बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का बेतिया विधानसभा क्षेत्र इस बार भी एक दिलचस्प चुनावी लड़ाई का गवाह बन रहा है। BJP की मौजूदा विधायक रेणु देवी, जो राज्य की पहली महिला उप मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं और इस बार वह छक्का लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, कांग्रेस अपनी खोई हुई सीट को वापस पाने के लिए जोरदार कोशिश कर रही है। विकास के वादे और अधूरे काम, दोनों ही इस चुनाव में प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
पांच साल में हुए बदलाव
विधायक रेणु देवी और उनके समर्थकों के अनुसार, पिछले पांच सालों में बेतिया में कई बड़े विकास कार्य हुए हैं। पॉलिटेक्निक कॉलेज और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का भवन बनकर तैयार हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंची है और 35 से अधिक नई सड़कों का निर्माण हुआ है। पशुपालन के क्षेत्र में भी सुधार हुआ है, जिसमें पशु चिकित्सा वैन की सुविधा और एक लाख लीटर क्षमता वाले दूध शीतक केंद्र की मंजूरी शामिल है।
प्रमुख चुनावी मुद्दे
इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी हैं, जो सीधे तौर पर जनता को प्रभावित कर रहे हैं।
- शहरी विकास की कमी: निकटतम प्रतिद्वंद्वी मदनमोहन तिवारी (कांग्रेस) के अनुसार, बेतिया शहर की सड़कें अभी भी जर्जर हैं और जलजमाव की समस्या बनी हुई है। शहर के पानी के निकास के लिए जिम्मेदार चंद्रावत, कोहरा और अन्हरी-चन्हरी नदियों पर अतिक्रमण और गाद भरने की समस्या अभी भी अनसुलझी है।
- अधूरे वादे: बरवत-जीएमसीएच फोरलेन और जगदीशपुर-भरपटिया बाइपास सड़क का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा, बेतिया नगर निगम में शामिल नई पंचायतों में सड़क, नाली और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी नहीं पहुंची हैं।
- जमीन माफिया का आतंक: स्थानीय लोगों के लिए जमीन माफिया का आतंक एक बड़ी समस्या बना हुआ है, जिससे आम रैयत परेशान हैं।
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बेतिया का राजनीतिक इतिहास
बेतिया का राजनीतिक इतिहास काफी रोचक रहा है। आजादी के बाद लगातार 11 चुनाव तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ थी। वर्ष 1990 में भाजपा के मदन प्रसाद जायसवाल ने कांग्रेस के वर्चस्व को खत्म किया। तब से यह सीट भाजपा के पास ही रही है, सिवाय 1995 (जनता दल) और 2015 (कांग्रेस) को छोड़कर। रेणु देवी ने पहली बार 2000 में चुनाव जीता और तब से वे लगातार जीत रही हैं, सिर्फ 2015 के चुनाव को छोड़कर जब कांग्रेस के मदनमोहन तिवारी ने उन्हें मामूली अंतर से हराया था। 2020 में रेणु देवी ने फिर से यह सीट अपने नाम कर ली। रेणु देवी राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। इस बार के चुनाव में, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होने की उम्मीद है, लेकिन जनसुराज भी क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रशांत किशोर की पदयात्रा ने भी यहां काफी ध्यान खींचा है।



