भारत के कृषि भविष्य का सशक्तिकरण: परभणी के नए इनक्यूबेशन सेंटर का विजन

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने परभणी के वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (VNMKV) में एक अत्याधुनिक 'कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर' (CIC) का उद्घाटन किया। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खाद्य प्रसंस्करण, उद्यमिता और 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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परभणी, महाराष्ट्र — 28 जून 2026 को महाराष्ट्र में कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने परभणी स्थित वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (VNMKV) के खाद्य प्रौद्योगिकी कॉलेज में एक आधुनिक ‘कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर’ (CIC) का औपचारिक उद्घाटन किया। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI), भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी के सहयोग से स्थापित यह केंद्र स्थानीय किसानों और युवा उद्यमियों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा, जो कच्चे माल को उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में बदलने में मदद करेगा।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: वसंतराव नाईक के विजन से आधुनिक नवाचार तक

इस आयोजन के महत्व को समझने के लिए हमें इस संस्थान की जड़ों को देखना होगा। वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ का नाम महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक के नाम पर रखा गया है, जो भारतीय कृषि के क्षेत्र में एक महान व्यक्तित्व थे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक को ‘महाराष्ट्र में हरित क्रांति का जनक’ माना जाता है। 1960 के दशक में, जब भारत भीषण सूखे और खाद्य संकट से जूझ रहा था, तब नाईक जी ने कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने ही कृषि विद्यापीठों की नींव रखी ताकि किसानों को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान का लाभ मिल सके। आज, उसी विद्यापीठ में ‘कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर’ का खुलना, उनके द्वारा शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर’ भारत के सपने का एक आधुनिक विस्तार है।

तुलनात्मक विश्लेषण: पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम

ऐतिहासिक रूप से, भारतीय घर मूल रूप से “खाद्य प्रसंस्करण” (food processing) के केंद्र रहे हैं। चाहे वह दही जमाना हो, पापड़ बनाना हो या अचार डालना, हमारे पूर्वज संरक्षण (preservation) के मूल्य को समझते थे। हालाँकि, आज की चुनौती ‘स्केल’ (बड़े पैमाने पर उत्पादन) और ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धा’ की है।

  • तब: प्रसंस्करण केवल घरेलू खपत या स्थानीय बाजारों तक सीमित था, जो अक्सर भंडारण और तकनीक की कमी के कारण बाधित होता था।
  • अब (वर्तमान रुझान): ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत, अब ध्यान PMFME (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) जैसी योजनाओं पर है। महाराष्ट्र ने इस दिशा में पूरे देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है, जो यह साबित करता है कि जब सरकारी सहायता आधुनिक विज्ञान से मिलती है, तो किसान कच्चे माल को बेचने के बजाय प्रीमियम, ब्रांडेड और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों को बेच सकते हैं।

मंत्री चिराग पासवान का आह्वान: विकसित भारत की ओर कदम

विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह हॉल में आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान, केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:

  1. नौकरी चाहने वालों से नौकरी देने वाले बनें: मंत्री ने युवाओं से औद्योगिक क्षेत्र की ताकत का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “नौकरी मत ढूंढिए; नौकरी पैदा करने वाले बनिए।”
  2. खाद्य बर्बादी को रोकना: उन्होंने कहा कि खाद्य बर्बादी एक “गंभीर समस्या” है। परभणी में बना यह CIC इसका सबसे प्रभावी समाधान है, जहाँ तकनीक के माध्यम से भंडारण और मूल्य संवर्धन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे किसानों को अपना उत्पादन कम दाम पर नहीं बेचना पड़ेगा।
  3. “मेड इन इंडिया” की गुणवत्ता: मंत्री ने स्पष्ट कहा कि गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि अल्पकालिक लाभ के लिए गुणवत्ता से समझौता करने से वर्षों की मेहनत बर्बाद हो सकती है। “मेड इन इंडिया” का लेबल उत्कृष्टता के सभी मानकों को पूरा करना चाहिए।
  4. जैविक खेती को बढ़ावा: ‘खेत बचाओ अभियान’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें रासायनिक खादों का उपयोग कम करना चाहिए और जैविक खेती अपनानी चाहिए ताकि भारतीय कृषि उत्पाद दुनिया के ‘फूड बैंक’ बन सकें।

सहयोग की शक्ति

यह कार्यक्रम शासन के विभिन्न स्तरों के समन्वय का प्रमाण था। राज्य मंत्री श्रीमती मेघना ताई बोरदीकर, कुलपति प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि परभणी का विकास और किसानों का सशक्तिकरण एक सामूहिक मिशन है।

यह केंद्र एक सेतु (bridge) के रूप में कार्य करेगा। यह VNMKV के अनुसंधान को स्थानीय किसानों के खेतों और स्थानीय उद्यमियों की आकांक्षाओं से जोड़ेगा। प्रसंस्करण की सुविधा प्रदान करके, यह केंद्र यह सुनिश्चित करेगा कि कृषि उत्पादों से बनने वाला मूल्य स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही बना रहे।

निष्कर्ष: एक विरासत को आगे ले जाना

जैसा कि श्री चिराग पासवान ने कहा, इस विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार में अमूल्य योगदान दिया है। यह नया ‘कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर’ केवल एक इमारत नहीं है; यह एक वादा है—कि भारतीय किसान की कड़ी मेहनत का उन्हें उचित फल मिलेगा, भारतीय युवाओं की प्रतिभा का सही उपयोग होगा, और भारत के कृषि उत्पाद दुनिया भर की मेजों पर गर्व के साथ रखे जाएंगे।

वसंतराव नाईक की दूरदर्शी सोच से शुरू हुई यह यात्रा अब एक नई, उच्च-तकनीकी गति पा चुकी है। जैसा कि हम आगे बढ़ रहे हैं, लक्ष्य स्पष्ट है: प्रसंस्करण करें, मूल्य जोड़ें, गुणवत्ता बनाए रखें और एक ‘आत्मनिर्भर’ भविष्य का निर्माण करें।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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