नई दिल्ली: बॉलीवुड में कई कहानियां ऐसी हैं, जो सिर्फ टैलेंट और मेहनत की नहीं, बल्कि अंधविश्वास और किस्मत की भी बात करती हैं। ऐसी ही एक कहानी है रितु चौधरी की, जिन्हें दुनिया आज महिमा चौधरी के नाम से जानती है। 1997 में सुभाष घई की फिल्म परदेस से उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा और अपनी मासूमियत और दमदार एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया। इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू अवार्ड भी दिलाया। लेकिन कम लोग जानते हैं कि इस शोहरत के पीछे एक अंधविश्वास की कहानी छिपी थी, जिसने उनका नाम बदल दिया।
नाम बदलने की अनोखी वजह
रितु चौधरी का असली नाम उनके परिवार और दोस्तों के लिए हमेशा खास रहा। लेकिन जब सुभाष घई ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म परदेस के लिए नई हीरोइन की तलाश शुरू की, तो उनकी नजर एक पार्टी में रितु पर पड़ी। सैकड़ों ऑडिशन के बाद भी सुभाष को कोई परफेक्ट चेहरा नहीं मिला था, लेकिन रितु की सादगी ने उन्हें तुरंत प्रभावित किया। उन्होंने उसी मुलाकात में रितु को फिल्म ऑफर कर दी, मगर एक शर्त रखी उन्हें अपना नाम बदलना होगा। सुभाष का मानना था कि जिन एक्ट्रेसेस के नाम ‘M’ से शुरू होते हैं, उनकी फिल्में हमेशा हिट होती हैं।
इस अंधविश्वास की जड़ में थीं माधुरी दीक्षित और मीनाक्षी शेषाद्रि, जिनके साथ सुभाष की फिल्में राम लखन और हीरो जैसी ब्लॉकबस्टर रह चुकी थीं। इसलिए उन्होंने रितु को नाम बदलकर महिमा चौधरी रखने का सुझाव दिया। रितु, जो उस समय सिर्फ अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं, ने इस सलाह को मान लिया, क्योंकि वे अपनी पहली फिल्म को हिट बनाने के लिए हर संभव कोशिश करना चाहती थीं।
फैसला सही, मगर बाद में अफसोस
सुभाष का यह अंधविश्वास सही साबित हुआ। परदेस 1997 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कामयाबी हासिल की। शाहरुख खान के साथ महिमा की केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया और वे रातोंरात सनसनी बन गईं। लेकिन सालों बाद एक इंटरव्यू में महिमा ने खुलासा किया कि नाम बदलना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि ‘महिमा’ नाम से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान तो मिली, मगर अपने असली नाम ‘रितु’ से उनका भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा था। उन्हें लगता था कि रितु के साथ उनकी असल पहचान कहीं छूट गई।
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परदेस की विरासत और महिमा की लोकप्रियता
परदेस ने न सिर्फ महिमा को स्टार बनाया, बल्कि सुभाष घई के प्रोडक्शन हाउस मुक्ता आर्ट्स की साख को भी मजबूत किया। महिमा ने बाद में दिल क्या करे, दिल है तुम्हारा जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन परदेस जैसी कामयाबी दोबारा नहीं मिली। फिर भी, उनकी सादगी और टैलेंट ने उन्हें दर्शकों के दिलों में खास जगह दी। यह कहानी बताती है कि बॉलीवुड में सफलता के लिए टैलेंट के साथ-साथ कभी-कभी अंधविश्वास भी रंग लाता है, मगर असल पहचान हमेशा दिल से जुड़ी रहती है।



