नई दिल्ली: आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों के मद्देनज़र DU प्रशासन ने अनुशासित और स्वच्छ चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। सितंबर में होने वाले इन छात्र चुनावों से पहले विश्वविद्यालय ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी गैरकानूनी गतिविधि या प्रचार नियमों के उल्लंघन पर सख्त और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
DU की उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए अहम निर्णय
बुधवार को विश्वविद्यालय के प्रो-क्टर कार्यालय, मौरिस नगर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य चुनाव अधिकारी, प्रो-क्टोरियल बोर्ड के सदस्य, मौरिस नगर थाना प्रभारी, और DUSU पदाधिकारी शामिल हुए।बैठक में चुनावी गड़बड़ी रोकने, अनुशासन बनाए रखने, और प्रचार के तौर-तरीकों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस मीटिंग में तय किया गया कि:
1.चुनाव प्रचार में काले शीशों वाली या बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल सख्त रूप से प्रतिबंधित यानि मना रहेगा।
2. ऐसे वाहन पाए जाने पर उन्हें तुरंत जब्त कर लिए जाएंगे।
विज़ुअल पॉल्यूशन पर रोक के लिए DU की गाइडलाइन्स
हर साल DUSU चुनावों के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में बेतरतीब पोस्टर, ग्रैफिटी और बैनर लगाने से विज़ुअल पॉल्यूशन और अव्यवस्था देखी जाती रही है। इसे रोकने के लिए इस बार यूनिवर्सिटी ने कुछ अहम फैसले लिए हैं:-
1. चुनाव प्रचार के लिए केवल हैंडमेड पोस्टर की अनुमति दी गई है।
2. सभी छात्र उम्मीदवारों को निर्धारित खर्च सीमा के भीतर ही प्रचार करने का आदेश दिया गया है।
3.विश्वविद्यालय की दीवारों, पेड़ों और स्ट्रीट लाइट्स पर प्रचार सामग्री लगाने की सख्त मनाही है।
“वॉल ऑफ डेमोक्रेसी” का प्रस्ताव
छात्र नेताओं ने प्रचार के लिए वैकल्पिक स्थान मुहैया कराने का सुझाव दिया। उन्होंने हर कॉलेज में एक “वॉल ऑफ डेमोक्रेसी” (लोकतंत्र की दीवार) निर्धारित करने की मांग की, जहाँ छात्र सीमित मात्रा में प्रचार सामग्री चिपका सकें।इस प्रस्ताव को विश्वविद्यालय ने सकारात्मक रूप से लिया है और इसे संबंधित कॉलेज प्रशासन को भेजने की बात कही है।
पिछले वर्ष की HC फटकार के बाद बढ़ी सतर्कता
पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट ने DUSU चुनाव प्रचार के दौरान फैली अव्यवस्था और दीवारों के दुरुपयोग पर कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट की टिप्पणी के बाद परिणामों को एक महीने के लिए टालना भी पड़ा था।इस बार प्रशासन ऐसी किसी स्थिति से बचने के लिए पहले से ही सतर्क है।

साफ-सफाई और मर्यादा पर विश्वविद्यालय की एडवाइजरी
पिछले सप्ताह गुरुवार को विश्वविद्यालय ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी कॉलेजों और छात्रों से साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। इसमें कहा गया:
1. विश्वविद्यालय या कॉलेज की संपत्ति जैसे विभाग, पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन आदि पर प्रचार करना गंभीर अपराध माना जाएगा।
2. दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक नियुक्तियाँ
DUSU चुनावों की निगरानी और संचालन के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय ने पूरी प्रशासनिक संरचना निर्धारित कर दी है:
1. कुलपति योगेश, जो DUSU के संरक्षक हैं उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी और मुख्य रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति कर दी है।
2. सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल और संस्थानों के प्रमुखों को अपने-अपने परिसरों के लिए चुनाव अधिकारी बनाया गया है।
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निष्कर्ष:
DUSU चुनाव हर साल छात्रों के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन इसके साथ अक्सर अव्यवस्था, प्रदूषण और नियमों की अनदेखी देखी जाती रही है। इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन की पहले से तैयार और सख्त नीति से यह उम्मीद की जा रही है कि चुनाव स्वच्छ, अनुशासित और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे।अगर कॉलेज स्तर पर “वॉल ऑफ डेमोक्रेसी” जैसे विचारों को अपनाया गया, तो यह छात्रों को अभिव्यक्ति की आज़ादी और ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना भी सिखाएगा।यह स्वच्छ और अनुशासित चुनाव की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता हैं।



