देशभर के कई बोर्ड अब मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। इसकी कार्यप्रणाली को कुछ मुख्य चरणों में समझा जा सकता है
1. डिजिटल स्कैनिंग और ओसीआर तकनीक
सबसे पहले, छात्रों की हस्तलिखित कॉपियों को उच्च क्षमता वाले स्कैनर्स के जरिए डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाता है। यहां ओसीआर तकनीक का उपयोग होता है, जो छात्र की लिखावट को पहचानकर उसे डिजिटल टेक्स्ट में बदल देती है। आधुनिक एआई मॉडल अब खराब हैंडराइटिंग को भी काफी सटीकता से समझने में सक्षम हैं।
2. की-वर्ड्स और कॉन्सेप्ट मैपिंग
एआई सिस्टम में पहले से ही ‘मॉडल आंसर की’ फीड की जाती है। एआई यह देखता है कि छात्र ने उत्तर में जरूरी की-वर्ड्स और कंसेप्ट्स का इस्तेमाल किया है या नहीं। यदि प्रश्न 5 नंबर का है और छात्र ने सभी मुख्य बिंदु लिखे हैं, तो एआई उसी आधार पर अंकों का सुझाव देता है।
3. विसंगतियों की पहचान
एआई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मानवीय गलतियों को पकड़ लेता है। जैसे:
- अगर किसी पन्ने पर नंबर देना छूट गया हो।
- अगर अंकों का कुल जोड़ गलत हो।
- अगर एक ही छात्र की लिखावट अचानक बदल गई हो (जो नकल की ओर इशारा करता है)।
एआई के आने से क्या बदल जाएगा?
| विशेषता | पारंपरिक तरीका | एआई-आधारित मूल्यांकन |
| गति | एक शिक्षक को कॉपी चेक करने में काफी समय लगता है। | एआई हजारों कॉपियों को कुछ ही मिनटों में प्रोसेस कर सकता है। |
| सटीकता | थकान या मूड की वजह से अंकों में उतार-चढ़ाव संभव है। | एआई पूरी तरह से डेटा और लॉजिक पर काम करता है, जो निष्पक्ष है। |
| रिजल्ट | परिणाम घोषित होने में महीनों का समय लगता है। | रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाती है। |
क्या शिक्षक की भूमिका खत्म हो जाएगी?
नहीं, यह समझना जरूरी है कि एआई शिक्षकों को रिप्लेस नहीं कर रहा, बल्कि उनकी सहायता कर रहा है।
हाइब्रिड मॉडल: वर्तमान में ज्यादातर बोर्ड ‘हाइब्रिड मॉडल’ अपना रहे हैं। एआई कॉपी चेक करके अंकों का एक ड्राफ्ट तैयार करता है, जिसे अंत में एक अनुभवी शिक्षक द्वारा वेरिफाई किया जाता है।
जटिल उत्तर: निबंध या रचनात्मक लेखन जैसे विषयों में आज भी मानवीय संवेदना और समझ की जरूरत होती है, जहां शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।
‘शिक्षा में एआई’ के बढ़ते कदम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी मेधावी छात्र के साथ मूल्यांकन में भेदभाव न हो और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से त्रुटिहीन बने। यह तकनीक भविष्य में बोर्ड परीक्षाओं के डर को कम करने और मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।



