नई दिल्ली: सीबीएसई कक्षा 10वी की गणित की परीक्षा जो 17 फरवरी, 2026 को आयोजित हुई थी उसके कठिन स्तर को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच मचे घमासान पर बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह ने चुप्पी तोड़ी है।
चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि प्रश्न ‘आउट ऑफ सिलेबस’ नहीं थे, बल्कि यह मूल्यांकन के बदलते पैटर्न और योग्यता-आधारित शिक्षा की ओर बढ़ते कदम का परिणाम है।
पैराबोला सवाल पर मचा था बवाल
परीक्षा के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर छात्रों ने विशेष रूप से ‘केस स्टडी’ आधारित पैराबोला के प्रश्न पर आपत्ति जताई थी। छात्रों का कहना था कि इसमें ‘वर्टेक्स फॉर्मूला’ और ‘आर्क लेंथ’ जैसे कॉन्सेप्ट्स का उपयोग भ्रमित करने वाला था, जो उनके स्टडी गाइड्स में नहीं थे। 2 अप्रैल को एक इंटरैक्शन के दौरान शिक्षकों ने भी बोर्ड के सामने यह मुद्दा उठाया कि कुछ प्रश्न सीधे एनसीईआरटी की किताबों से नहीं थे।
रटने की आदत छोड़ने की सलाह
इन शिकायतों का जवाब देते हुए राहुल सिंह ने कहा, “प्रश्न पत्र आउट ऑफ सिलेबस नहीं था, बल्कि छात्र अपरिचित फॉर्मेट में कॉन्सेप्ट्स को लागू करने के आदी नहीं हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि छात्र पारंपरिक रूप से केवल किताबों में दिए गए सीधे सवालों के जवाब देने के लिए ‘कंडीशन’ किए गए हैं।
चेयरमैन ने सिस्टम की खामियों को स्वीकार करते हुए कहा कि अक्सर कक्षा 9वीं और 11वीं के कठिन कॉन्सेप्ट्स को छात्र गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि उनका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होता है। यही कारण है कि जब बोर्ड परीक्षाओं में इनका एप्लीकेशन (प्रयोग) पूछा जाता है, तो छात्रों को यह मुश्किल लगता है।
भविष्य में और बढ़ेंगे ऐसे सवाल
सीबीएसई चेयरमैन ने संकेत दिया कि आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं में अधिकांश प्रश्न योग्यता-आधारित होंगे। उन्होंने कहा:
- समझ पर जोर: अब रटने के बजाय विषय की समझ का परीक्षण किया जाएगा।
- नई एनसीईआरटी पुस्तकें: कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए नई किताबें तैयार की जा रही हैं ताकि उच्च कक्षाओं में अचानक बढ़ने वाले शैक्षणिक दबाव को कम किया जा सके।
- क्लासरूम टीचिंग में सुधार: केवल सिलेबस पूरा करना काफी नहीं है, बल्कि छात्रों को कॉन्सेप्ट्स को असल जिंदगी में लागू करना सिखाना होगा।



