नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CWSN – Children With Special Needs) के लिए एक अहम कदम उठाया है। बोर्ड ने 2026 की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए दिव्यांग छात्रों के रजिस्ट्रेशन के लिए परिक्षा संगम पोर्टल शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग और विशेष जरूरतों वाले छात्र बिना किसी परेशानी के अपनी परीक्षाएं दे सकें। यह कदम समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और समयसीमा
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां पढ़ने वाले विशेष जरूरतों वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन परिक्षा संगम पोर्टल पर करें। यह प्रक्रिया 9 सितंबर 2025 से शुरू होगी और 22 सितंबर 2025 की रात 11:59 बजे तक चलेगी। स्कूलों को इस दौरान पात्र छात्रों की पहचान कर, उनके मेडिकल सर्टिफिकेट और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा के बाद रजिस्ट्रेशन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए स्कूलों को समय पर कार्य पूरा करना होगा।
स्कूलों की जिम्मेदारी और प्रक्रिया
रजिस्ट्रेशन के दौरान स्कूलों को कई महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। सबसे पहले, वे अपने छात्रों में से उन लोगों को चिह्नित करेंगे जो CWSN श्रेणी में आते हैं। इसके बाद, उनकी विशिष्ट जरूरतों के आधार पर उपयुक्त परीक्षा सुविधाओं का चयन करना होगा। उदाहरण के लिए, कुछ छात्रों को अतिरिक्त समय, अलग से बैठने की व्यवस्था या सहायक लेखक (राइटर) की जरूरत हो सकती है। स्कूलों को सीबीएसई के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का सख्ती से पालन करना होगा ताकि प्रक्रिया में कोई कमी न रहे।
छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं
इस पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन के बाद, चुनी गई सुविधाएं सीधे छात्रों के एडमिट कार्ड पर दर्ज हो जाएंगी। इससे परीक्षा केंद्रों को पहले से ही छात्रों की जरूरतों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे वे उचित व्यवस्थाएं कर सकेंगे। यह सुविधा सुनिश्चित करेगी कि दिव्यांग छात्रों को अपनी क्षमताओं के अनुसार परीक्षा देने का मौका मिले।
समावेशी शिक्षा की दिशा में कदम
सीबीएसई का यह प्रयास न केवल दिव्यांग छात्रों के लिए परीक्षा प्रक्रिया को आसान बनाएगा, बल्कि यह समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कदम समाज में जागरूकता फैलाने और विशेष जरूरतों वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।



