नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान को एक संभावित इजरायली हमले को लेकर आगाह किया था। यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट में किया गया है। हालांकि, इस दावे की अमेरिका, इजरायल, ईरान या पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को आशंका थी कि इजरायल ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी कारण अमेरिका ने मध्य-पूर्व के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान तक गोपनीय संदेश पहुंचाया और ईरानी नेतृत्व को सतर्क रहने की सलाह दी।
शांति वार्ता पर खतरे की आशंका
NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन उस समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता कराने और क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश कर रहा था। अमेरिका को डर था कि यदि वार्ता में शामिल शीर्ष ईरानी नेताओं पर हमला हुआ तो बातचीत और संभावित युद्धविराम की पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है।
पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी मिला अलर्ट
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में एक बैठक के लिए जा रहे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को भी हमले की आशंका थी। इसी वजह से पाकिस्तानी वायुसेना ने कथित तौर पर ईरानी विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। लौटते समय सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद विमान की मशहद में आपात लैंडिंग कराई गई और प्रतिनिधिमंडल सड़क मार्ग से तेहरान पहुंचा। इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अराघची और गालिबाफ निशाने पर
रिपोर्ट के अनुसार इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की कथित हिट लिस्ट में विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ शामिल थे। दोनों नेता अमेरिका-ईरान वार्ता में अहम भूमिका निभा रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका को आशंका थी कि इन नेताओं को निशाना बनाए जाने से कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह विफल हो सकते हैं।
विमान पर हमले की भी रिपोर्ट में चर्चा
NYT की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गालिबाफ के तेहरान लौटने के दौरान उनके विमान पर संभावित हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिलने के बाद विमान की आपात लैंडिंग कराई गई और उनकी यात्रा का शेष हिस्सा सड़क मार्ग से पूरा कराया गया। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिका ने चेतावनी क्यों दी?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका उस समय क्षेत्रीय तनाव को कम कर कूटनीतिक समाधान चाहता था। उसका मानना था कि यदि वार्ता में शामिल शीर्ष ईरानी नेताओं की हत्या होती है तो बातचीत पूरी तरह खत्म हो जाएगी और मध्य-पूर्व में संघर्ष और बढ़ सकता है। इसी कारण अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान को संभावित खतरे की जानकारी दी। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि अमेरिकी दबाव के बाद इजरायल ने कथित तौर पर इन नेताओं को अपनी संभावित लक्ष्य सूची से हटाया था।



