नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए दो अहम नीतिगत बदलावों की घोषणा की है, जो छात्रों को अधिक लचीलापन और समावेशी अवसर प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष पहली बार 10 तरह की सुपरन्यूमेररी कोटा सीट्स की शुरुआत की है।
इसके साथ ही, फोर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के अंतर्गत अब छात्र तीसरे वर्ष के बाद भी डिग्री लेकर प्रोग्राम से बाहर हो सकते हैं। ये दोनों बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप हैं और उच्च शिक्षा को अधिक छात्र-केंद्रित और सुलभ बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
सुपरन्यूमेररी कोटा सीट्स से किन्हें मिलेगा फायदा?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 2025–26 सत्र में पहली बार 10 अलग-अलग सुपरन्यूमेररी कोटा लागू किए हैं। ये कोटे विश्वविद्यालय की कुल सीटों के अतिरिक्त होंगे और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था (SC, ST, OBC, EWS आदि) से अलग होंगे।
इन कोटों में शामिल हैं:
- अनाथ छात्र
- एकल कन्या संतान
- ट्रांसजेंडर
- सशस्त्र बलों के शहीदों के बच्चे/विधवाएं
- कश्मीरी प्रवासी
- उत्तर पूर्वी क्षेत्र से संबंधित छात्र
- पर्सन विद डिसेबिलिटी (PwD)
- खेल कोटा (Sports Quota)
- सांस्कृतिक/साहित्यिक प्रतिभा (ECA Quota)
- विदेशी छात्र
दिल्लीयूनिवर्सिटी में इन कोटों के अंतर्गत सीटों की संख्या सीमित होगी और इसके लिए छात्रों को CSAS पोर्टल पर आवेदन के साथ-साथ उपयुक्त प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। इसमें खेल और सांस्कृतिक कोटे के लिए ट्रायल और ऑडिशन की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।
थर्ड ईयर एग्जिट ऑप्शन: अब तीन साल में भी मिल सकेगी डिग्री
NEP 2020 के तहत लागू किए गए FYUP में अब छात्रों को यह सुविधा दी गई है कि वे चौथे वर्ष तक रुकने के बजाय तीसरे वर्ष के बाद प्रोग्राम से बाहर निकल सकते हैं। विश्वविध्यालय ने इसे FYUP यानी Four Year Undergraduate Programme के हिस्से के तौर पर 2022-23 से लागू किया है।
क्या होगा इसका लाभ?
अगर छात्र किसी कारणवश चौथा वर्ष नहीं करना चाहते, तो वे तीसरे वर्ष की पढ़ाई पूरी कर मान्य स्नातक डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है जो जल्दी नौकरी शुरू करना चाहते हैं या किसी दूसरी दिशा में करियर बनाना चाहते हैं।
इससे छात्रों को न केवल करियर की दिशा तय करने में सहायता मिलेगी, बल्कि वे समय और संसाधनों को भी बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, DU के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने इस बदलाव को “छात्र हित में लचीलापन बढ़ाने वाला कदम” बताया है।
किन्हें कौन सी डिग्री मिलेगी?
BA/BSc/BCom (Programme) करने वाले छात्रों को 3-वर्षीय सामान्य स्नातक डिग्री मिलेगी।
BA/BSc (Honours) करने वाले छात्रों को उसी विषय में ऑनर्स डिग्री मिलेगी।
छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
छात्रो की तरफ से इन दोनों नीतियों का स्वागत हुआ है लेकिन कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया गया है जैसे;
सुपरन्यूमेररी कोटे में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी होगा ताकि योग्य छात्रों को सही लाभ मिल सके।
थर्ड ईयर एग्जिट विकल्प लेने वाले छात्रों को भविष्य में उच्च शिक्षा (जैसे मास्टर्स या रिसर्च) में प्रवेश के लिए अतिरिक्त जानकारी दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष:
दिल्ली विश्वविद्यालय का यह कदम न केवल सामाजिक समावेशन की दिशा में अहम है, बल्कि यह छात्रों को शिक्षा के प्रति अधिक स्वतंत्रता और लचीलापन भी देता है। सुपरन्यूमेररी कोटे के माध्यम से वंचित तबकों को DU जैसे बड़े विश्वविध्यालय में पढने का मौका मिलेगा, तो वहीं थर्ड ईयर एग्जिट विकल्प छात्रों को समय और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद करेगा।



