नई दिल्ली: बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ अब अपनी कहानी के चलते राजनीतिक विवादों के घेरे में आ गई है।
फिल्म में उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता रहे अतीक अहमद के किरदार और उनके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से कथित संबंधों के चित्रण ने देश की सियासत को गर्मा दिया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है।

सपा का हमला
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने फिल्म की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास ऐसी मशीनरी है जो अपनी मनगढ़ंत कहानियों के आधार पर फिल्में बनवाती है ताकि जनता के मन में एक खास तरह की छवि गढ़ी जा सके। वहीं, मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा इस विवादित मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से बचती नजर आई और उन्होंने केवल ईद की मुबारकबाद देकर सवालों से किनारा कर लिया।
भाजपा और सहयोगियों का समर्थन
दूसरी ओर, बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने फिल्म का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “फिल्में समाज की घटनाओं को ही दर्शाती हैं। मैंने अतीक अहमद को करीब से देखा है और अगर फिल्म सच दिखा रही है तो इसमें कुछ गलत नहीं है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि फिल्म का क्रेज इतना है कि टिकटें ब्लैक में बिक रही हैं। उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी फिल्ममेकर्स का बचाव करते हुए कहा कि वे वही दिखाते हैं जो दर्शकों को पसंद आता है।
संतुलित रुख और सेंसर बोर्ड की भूमिका
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मामले में सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर नियमों के तहत फिल्म बनी है तो ठीक है, लेकिन किसी अपराधी का महिमामंडन समाज के लिए गलत संदेश हो सकता है। शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने भी संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि बॉलीवुड का उद्देश्य मनोरंजन है और विवादों से बचा जाना चाहिए।
आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म जहां एक ओर बॉक्स ऑफिस पर ₹236 करोड़ (वर्ल्डवाइड) का आंकड़ा पार कर चुकी है, वहीं अतीक अहमद और आईएसआई के एंगल ने इसे अब ‘चुनावी बहस’ का हिस्सा बना दिया है।



