नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों को लेकर चुनाव प्रचार में हो रही तोड़फोड़ और अनुशासनहीनता को रोकने के लिए नई सख्त गाइडलाइन जारी की हैं। यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें प्रचार के दौरान संपत्ति को हुए नुकसान के लिए कड़ी जिम्मेदारी तय की गई है।
₹1 लाख का बॉन्ड अनिवार्य
नए नियमों के तहत सभी चुनावी उम्मीदवारों को अपने समर्थकों द्वारा प्रचार के दौरान किसी भी नुकसान की भरपाई के लिए ₹1 लाख का बॉन्ड जमा करना होगा। इसके अलावा, छात्रों को प्रवेश के समय एंटी-डिफेसमेंट (संपत्ति की रक्षा) का हलफनामा भी भरना अनिवार्य होगा, जो पहले से मौजूद एंटी-रैगिंग घोषणा के समान है।
सख्त दंड और प्रतिबंध
नियम के तहत यदि कोई छात्र उम्मीदवारों की पहचान बनकर प्रचार करता है या पोस्टरों पर जानबूझकर नाम गलत लिखता है, तो उसे ₹25,000 तक का जुर्माना, निलंबन या विश्वविद्यालय से निष्कासन का सामना करना पड़ सकता है।
पारंपरिक प्रचार विधियों पर प्रतिबंध
दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशानुसार रैलियों, रोड शो और लाउडस्पीकर के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके स्थान पर प्रचार डिजिटल माध्यमों और संरचित बहसों के जरिए किया जाएगा, जिन्हें विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा।
“डेमोक्रेसी की दीवारें” और निगरानी व्यवस्था
कॉलेजों को पोस्टर लगाने के लिए “डेमोक्रेसी की दीवारें” बढ़ानी होंगी ताकि प्रचार व्यवस्थित रूप से हो सके। विश्वविद्यालय तथा कॉलेज स्तर पर “प्रॉपर्टी डिफेसमेंट रोकथाम समिति” गठित की जाएगी, जिनके सदस्यों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
आयोजन स्थल और प्रवेश नियंत्रण
DUSU ऑफिस बियरर केवल तीन स्वीकृत स्थानों पर ही आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे। विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस और हॉस्टल बुकिंग पर रोक रहेगी। बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा, जिसमें बायोमेट्रिक या फेसियल रिकॉग्निशन जैसी तकनीकें इस्तेमाल की जा सकती हैं।
कानूनी आधार
यह दिशा-निर्देश दिल्ली प्रॉपर्टी डिफेसमेंट रोकथाम अधिनियम, 2007 और संबंधित उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत जारी किए गए हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित हो।
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निष्कर्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी ये नए एंटी-डिफेसमेंट नियम चुनाव प्रचार को संयमित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भारी जुर्माना, बॉन्ड व्यवस्था और डिजिटल प्रचार को बढ़ावा देकर DU प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि आगामी DUSU चुनाव में अनुशासन बना रहे और छात्रों का शिक्षा के साथ-साथ स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्य भी मजबूत हों।



