नई दिल्ली | केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की। उन्होंने कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के गणनात्मक सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित नए पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस कार्यक्रम में कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी सहित शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

शिक्षा के लिए एआई, शिक्षा में एआई
सभा को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि “शिक्षा के लिए एआई, शिक्षा में एआई” की परिकल्पना के तहत यह पाठ्यक्रम भविष्य के लिए तैयार पीढ़ी बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहल स्कूलों में एक औपचारिक और संरचित एआई शिक्षा की नींव रखेगी। पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें शिक्षक पुस्तिकाओं और मजबूत मूल्यांकन ढांचों के माध्यम से विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर ही आधुनिक तकनीक से परिचित कराया जा सके।
नवाचार की संस्कृति को देगा बढ़ावा
शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच, डिजाइन अभिविन्यास और नवाचार की संस्कृति को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना नेतृत्व मजबूत कर रहा है, यह पाठ्यक्रम हमारे छात्रों को डिजिटल भविष्य को आकार देने में सक्षम बनाएगा। इस दूरदर्शी ढांचे को तैयार करने के लिए उन्होंने सीबीएसई और एनसीईआरटी की टीम को बधाई दी।
मानव क्षमता में एक राष्ट्रीय निवेश
राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पहले से ही दुनिया के कामकाज को बदल रही है। ऐसे में यह अनिवार्य है कि हमारे बच्चे तकनीक के केवल उपभोक्ता न बनकर उसके जिम्मेदार निर्माता बनें। उन्होंने इसे ‘मानव क्षमता में एक राष्ट्रीय निवेश’ करार दिया जो एनईपी 2020 की परिकल्पना को साकार करता है। यह पाठ्यक्रम छात्रों को अनिश्चितता का सामना करने और व्यवधान को अवसर में बदलने की शक्ति प्रदान करेगा।
मूल्यांकन की प्रक्रिया में बदलाव
यह नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक सोच, समस्या समाधान और पैटर्न की पहचान जैसे कौशल विकसित करना है। शिक्षण पद्धति को मनोरंजक बनाने के लिए इसे गतिविधि-आधारित रखा गया है, जिसमें गणितीय खेल, पहेलियां और सामूहिक चर्चाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मूल्यांकन की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जहां रटने के बजाय छात्र की रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान को परखा जाएगा।



