हो चुकी है।

क्या है CM मोहन यादव का पूरा मामला?

दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के पास उज्जैन क्षेत्र में करीब 335 एकड़ जमीन है। रिपोर्ट के अनुसार यह जमीन लगभग 245 अलग-अलग प्लॉटों में फैली हुई है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि इनमें से करीब 168 एकड़ जमीन मुख्यमंत्री बनने के बाद दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच खरीदी गई। आरोप है कि इन जमीनों का बड़ा हिस्सा ऐसे इलाकों में स्थित है जहां भविष्य में सड़क परियोजनाएं, शहरी विकास योजनाएं और उज्जैन मास्टर प्लान-2035 के तहत बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।

मास्टर प्लान को लेकर विवाद क्यों?

विवाद की असली वजह जमीन की लोकेशन और उसके संभावित व्यावसायिक लाभ को माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जमीनें ऐसे क्षेत्रों में हैं जिन्हें बाद में मास्टर प्लान के तहत रिहायशी या कमर्शियल जोन में शामिल किया गया। इनमें उज्जैन के पंड्याखेड़ी क्षेत्र की लगभग 18 एकड़ जमीन का भी जिक्र किया गया है।

विपक्ष का आरोप है कि यदि किसी कृषि भूमि का लैंड यूज बदलकर कमर्शियल या रिहायशी कर दिया जाए या उसके आसपास बड़ी सरकारी परियोजनाएं शुरू हो जाएं, तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। इसी आधार पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या भविष्य की विकास योजनाओं की जानकारी का फायदा उठाकर जमीन खरीदी गई थी?

हालांकि अब तक किसी सरकारी एजेंसी या जांच संस्था ने यह नहीं कहा है कि जमीन खरीद में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है।

कांग्रेस ने CM मोहन यादव पर क्या आरोप लगाए?

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले को “महाकाल की नगरी की जमीन का सबसे बड़ा मामला” बताते हुए मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें हैं:

  • मुख्यमंत्री जमीन खरीद की पूरी जानकारी सार्वजनिक करें।
  • मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच हो।
  • यह पता लगाया जाए कि क्या सरकारी नीतियों या मास्टर प्लान का फायदा निजी जमीनों को पहुंचा।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी मामले को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है।

भाजपा और परिवार का क्या कहना है?

भाजपा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

पार्टी का कहना है कि:

  • मोहन यादव का परिवार वर्षों से रियल एस्टेट और जमीन कारोबार से जुड़ा हुआ है।
  • सभी जमीनें कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी गई हैं।
  • किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
  • विपक्ष बिना किसी ठोस सबूत के राजनीतिक हमला कर रहा है।

मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों ने भी कहा है कि जमीन खरीद पूरी तरह वैध है और इसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

भाजपा ने इसे ओबीसी राजनीति से भी जोड़ा

भाजपा के कुछ नेताओं का दावा है कि मोहन यादव एक प्रमुख ओबीसी चेहरा हैं और उनकी बढ़ती लोकप्रियता से विपक्ष परेशान है। पार्टी का कहना है कि उनकी छवि खराब करने के लिए यह पूरा अभियान चलाया जा रहा है।

भाजपा नेताओं ने यह भी कहा है कि यदि किसी के पास कोई सबूत है तो वह जांच एजेंसियों के सामने पेश किया जाए, केवल आरोपों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अखिलेश यादव की एंट्री से बदला राजनीतिक समीकरण

इस विवाद में दिलचस्प मोड़ तब आया जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस से अलग रुख अपनाया।

अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह मामला भाजपा की आंतरिक राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। उनके अनुसार भाजपा के भीतर कई राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता संघर्ष की चर्चाएं चल रही हैं, इसलिए यह विवाद किसी बड़े राजनीतिक खेल का हिस्सा भी हो सकता है।

हालांकि उन्होंने जमीन खरीद को लेकर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि भाजपा के अंदर चल रही राजनीति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ओम प्रकाश राजभर का पलटवार

अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

राजभर ने कहा कि:

  • अखिलेश यादव हर मुद्दे में साजिश तलाशते हैं।
  • उन्हें भाजपा की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।
  • बिना जांच और सबूत के किसी मुख्यमंत्री पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
  • राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

उज्जैन में जमीन इतनी महत्वपूर्ण क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार उज्जैन इस समय मध्य प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है।

महाकाल लोक परियोजना, नई सड़कें, पर्यटन विस्तार, औद्योगिक निवेश और मास्टर प्लान-2035 जैसी योजनाओं के चलते यहां जमीनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

इसी वजह से जब मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी बड़ी भूमि खरीद की जानकारी सामने आई तो राजनीतिक सवाल उठने लगे कि क्या भविष्य के विकास से इन जमीनों को लाभ मिलने वाला है।

यही कारण है कि यह विवाद केवल जमीन खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) की बहस तक पहुंच गया है।

फिलहाल स्थिति क्या है?

  • कांग्रेस जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है।
  • भाजपा आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रही है।
  • मुख्यमंत्री का परिवार सभी खरीद को कानूनी और वैध बता रहा है।
  • अभी तक किसी जांच एजेंसी ने कोई अनियमितता साबित नहीं की है।
  • मामले में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।

निष्कर्ष

मोहन यादव से जुड़े इस भूमि विवाद में फिलहाल आरोप और जवाब दोनों मौजूद हैं, लेकिन अभी तक किसी भी सरकारी जांच एजेंसी ने किसी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जांच और तथ्यों के स्तर पर कहां पहुंचता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।

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Nisha Soni

nishasoninewgindia@gmail.com

निशा सोनी NewG India Media Group से जुड़ी एक पत्रकार हैं और उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में डिजिटल और ग्राउंड लेवल जर्नलिज़्म का 3 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास मीडिया में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। निशा सोनी को न्यूज़ राइटिंग, रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज़्म का व्यापक अनुभव है। उनकी संचार शैली स्पष्ट, तथ्यपरक और प्रभावशाली मानी जाती है, जिससे वे जमीनी मुद्दों को सटीक रूप से पाठकों तक पहुँचाती हैं।

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