पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चुनाव आयोग और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि राजनीतिक दलों की तरफ से कोई शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि उसने अकेले ही लगभग 89 लाख आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
कांग्रेस के आरोप: लाखों नाम काटे गए
रविवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिला स्तर पर अलग-अलग श्रेणियों में कुल 89 लाख शिकायतें दर्ज कराई हैं, और पार्टी के पास इसकी रसीदें भी मौजूद हैं।खेड़ा ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम काटने में एक खास पैटर्न देखने को मिल रहा है। उन्होंने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए:
- 20,000 बूथ ऐसे हैं, जहाँ 100 से ज्यादा लोगों के नाम काटे गए हैं।
- 2,000 से ज्यादा बूथ ऐसे हैं, जहाँ 200 से अधिक नाम हटाए गए हैं।
- 7,613 बूथों पर महिलाओं के नाम बड़े पैमाने पर, यानी 70% से ज्यादा काटे गए हैं।
- कांग्रेस ने इन बूथों पर काटे गए नामों के सत्यापन की मांग की है।
चुनाव आयोग का पक्ष: दावे और आपत्तियां कम
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अब तक 13.33 लाख से ज्यादा पात्र नागरिकों ने नए मतदाता बनने के लिए आवेदन किया है। इनमें से 61,248 आवेदनों का सात दिनों के भीतर निपटारा कर दिया गया है।
आयोग के अनुसार, अब तक सिर्फ 29,872 मतदाताओं ने अपने नाम जोड़ने के लिए दावा पेश किया है, जबकि 1.97 लाख से अधिक मतदाताओं ने खुद ही अपना नाम हटाने के लिए आवेदन किया है। आयोग ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों (BLA) की ओर से नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 25 और नाम हटाने के लिए 103 आपत्तियां ही दर्ज कराई गई हैं।
चुनाव आयोग ने दावा और आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर तय की है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस विवाद का कोई समाधान निकल पाता है या यह मामला और गहराता है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और कांग्रेस के अलग-अलग दावे बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर रहे हैं।
बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों, खासकर कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
- यह भारत निर्वाचन आयोग ( ECI) द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन (update) करने और त्रुटियों को दूर करने के लिए चलाया जाने वाला एक अभियान है।
- बिहार में यह कार्यक्रम 2025 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शुरू किया गया है।
- इसके तहत, मतदाता सूची में शामिल नामों की घर-घर जाकर जाँच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नाम सही हैं, कोई नाम छूटा तो नहीं है, या किसी मृत या स्थानांतरित हो चुके व्यक्ति का नाम गलती से सूची में शामिल न रह गया हो।
- इस प्रक्रिया में, ऐसे नाम जिनकी पहचान “संदिग्ध” के रूप में की गई है (जैसे एक ही घर में बहुत सारे नाम, या डुप्लीकेट एंट्री), उन्हें हटाने से पहले एक “स्पीकिंग ऑर्डर” जारी किया जाता है और संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है।
शिकायत और आपत्ति की प्रक्रिया
- मतदाता सूची के मसौदे (draft list) के प्रकाशन के बाद, नागरिकों और राजनीतिक दलों को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाता है।
- फॉर्म 6: नए मतदाता के रूप में नाम जोड़ने के लिए।
- फॉर्म 7: किसी भी नाम पर आपत्ति दर्ज करने या नाम हटाने के लिए..
- फॉर्म 8: किसी भी जानकारी में सुधार के लिए….
- राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी इन आपत्तियों को दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बिहार में बड़े पैमाने पर एक पैटर्न के तहत नाम काटे जा रहे हैं, जिससे कुछ विशेष समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने दावा किया है कि बोधगया के निदानी गांव जैसे स्थानों पर 947 मतदाताओं के नाम एक ही मकान संख्या के तहत दर्ज पाए गए हैं, जिसे पार्टी ने “चुनाव आयोग का चमत्कार” बताया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पहले चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में “हेरफेर” करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पास “100 प्रतिशत पुख्ता सबूत” हैं।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग इन आरोपों का खंडन करता रहा है और कहता है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ कानून के अनुसार की जा रही है। आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची में कोई भी नाम बिना उचित जांच के नहीं हटाया जाता है। आयोग ने यह भी बताया है कि हालांकि राजनीतिक दलों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया था, लेकिन उनकी तरफ से बहुत कम आपत्तियां मिली हैं। यह पूरा विवाद बिहार में आगामी चुनावों के मद्देनजर मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल खड़े करता है, जिसमें कांग्रेस लाखों शिकायतों का दावा कर रही है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसे राजनीतिक दलों से नाम मात्र की शिकायतें मिली हैं। यह खींचतान तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हो जाती।



