नई दिल्ली: दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था में व्यापक सुधार, सीवर अवसंरचना को सशक्त करने और यमुना पुनर्जीवन की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की 176वीं बैठक में राजधानी से जुड़े कई अहम निर्णयों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का सीधा असर जल आपूर्ति, स्वच्छता और दीर्घकालिक जल योजना पर पड़ेगा, खासकर अनधिकृत और वंचित इलाकों में। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि ये निर्णय तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाते हैं, जिसका उद्देश्य अनियंत्रित व्यवस्थाओं को समाप्त करना और सेवा वितरण में सुधार लाना है।
600 ईवी वॉटर टैंकर: जल वितरण में संरचनात्मक सुधार
बोर्ड ने दिल्ली की टैंकर आधारित जल आपूर्ति प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए 600 इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आधारित वॉटर टैंकरों की तैनाती को मंज़ूरी दी।
• 300 ईवी टैंकर पूरी तरह निःशुल्क जल आपूर्ति के लिए होंगे, जो जल संकटग्रस्त रिहायशी इलाकों में सेवाएं देंगे
• शेष 300 ईवी टैंकर नियंत्रित व नियामक भुगतान व्यवस्था के तहत वाणिज्यिक व संस्थागत उपयोग के लिए होंगे
इस व्यवस्था से वर्षों से चले आ रहे ग्रे मार्केट, अवैध टैंकर माफिया और प्रदूषणकारी वाहनों पर सीधा प्रहार होगा।
सभी टैंकरों में:
• स्टेनलेस स्टील टैंक (जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु)
• रीयल-टाइम GPS ट्रैकिंग
• ऐप आधारित बुकिंग, ट्रैकिंग और डिलीवरी सिस्टम
लागू किया जाएगा, ताकि नागरिकों को यह स्पष्ट रूप से पता हो कि पानी कहाँ से आ रहा है, कब और कैसे पहुँच रहा है। ईवी टैंकरों से वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
“यह कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक सुधार है। 600 ईवी वॉटर टैंकर- 300 मुफ्त घरेलू आपूर्ति के लिए और 300 नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग के लिए- के ज़रिए हम प्रदूषण खत्म कर रहे हैं, ग्रे मार्केट पर लगाम लगा रहे हैं और जल आपूर्ति को पारदर्शी बना रहे हैं,”- प्रवेश साहिब सिंह
वजीराबाद बैराज के पोंडेज क्षेत्र का पुनर्जीवन
कच्चे पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बोर्ड ने वज़ीराबाद बैराज के पोंडेज क्षेत्र के पुनर्जीवन को मंज़ूरी दी। वर्षों से गाद (सिल्ट) जमने के कारण यहाँ जल भंडारण क्षमता गंभीर रूप से घट गई थी।
इस परियोजना के अंतर्गत:
• वैज्ञानिक तरीके से डी-सिल्टिंग
• पोंडेज क्षेत्र की बहाली की जाएगी, जिससे गर्मी के मौसम से पहले जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
महत्वपूर्ण रूप से, अधिकारियों ने बताया कि अब तक दिल्ली जल बोर्ड को डी-सिल्टिंग के लिए खर्च उठाना पड़ता था, लेकिन पहली बार ऐसा होगा कि डी-सिल्टिंग से DJB को राजस्व प्राप्त होगा। निकाली गई गाद के व्यावसायिक उपयोग से लागत की भरपाई होगी और बोर्ड पर वित्तीय बोझ कम होगा! “यह फैसला दिल्ली की जल सुरक्षा को स्रोत स्तर पर मज़बूत करता है। वज़ीराबाद पोंडेज के पुनर्जीवन से हम गर्मियों की चरम मांग को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे। इस पहल की ऐतिहासिक बात यह है कि जहाँ पहले डी-सिल्टिंग पर खर्च होता था, अब उससे DJB को आय होगी।
अनधिकृत कॉलोनियों के लिए सीवर कनेक्टिविटी
स्वच्छता से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में DJB ने चार ग्रुप ऑफ कॉलोनियों (GOC)-
संगम नगर, रन्होला, वज़ीराबाद और बेगमपुर- में हाउस सीवर कनेक्शन कार्यों को मंज़ूरी दी।
• लगभग 12.5 लाख लोग होंगे लाभान्वित
• कार्य अवधि: 6 से 12 माह
• खुले नालों और असुरक्षित निस्तारण व्यवस्था का अंत
इन क्षेत्रों का सीवेज निर्धारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स तक पहुँचेगा, जिससे नालों और यमुना में प्रदूषण का बोझ कम होगा।
“दशकों तक अनधिकृत कॉलोनियों के लोग बुनियादी सीवर सुविधा से वंचित रहे। यह सरकार हर बस्ती को गरिमा, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है,”।
ज़िंदपुर ड्रेनेज व सीवेज ट्रीटमेंट परियोजना
यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय के तहत ज़िंदपुर डिसेंट्रलाइज़्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट (DSTP) को मंज़ूरी दी गई।
• 15 MGD क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
• पंपिंग स्टेशन व सहायक अवसंरचना
• नवीनतम प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुरूप
यह परियोजना 33 कॉलोनियों और 14 गांवों- नरेला, बुराड़ी, बादली सहित- को कवर करेगी और 4.17 लाख से अधिक आबादी को लाभ पहुँचेगा।“हर बिना उपचारित नाला यमुना पर हमला है। यह परियोजना सुनिश्चित करेगी कि सीवेज को रोका जाए, उपचारित किया जाए और वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधित किया जाए,”।
वॉटर मास्टर प्लान 2051: भविष्य की तैयारी
दिल्ली की दीर्घकालिक जल आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए बोर्ड ने वॉटर मास्टर प्लान 2051 के निर्माण व पुनः मान्यता हेतु कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) को मंज़ूरी दी।
इस योजना में:
• जल आपूर्ति वृद्धि
• अवसंरचना आधुनिकीकरण
• सीवर रखरखाव
पर दीर्घकालिक रणनीति तय की जाएगी। “यह अगली पीढ़ी के लिए योजना बनाने का समय है। दिल्ली को एक वैज्ञानिक और दूरदर्शी रोडमैप की ज़रूरत है, और वॉटर मास्टर प्लान 2051 आने वाले दशकों का मार्गदर्शन करेगा,”।
परिचालन और निगरानी को मज़बूती
• ADB सहायता प्राप्त वज़ीराबाद परियोजना के लिए PMC
• भागीरथी और द्वारका जल शोधन संयंत्रों के संचालन एवं रखरखाव
को भी मंज़ूरी दी गई, जिससे पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रतिबद्धता
176वीं DJB बैठक में लिए गए फैसले तकनीक आधारित शासन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नागरिक-प्रथम सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। अवसंरचना सुधार, निगरानी और दीर्घकालिक योजना को जोड़कर दिल्ली जल बोर्ड ज़मीन पर ठोस बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मंत्री ने कहा “ये फैसले भरोसा बहाल करने के लिए हैं- सरकारी व्यवस्थाओं पर भरोसा, पानी की गुणवत्ता पर भरोसा और इस भरोसे के लिए कि सरकार नागरिकों के हित में काम कर रही है,”



