नई दिल्ली: भारत का मनोरंजन जगत तेजी से बदल रहा है, जहां OTT प्लेटफॉर्म्स पारंपरिक टीवी को पीछे छोड़ते हुए लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुके हैं। ऑर्माक्स मीडिया की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब 60 करोड़ से अधिक लोग ओटीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कुल आबादी का 41 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है, हालांकि यह पहले के 13-14 प्रतिशत से थोड़ा कम है। इनमें 14.8 करोड़ सक्रिय पेड सब्सक्रिप्शन शामिल हैं, जो टेलीकॉम बंडल और एग्रीगेटर के जरिए मिलने वाले प्लान्स को भी कवर करते हैं। यह बदलाव न सिर्फ युवाओं तक सीमित है, बल्कि हर उम्र, इलाके और आर्थिक स्तर के लोगों को प्रभावित कर रहा है।
कनेक्टेड टीवी का कमाल
ओटीटी की पहुंच अब छोटे पर्दे से निकलकर बड़े टीवी स्क्रीन पर छा रही है। रिपोर्ट बताती है कि कनेक्टेड टीवी पर ओटीटी कंटेंट देखने वालों की संख्या 87 प्रतिशत उछाल के साथ 12.92 करोड़ हो गई है। यह करीब 35-40 मिलियन घरों का प्रतिनिधित्व करता है, जो मोबाइल-फर्स्ट बाजार में एक बड़ा मोड़ है। लोग अब स्मार्ट टीवी या स्ट्रीमिंग डिवाइस से कहीं भी, कभी भी कंटेंट एंजॉय कर रहे हैं, जो पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग को चुनौती दे रहा है।
पारंपरिक टीवी पर साया
दूसरी तरफ, पुराने ढर्रे का टीवी अब पीछे हट रहा है। केवल 25 प्रतिशत लोग ही अब सामान्य मनोरंजन के लिए लाइनियर टीवी पर निर्भर हैं, जबकि 23 प्रतिशत पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर मुड़ चुके हैं। एआईडीसीएफ और ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, पेड टीवी सब्सक्राइबर्स 2018 के 15.1 करोड़ से घटकर 2024 में 11.1 करोड़ रह गए, यानी 4 करोड़ घरों ने अलविदा कह दिया। यह गिरावट रोजगार पर भी असर डाल रही है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 7.1-8.1 करोड़ तक सिमट सकती है।
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गिरावट के पीछे की वजहें
इस बदलाव का राज है ओटीटी की सुविधा कहीं भी, कभी भी देखने की आजादी। प्लेटफॉर्म्स पर वैश्विक, क्षेत्रीय और कई तरह के कंटेंट की भरमार है, जो हर स्वाद को सूट करता है। प्रीमियम सब्सक्रिप्शन से ऐड-फ्री अनुभव मिलता है, जो टीवी की बाधाओं को दूर करता है। साथ ही, सस्ते इंटरनेट और स्मार्ट डिवाइस ने इसे सबकी पहुंच में ला दिया।
भविष्य की तस्वीर
ओटीटी का यह उभार मनोरंजन को ज्यादा व्यक्तिगत और विविध बना रहा है, लेकिन पारंपरिक सेक्टर को नई रणनीतियां अपनानी होंगी। 2030 तक भारत का ओटीटी बाजार और मजबूत होगा, जो कंटेंट क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स के लिए अवसरों से भरा है।



