नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने सितम्बर में होने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इन निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान अधिकतम 4 समर्थकों के साथ ही कैंपेनिंग कर सकेगा। यह निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और कल्ले में अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया है।
पहले क्या था नियम?
पहले के नियम के तहत किसी भी उम्मीदवार के समर्थकों की संख्या पर कोई स्पष्ट सीमा निर्धारित नहीं थी। बड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ कैंपेनिंग करते थे। इससे न केवल विश्वविद्यालय परिसर में भीड़ बढ़ जाती थी बल्कि क्लासरूम, हॉस्टल और सार्वजनिक स्थानों पर पढ़ाई-लिखाई का माहौल भी प्रभावित होता था। इसके साथ ही कैंपेनिंग के दौरान छात्र संगठनो के समर्थकों की आपस में मुठभेड़ भी हो जाती थी।
नई गाइडलाइन्स के तहत बदलाव
नई गाइडलाइन्स में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव प्रचार को लेकर कई कड़े कदम उठाए हैं:
- विश्वविद्यालय की तरफ से अब यह स्पष्ट कर दिया गया हैं की उम्मीदवार के साथ अधिकतम 4 समर्थक ही प्रचार कर पाएंगे।
- चुनाव प्रचार के लिए बाहरी व्यक्तियों (Outsiders) की एंट्री पर पूरी तरह रोक होगी।
- यूनिवर्सिटी द्वारा पूरे प्रचार के दौरान अशांति फैलाने, भीड़ बढ़ाने या पोस्टरबाजी पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
- साथ ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल प्रचार के लिए सीमित स्तर पर करने की सलाह दी गई है।
- सभी उम्मीदवारों को चुनावी आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य होगा।
नियम का उद्देश्य
DU प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव मुख्य रूप से कैंपस में सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किए गए हैं। इस फैसले से:
- समर्थकों की संख्या सीमित करने से भीड़ नियंत्रण करना आसान होगा।
- चुनाव प्रचार के दौरान छात्रो के बीच टकराव की संभावना भी कम हो जाएगी।
- कॉलेज के अन्य छात्रों के लिए पढ़ाई का माहौल बेहतर रहेगा।
- विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा और निगरानी को लेकर प्रशासन को सहायता मिलेगी।
निष्कर्ष
दिल्ली यूनिवर्सिटी द्वारा DUSU चुनाव के लिए लागू की गई नई गाइडलाइन्स का मकसद कैंपस में सुरक्षा और अनुशाशन बनाए रखना है। उम्मीदवार के साथ केवल 4 समर्थकों की अनुमति से कैंपस में भीड़, हिंसा और अनुशासनहीनता की संभावनाएँ कम होंगी। यह नियम छात्र राजनीति में अनुशाशन और संतुलन लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



