मुंबई : फिल्मकार रोहित शेट्टी ने उन रिपोर्ट्स पर अपना पक्ष रखा है जिनमें दावा किया गया था कि उनकी निजी कारों पर अवैध रूप से ‘पुलिस’ के स्टिकर और फ्लैशिंग लाइट लगाई गई थी। रोहित शेट्टी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि ये स्टिकर इस साल की शुरुआत में उनके आवास पर हुई फायरिंग की घटना के बाद एक ‘अस्थायी सुरक्षा उपाय’ के रूप में लगाए गए थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स में यह सवाल उठाया गया था कि रोहित शेट्टी की निजी एसयूवी पर पुलिस जैसी मार्किंग और लाइट लगी हुई हैं। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत ये मार्किंग केवल आधिकारिक कानून प्रवर्तन वाहनों तक ही सीमित हैं। इसे लेकर शेट्टी पर नियम उल्लंघन के आरोप लग रहे थे।
रोहित शेट्टी की टीम का स्पष्टीकरण
शेट्टी के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “रोहित शेट्टी के आवास पर हुई फायरिंग की घटना के बाद, पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पहचान के लिए वे स्टिकर प्रारंभिक चरण में लगाए गए थे, जिन्हें अब बंद कर दिया गया है।”
टीम ने आगे पुष्टि की कि रोहित शेट्टी अभी भी मुंबई पुलिस की सुरक्षा में हैं और उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात हैं। प्रवक्ता ने मुंबई पुलिस के सहयोग के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया।
विवाद की पृष्ठभूमि
फायरिंग की घटना: 1 फरवरी 2026 की तड़के रोहित शेट्टी के आवास के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी। इस घटना की जिम्मेदारी कथित तौर पर बिश्नोई गैंग ने ली थी।
सुरक्षा की मांग: इस घटना के बाद, शेट्टी ने मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती को पत्र लिखकर खुद के साथ-साथ अपनी आने वाली फिल्म ‘गोलमाल 5’ की कास्ट और क्रू के लिए भी सुरक्षा बढ़ाने का अनुरोध किया था।
कानूनी पहलू: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 निजी वाहनों पर पुलिस की मार्किंग के उपयोग को प्रतिबंधित करती है। हालांकि, टीम का कहना है कि यह केवल सुरक्षा के लिहाज से एक अस्थायी व्यवस्था थी।



